
रायपुर 16 मई 2023 I छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में 11 साल बाद सर्वे होने जा रहा है। राज्य के ग्रामीणों इलाकों में अब तक कितने लोगों को सरकारी योजना का लाभ मिला और कितने लोगों के नाम लिस्ट में शामिल नहीं है। इस तरह की जानकारी जुटाने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण कराया जा रहा है। सर्वेक्षण से विभिन्न योजनाओं से वंचित हितग्राही भी अब नवीन सूची में शामिल हो पाएंगे और उन्हें पात्रता के अनुसार सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। यह कार्य वित्तीय वर्ष 2023-24 के पहले दिन यानी 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है। इस कार्य के लिए दल बनाए गए हैं। ये टीम घर-घर पहुंचकर लोगों से परिवार की स्थिति की जानकारी लेगी। टीम को त्रुटि रहित सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। सर्वेक्षण के लिए वार्ड पंचों की जिम्मेदारी, मकानों का नंबरिंग, सर्वे की प्रक्रिया, मोबाइल एप, पोर्टल में ऑनलाइन एंट्री और मैनुअल एंट्री के बारे में जरूरी निर्देश दिए गए हैं। सर्वे में डाटा बेस के अनुसार योग्य पाए जाने पर शासकीय योजनाओं का लाभ मिलेगा। राज्य के सभी जिलों में सर्वेक्षण दल मोबाइल लेकर घर-घर दस्तक दे रहे हैं। मोबाईल ऐप्लीकेशन के माध्यम से दलों ने सर्वेक्षण से संबंधित डाटा संग्रहण का काम चल रहा है। सर्वे में कोई भी परिवार न छूटे और सभी इसमें शामिल हो सके, इसके लिए मकानों पर ऑयल पेंट से मोटे अक्षरों में लिखा जा रहा है ताकि ये जल्दी न मिटे। घर के सामने परिवार के मुखिया के साथ फोटो लेकर प्रपत्र के अलावा रजिस्टर में एंट्री की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने दिखाई हरी झंडी
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के हरी झंडी दिखाए जाने के बाद सभी जिलों के ग्रामीण इलाकों में सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण का कार्य शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मौके पर कहा कि छत्तीसगढ़ सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण नई-नई योजनाओं को बनाने और उनका बेहतर क्रियान्वयन कर लोगों को अधिक से अधिक लाभ दिलाने में महत्वपूर्ण साबित होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार द्वारा लोगों के विकास के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। इसके तहत नवाचार का प्रयोग करते हुए जनता की आवश्यकता के अनुरूप नई-नई योजनाओं को लागू कर उनका बेहतर ढंग से संचालन जारी है। जिनकी सराहना देश के अन्य राज्यों में भी होने लगी है।
ये जानकारी जुटाई जा रही
सर्वेक्षण के दौरान मकानों की नंबरिंग और पोर्टल में जानकारियों की ऑनलाइन और ऑफलाइन एंट्री के साथ ही दलों ने लोगों से परिवार के मुखिया की जानकारी, शैक्षणिक योग्यता, प्रधानमंत्री आवास, धान विक्रय का किसान पंजीयन क्रमांक, आधार नंबर, राशन कार्ड में परिवार की सूची, नरेगा जॉब कार्ड, परिवार की भूमि, परिवार की वार्षिक आय, सिंचाई साधन, वाहन एवं अन्य सामग्री, घर कच्चे या पक्के मकान, परिवार के कितने सदस्यों ने कौशल प्रशिक्षण प्राप्त किया, मोबाइल नंबर, उज्जवला गैस कनेक्शन, कृषि कार्य, स्वरोजगार, शासकीय नौकरी, निजी नौकरी, मजदूरी, बेरोजगारी आदि का सर्वे कर रही है। सर्वे के दौरान जानकारी लेकर मोबाईल ऐप्लीकेशन में एंट्री की जा रही है।
एक महीने में हो पूरा जाएगा सर्वे
छत्तीसगढ़ सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण 2023 के लिए सभी जिलों के कलेक्टरों को अपने-अपने जिले का नोडल अधिकारी बनाया गया है। जिले में रहने वाले ग्रामीण परिवारों के सर्वेक्षण का काम 30 अप्रैल 2023 तक पूरा किया जाना है। इसके लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में सर्वे कार्य के लिए एक गणना करने वाली टीम का गठन किया गया है। जिसमें एक पुरुष और एक महिला सदस्य शामिल हैं। ऐसी ग्राम पंचायत जहां परिवारों की संख्या अधिक है, वहां एक से अधिक गणना टीम सर्वेक्षण कार्य के लिए नियुक्त की गई है। वहीं गणना टीम के कार्यों की मॉनिटरिंग और उनको जरूरी सहयोग के लिए सुपरवाइजर भी नियुक्त किए गए हैं।
अफसरों को दी गई जिम्मेदारी
पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण 2023 को लेकर कलेक्टरों को दिशा-निर्देश जारी किया है। अपर मुख्य सचिव पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग सुब्रत साहू ने इस काम के समन्वय, क्रियान्वयन, पर्यवेक्षण और संचालन के लिए पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के संयुक्त सचिव गौरव सिंह को नोडल अधिकारी बनाया है। इसके अलावा अपर विकास आयुक्त व्हीपी तिर्की और पंचायत के उप संचालक दिनेश अग्रवाल को सहायक नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं राज्य स्तर पर शासन से सम्बंधित कार्यों को करने के लिए पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के संयुक्त सचिव अशोक चौबे को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
सर्वेक्षण का उद्देश्य
विगत वर्षों में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का आमजन के जीवन स्तर पर पड़े प्रभाव का आंकलन कर प्राप्त डाटा का भविष्य में योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और नई योजनाओं के निर्माण के लिए उपयोग किया जाना है। सर्वेक्षण से विभिन्न योजनाओं से वंचित हितग्राही भी अब नवीन सूची में शामिल हो पाएंगे और उन्हें पात्रता के अनुसार शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सकेगा।
जिलों में सर्वेक्षण के काम ने पकड़ी गति
दुर्ग जिले में दुर्ग, धमधा और पाटन अंतर्गत क्रमशः 65 सुपरवाइजर नियुक्त किए गए हैं। इस क्रम में दुर्ग, धमधा व पाटन जनपद में क्रमशः 186, 162 और 194 प्रगणक की नियुक्ति की गई है। ग्राम पंचायतवार 18 बिंदुओं पर ये प्रगणक सर्वे कर रहे हैं। महासमुंद जिले के 551 ग्राम पंचायतों में सर्वेक्षण के लिए 135 सुपरवाईजर और 1476 प्रगणक काम में जुटे हैं। सूरजपुर जिले में 110 सुपरवाइजर एवं 500 प्रगणक की ड्यूटी लगाई गई है। बिलासपुर जिले के 429 ग्राम पंचायतों के 694 ग्रामों में 145 सुपरवाइजर, 1021 प्रगणक दल गठित किए गए हैं। जिसकी निरीक्षण समन्वय एवं पर्यवेक्षण हेतु कुल 22 जनपद स्तरीय पर्यवेक्षक एवं 49 संकुल समन्वयक नियुक्त किया गया है। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के सभी 185 ग्राम पंचायतों के लिए 29 सुपरवाइजर एवं 219 प्रगणक दलों का गठन किया गया है, जिसमें 438 सदस्य हैं। प्रत्येक ग्राम पंचायतों के लिए दो सदस्य दल बनाए गए हैं। सक्ती जिले में 84 सुपरवाईजर और 536 प्रगणक दलों की टीम गठित की गई है। धमतरी जिले की 370 ग्राम पंचायतों के लिए कुल 126 सुपरवाइजर और 1000 प्रगणक नियुक्त किए गए हैं। कवर्धा जिले के सभी 468 ग्राम पंचायतों में घर-घर जाकर दल द्वारा सर्वेक्षण का कार्य किया जा रहा है। रायगढ़ जिले के 549 पंचायतों में सर्वेक्षण के लिए 944 प्रगणक दल का गठन किया गया है। कार्य की मॉनिटरिंग के लिए 124 सुपरवाइजर्स नियुक्त किए गए हैं। कांकेर जिले में कुल 454 ग्राम पंचायतों में 736 प्रगणक दल और 180 पर्यवेक्षक सर्वेक्षण कार्य में जुटे है।
