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रोशनी से नहाया हर घर

सरप्लस बिजली वाले राज्य में 2 हजार 978 मेगावाट विद्युत उत्पादन

रोशनी से नहाया हर घर
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By NPG News

रायपुर 18 दिसंबर 2022 I छत्तीसगढ़ सरकार की बिजली बिल हाफ योजना, मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास योजना, मुख्यमंत्री मजराटोला विद्युतीकरण योजना, मुख्यमंत्री शहरी विद्युतीकरण योजना से विद्युत अधोसंरचना को नया आधार मिलने के साथ ही उपभोक्ताओं को बिजली बिल में छूट से राहत मिली है। छत्तीसगढ़ सरकार की प्रयास से सुदूर वनांचल के सैकड़ों नक्सल प्रभावित गांव भी बिजली की रोशनी से जगमग हो उठे हैं। नवंबर महीने में ही सुकमा जिले के पांच गांवों सिलगेर, कोलईगुड़ा, कमारगुड़ा, नागलगुण्डा, और करीगुण्डम में रहने वाले 653 परिवारों के घर बिजली पहुंची है। जिससे उनका बरसों पुराना सपना सच हुआ है।

छत्तीसगढ़ बिजली सरप्लस राज्य है। यहां लगभग 2 हजार 978 मेगावाट विद्युत उत्पादन हो रहा है। यहां से केन्द्रीय पूल में बिजली देने के साथ ही देश के अन्य राज्यों को आपूर्ति भी की जा रही है। बिजली सरप्लस राज्य होने के कारण यहां उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण है। ताप विद्युत गृहों और बढ़ती बिजली अधोसंरचनाओं से देश के बिजली उत्पादन में छत्तीसगढ़ अग्रणी स्थान पर है। छत्तीसगढ़ में घरेलू उपभोक्ताओं और किसानों के साथ-साथ उद्योगों को भी सस्ती बिजली का लाभ दिया जा रहा है। किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए पम्प की क्षमता के अनुसार 6 हजार से 7 हजार यूनिट बिजली रियायती दर पर दी जा रही है। इसके अलावा किसानों को फ्लैट रेट की सुविधा भी दी जा रही है। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के किसानों को पूरी बिजली निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। अब तक 6.26 लाख किसानों को सिंचाई पम्पों पर विद्युत खपत में 10 हजार 400 करोड़ रूपए की छूट दी गई है। देश के अन्य राज्यों में महंगी बिजली से लोग परेशान है। वहीं छत्तीसगढ़ में सस्ती बिजली से लोग प्रसन्न है। मुख्यमंत्री का मानना है कि छत्तीसगढ़ में बिजली का उत्पादन अधिक है, तो इसका फायदा यहां के लोगों को मिलना चाहिए।

छत्तीसगढ़ में सस्ती बिजली मिलने से लोगों के रहन-सहन में तेजी से बदलाव आ रहा है। घरों में बिजली उपकरणों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। 01 मार्च 2019 से लागू की गई, हाफ बिजली बिल योजना का लाभ राज्य के लगभग 42 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को मिल रहा है। बिजली बिल में हो रही बचत राशि का उपयोग परिवार में अन्य जरूरी आवश्यकताओं के लिए उपयोग हो रहा है। अब तक घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली बिल में 3236 करोड की राहत दी गई है। गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को एकलबत्ती कनेक्शन के जरिए विद्युत की आपूर्ति की जा रही है। 30 यूनिट मासिक विद्युत का उपयोग करने वाले 16.82 लाख परिवारों को इसका लाभ मिल रहा है। इस योजना में विद्युत खपत पर 1973 करोड़ रूपए की छूट दी गई है।

अधोसंरचना में मजबूती

मुख्यमंत्री विद्युत अधोसंरचना विकास योजना में नये विद्युत के उपकेन्द्रों की स्थापना और विद्युत लाईनों के विस्तार का काम हो रहा है। इन कामों के लिए 817 करोड़ रूपए की स्वीकृति दी गई है। पिछले चार साल में 59 नये 33/11 केव्ही सबस्टेशन की स्थापना के साथ-साथ 173 किलोमीटर 33 केव्ही और 276 किलोमीटर 11 केव्ही बिजली लाईन विस्तार की गई। नगर निगम क्षेत्रों में मुख्यमंत्री शहरी विद्युतीकरण योजना में विद्युत लाईन विस्तार और अधोसंरचना के काम के लिए पिछले चार साल में 172 करोड़ रूपए की स्वीकृति दी गई है, जिससे अब तक 2617 कार्य पूर्ण किए गए हैं। मुख्यमंत्री मजरा-टोला विद्युतीकरण योजना में 238 करोड़ रूपए की लागत से 4593 कार्य कराए गए।

उद्योगों को मिली राहत

कोरोना काल में इस्पात उद्योगों को मंदी से उबारने के लिए राज्य सरकार द्वारा ऊर्जा प्रभार में राहत दी गई। अप्रैल 2019 से अधिसूचित टेरिफ में ऊर्जा प्रभार पर 80 पैसे प्रति यूनिट की रियायत इस्पात उद्योगों को दी गई। जिसके तहत वर्ष 2019 में मार्च माह तक 413 उद्योगों को 418 करोड़ रुपए की रियायत प्रदान की गई। पॉवर ट्रांसमिशनप्रदेश में विद्युत पारेषण विस्तार के लिए 36 अति उच्च दाब के निर्माण का काम पूरा किया गया। साथ ही कुरूद में 400 केव्ही क्षमता का उपकेन्द्र, जगदलपुर, नारायणपुर और बिलासपुर (धरदेही) में 220 केव्ही और बीजापुर, उदयपुर, खैरागढ़, खरमोरा एवं इंदामारा में 132 केव्ही की स्थापना कर ऊर्जीकृत किया गया है।

दो सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर इकाईयां लगेंगी

नए पावर प्लांट की स्थापना प्रदेश में 12 हजार 915 करोड़ रूपए की लागत से नवीन 1320 मेगावाट सुपर क्रिटिकल ताप विद्युत परियोजना की स्थापना की जाएगी। हसदेव ताप विद्युत गृह, दर्री (कोरबा पश्चिम) में उपलब्ध रिक्त भूमि पर 660-660 मेगावाट क्षमता की दो सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर इकाईयां स्थापित होगी। इसके साथ ही साथ 7700 मेगावाट के पंप स्टोरेज तकनीक आधारित जल विद्युत परियोजना पर काम प्रारंभ किया गया है।

शिकायतों का ऑनलाइन निपटारा

घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की शिकायत दर्ज करने के लिए मोर बिजली-मोर एप तैयार किया गया है। इस एप के जरिए घेरलू बिजली खपत की जानकारी के साथ-साथ नये कनेक्शन के लिए आवेदन, कनेक्शन बिजली बिल संबंधी शिकायत सहित विद्युत विभाग की सभी सेवाओं का लाभ उठाया जा सकता है। इसके अलावा विद्युत आपूर्ति में व्यवधान, शिकायतों के लिए केन्द्रीयकृत कॉल सेंटर भी बनाया गया है, जिससे विद्युत आपूर्ति से संबंधी शिकायतों का तत्काल निराकरण हो सके।

पानी से बनेगी 7700 मेगावाट बिजली

छत्तीसगढ़ में पानी से 7700 मेगावाट बिजली बनाने की नई तकनीक पर काम शुरू हुआ है। यह पंप स्टोरेज हाइडल इलेक्ट्रिक प्लांट है। इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाने का काम केंद्र सरकार के उपक्रम वॉटर एंड पावर कंसल्टेंसी सर्विसेस वैपकास को दिया गया है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी और वैपकास ने इसके लिये समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। छत्तीसगढ़ में राज्य जल विद्युत परियोजना यानी पंप स्टोरेज आधारित स्थापना नीति 2022 बनी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में 6 सितम्बर को हुई कैबिनेट की बैठक में इस नीति को मंजूरी दी गई थी। उस समय कहा गया था, इस तरह की परियोजना लगने से जलाशयों के पानी से बड़ी मात्रा में बिजली बनाई जा सकेगी। इसकी कीमत कोयला आधारित ताप बिजली घरों से सस्ती होगी। वहीं इसके उपयोग से पर्यावरण को भी कम नुकसान होगा। सोलर एजर्नी में प्रदेश कंट्रीब्यूट करे और बिजली का ज्यादा उत्पादन हो सके, इसलिए पंप स्टोरेज तकनीक से बिजली उत्पादन करने का निर्णय लिया गया है। इसका सर्वे भारत सरकार की वैपकास लिमिटेड कंपनी ने शुरू कर दिया है। उनकी रिपोर्ट आने के बाद संबंधित स्थानों को डेवलप करने के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।

यहां लगेगा प्लांट

हसदेव बांगो कोरबा-1200 मेगावाट

सिकासेर जलाशय गरियाबंद -1200 मेगावाट

डांगरी (जशपुर) - 1400 मेगावाट

रौनी (जशपुर) - 2100 मेगावाट

कोटपल्ली (बलरामपुर)- 1800 मेगावाट

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