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नरवा के पानी ने बदली जिंदगानी

छत्तीसगढ़ में 12 हजार से ज्यादा नरवा का विकास

नरवा के पानी ने बदली जिंदगानी
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By NPG News

रायपुर 7 जनवरी 2023 I छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लागू की गई चार चिन्हारी नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी योजना ग्रामीणों के लिए अब गांव एवं ग्रामीणों की तस्वीर और तकदीर बदलती दिख रही है। गांवों में 'नरवा, गरूवा, घुरवा और बाड़ी' के संरक्षण-संवर्धन के कार्यों ने अब मूर्त रूप लेना शुरू कर दिया है। चार साल में प्रदेश में 12 हजार से ज्यादा नरवा का विकास किया जा चुका है। नरवा-गरवा-घउरवा-बारी की वजह से गांवों के नरवा में निस्तारी के साथ मछली पालन भी शुरू किया गया है। वहीं अब पानी की तलाश में वन्यप्राणियों को भटकाना नहीं पड़ रहा। साथ ही सहायक नाले भी जीवित होने लगे और बारहमासी पानी की सुविधा मिलने लगी है।

सिंचित क्षेत्रों का बढ़ा दायरा

प्रदेश में नरवा का विकास होने से कई तरह के फायदे ग्रामीणों को मिलने शुरू हो गए हैं। नरवा में पानी ठहरने की वजह से मछली पालन करने का मौका भी ग्रामीणों को मिला है। 186 नरवा में इतना पानी है कि वहां पर मछली के बीज डाले गए हैं। साथ ही सिंचित क्षेत्रों का दायरा भी बढ़ा है। नरवा विकास से 4828 हेक्टेयर सिचिंत रकबा हो गए हैं और 82 लाख 16 हजार 241 घनमीटर का जलभराव दर्ज किया गया है। बारिश में बहने वाले नरवा का पानी ठहरने की वजह से अब जलस्तर में भी अच्छी बढ़ोतरी हो रही है। कुएं और तालाब के साथ नालों में भी 12 माह तक पानी देखने को मिल रहा है और उस पानी का इस्तेमाल ग्रामीण कर रहे हैं। इसकी वजह से 7 हजार 6 सौ 45 फीट तक जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है।


12 महीने मिल रहा पानी

छत्तीसगढ़ सरकार की नरवा योजना अब किसानों की ताकत बनने लगी है। पहाड़ों के नीचे खेती करने वाले किसानों को छोटे नालों के संवरने के चलते बारहों माह पानी मिलने लगा है। चेकडम निर्माण होने से खेतों में जलभराव की समस्या भी नहीं रह गई है। प्रदेश में 12 हजार 220 नरवा का विकास किया गया है। साथ ही चेकडम में लबालब पानी होने की वजह से ग्रामीणों को भी खूब फायदा हो रहा है। ग्रामीण युवा मछलीपालन कर रहे हैं, वहीं ग्रामीणों को निस्तारी के लिए दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ रही है। नरवा संवरने से वन्यप्राणियों को जंगलों के भीतर गर्मी के दिनों में भी पानी मिल रहा है।

ऐसे हुआ नरवा का विकास

ब्रश वुड चेक 1411

स्टैगर्ड कंटूर ट्रैन्चिंग 1544

कन्टीन्यूअस कंटूर ट्रैन्चिंग 18

गली प्लग 1802

लूस बोल्डर चेक 3111

गेबियन संरचना 279

मेढ़ बंधान 95

कंटूर बोल्डर वाल 41

डाईक 382

चेकडैम 30

स्टापडैम 08

तालाब 178

डबरी 341

परकुलेशन टैंक 62

अन्य 2328

डाइक कम बोल्डर चेक 473

सिल्ट ट्रेप 02

नाला पाथ ट्रीटमेंट 115

कुल 12220 निर्माण

बढ़ा मछलीपालन का कारोबार

छोटे नालों में ही चेकडैम का निर्माण किया गया है। वहां बारिश का पानी ठहरने लगा है। ग्रामीण मछलीपालन कर अच्छा फायदा ले रहे हैं।

डबल खेती से फायदा

पहाड़ी क्षेत्र और आसपास में नरवा निर्माण से डबल खेती हो रही है और पहाड़ों का पानी भी चेकडैम में ठहरने लगा है।

आसान हुई निस्तारी

चेकडम नहीं होने की वजह से पानी नहीं ठहरता था और निस्तारी काम के लिए दूर तालाब में जाना पड़ता था, लेकिन अब चेकडम

बनने से निस्तारी आसान हो गई है।

वन्यजीवों को मिल रहा पानी

गर्मी में ज्यादातर वन्यप्राणी पानी की तलाश में गांव तक पहुंच जाते थे। जंगलों में उन्हें पानी नहीं मिल पाता था, लेकिन अब वन्यप्राणी पानी की तलाश में गांव तक नहीं पहुंच रहे हैं।

चेकडैम की मजबूती के लिए ये काम

नरवा योजना के तहत चेकडैम मजबूती के साथ बनाया जा रहा है। चेकडैम के किनारे-किनारे मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए स्टाइलो हमाटा घास लगाई गई है। इससे मिट्टी नाले में बहेगी नहीं। किनारे-किनारे बोल्डर पत्थर भी लगाए गए हैं। इससे भी चेकडैम को मजबूती मिल रही है।

खेतों की मिट्टी में नमी

नरवा निर्माण के पहले स्थिति यह थी कि पानी चेकडैम में नहीं ठहरता था, लेकिन पानी का ठहराव होने की वजह से मिट्टी में नमी देखने को मिल रही है। कई फसलें ऐसी हैं कि जिन्हें कम पानी की जरूरत होती है। सबसे ज्यादा सब्जी की खेती में किसानों को फायदा मिल रहा है। किसान मक्का उत्पादन भी कर रहे हैं।

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