रायपुर की रगों में घुलता नशा
स्मैक के धुएं से सुलग रही जवानी, नसों में उतारे जा रहे नशीले इंजेक्शन

NPG DESK
छत्तीसगढ़ और खासतौर से रायपुर में जवान हो रही पीढ़ी में नशे की लत तेजी से फैल रही है। रायपुर की रगों में नशा बसता जा रहा है। दिनों दिन नशे की जड़ें मजबूत होती जा रही हैं। कभी चोरी छिपे बिकने वाले नशे का सामान, आज धड़ल्ले से बिक रहा है। स्मैक के धुएं से जवानी सुलग रही है और नशीले इंजेक्शन नशों में उतारे जा रहे हैं। शहर की गली-गली में नशे के दीवाने झूमते दिख रहे हैं। सूखे और महंगे नशे की बढ़ती लत युवाओं के साथ उनके पूरे परिवारों को बर्बादी की ओर ले जा रहा है। नशे की चपेट में आए युवा सब कुछ लुटने के बाद 10 रुपए के इंजेक्शन और नशीली गोलियों से नशे की प्यास शांत कर रहे हैं। ये नशा शराब या सिगरेट का नहीं है, बल्कि गांजा, कोकीन, अफीम, डेंडराइट, स्मैक और नशीली दवाओं का है। इस तरह का नशा करने की वजह से युवाओं की मानसिक स्थिति बिगड़ती जा रही है। युवाओं के नशे के आदी होने के कारण क्राइम रेट्स भी लगातार बढ़ रहे हैं। चोरी, लूटपाट, मारपीट जैसी घटनाएं हो रही हैं। पकड़े जाने के बाद आरोपी ये कबूल भी कर रहे हैं कि उन्होंने नशे की लत की वजह से ये अपराध किए। रायपुर में नारकोटिक्स सेल ने ओड़िशा, मध्यप्रदेश, दिल्ली समेत अनेक राज्यों से तस्करों को पकड़ा है। इन आरोपियों के साथ नशीली सामग्री बेचने वालों के अलावा मेडिकल स्टोर संचालक और कई बड़े रसूखदार लोग भी शामिल हैं। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में ये बातें सामने आई हैं कि बाहरी राज्यों के तस्कर छत्तीसगढ़ में गांजा, नाइट्रोजन, अल्फाजोन, सिरप, अफीम, ब्राउन शुगर, हेरोइन, चरस, कोकिन और अन्य नशे के सामानों की बिक्री अलग अलग माध्यम से कर रहे है।
नाइट पार्टी का ट्रेंड बढ़ा
राज्य में हुक्का बंद होने के बाद नाइट पार्टियों का ट्रेंड रायपुर में बढ़ा है। इन पार्टियों में अधिकांश युवा शामिल होते हैं, जहां जमकर नशाखोरी की जाती है। कुछ क्लबों में तो युवक-युवतियां ब्राउन सुगर के साथ ही गांजा और शराब का भी सेवन करते हैं। नाइट पार्टी से निकलने के बाद नशे में धुत इन युवतियों के हुड़दंग के बहुत से मामले भी सामने आए हैं। कुछ पार्टियां शहर से दूर अंदरूनी इलाके में स्थित फार्म हाउस में होती है, ताकि पुलिस को इन पार्टियों की भनक न लगे। इस तरह की पार्टियों में रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासुपर जैसे इलाकों के ज्यादात यूथ शामिल होते हैं। नशे के सौदागर हाईटेक हैं और कोडवर्ड के सहारे नशे के कारोबार चलाते हैं। ये आरोपी युवाओं को रिझाने के लिए नाइट पार्टियों का सहारा लेते हैं, ताकि उनका कारोबार फल फूल सके। इसके लिए वे प्राइवेट पार्टियां भी आर्गनाइज करते हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से इन पार्टियों का इनविटेशन दिया जाता है और पार्टी में एंट्री के लिए फीस के रुप में मोटी रकम वसूली जाती है। रायपुर एसएसपी प्रशांत अग्रवाल बताते हैं कि ऐसी नाइट और प्राइवेट पार्टियों पर पुलिस की सख्त नजर रहती है। पिछले साल हमने बहुत सी कार्रवाई की है और नशे के बड़े नेटवर्क को ध्वस्त किया है। उनका कहना है कि एनडीपीएस एक्ट में जो भी आरोपियों को जेल हुआ है. यदि वे रिहा हो रहे हैं तो उन पर पुलिस की नजर है। रायपुर के बैजनाथपारा, ईदगाह भाठा, आमानाका, गोलबाजार सहित कई ऐसे इलाके है जहां धड़ल्ले से सूखे नशे का कारोबार हो रहा है। दूसरे पड़ोसी राज्यों के नशे के सौदागरों की पैठ चिंताजनक है। राजधानी पुलिस से लेकर प्रदेश की पुलिस नशे के कारोबार पर अंकुश लगा रही है, मगर लेकिन नशे के मुख्य नेटवर्क तक पहुंचने में अब तक असफल साबित हुई है।
2022 में पुलिस की कार्रवाई
पदार्थ प्रकरण गिरफ्तारी जब्त मात्रा कीमत
गांजा (किग्रा) 172 257 1263.314 किग्रा 1,26,33,140
अफीम (ग्राम) 1 1 96 ग्राम 10, 000
ब्राउन शुगर (ग्राम) 3 5 34 ग्राम 1,23, 000
हेरोईन 4 8 72.00 मिग्रा 3,60,000
चरस 2 11 252.00 ग्राम 2,20, 000
कोकीन 1 3 10 मिग्रा 50, 000
नशीली टेबलेट 30 55 3,64, 564 नग 5, 051, 023
सिरप 4 6 983 बाटल 59, 875
ड्रग्स 3 18 16.9 ग्राम 2,20, 000
कुल 220 364 60, 93,889
दुनिया भर में 26.9 करोड़
लोग ड्रग्स के शिकार
ड्रग्स के लिए भारत न केवल ट्रेड रुट है, बल्कि एक बड़ा बाजार भी बन चुका है। वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2020 के अनुसार 2018 में दुनियाभर में 15 से 64 साल के आयुवर्ग में 26.9 करोड़ लोग ड्रग्स के शिकार हैं। ये आंकड़ा दुनिया के इस आयुवर्ग का कुल जनसंख्या के 5.4 फीसदी है। रिपोर्ट पर भरोसा करें तो 2030 तक इस जनसंख्या में लगभग 11 फीसदी की बढ़ोतरी होगी और ये संख्या 29.9 करोड़ हो जाएगी। सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्रालय के द्वारा साल 2019 में एम्स के जरिए कराए गए एक सर्वे के मुताबिक भारत में 10 साल से 75 साल के बीच की 2.8 फीसदी आबादी लगभग 3 करोड़ लोग भांग का उपयोग करते हैं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की 2020 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार भारत में सबसे ज्यादा मात्रा में जब्त किया जाने वाला ड्रग गांजा है। भारत में पिछले 4 सालों में लगभग 7 लाख किलो गांजा बरामद किया जा चुका है। केवल 2021 की बात करें तो देश में 58 हजार किलो गांजा बरामद किया गया जो कि सभी जब्त किए ड्रग्स का लगभग 95 फीसदी है। नारकोटिक कंट्रोल ब्यूरो की 2020 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार पिछले चार साल में 60 हजार एकड़ से ज्यादा में गांजे की खेती को सरकारी एजेंसियों ने नष्ट किया है। दुनियाभर में गांजा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला ड्रग है। वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2020 के अनुसार 2019 में दुनियाभर में गांजे का सेवन करने वाले 15 से 64 साल आयुवर्ग के करीब 20 करोड़ लोग हैं। वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2020 के अनुसार 2010 से 2019 के बीच गांजा का इस्तेमाल करने वाले लोगों में 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। रिपोर्ट बताती है कि 77 देशों में गांजा का सेवन 42 फीसदी बढ़ गया है, लेकिन सेहत को सबसे ज्यादा नुक्सान पहुंचाने वाले ड्रग्स में इसका नाम नहीं है। दुनिया का सबसे ज्यादा हानिकारक ड्रग ओपिओइड यानी अफीम है। अफीम को इस्तेमाल करने वाले 58 फीसदी लोग एशिया में रहते हैं।
