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मल्टीनेशनल ब्रांड को टक्कर दे रहा गोबर पेंट

25 जिलों की 37 गोठानों में गोबर से पेंट बनाने की यूनिट शुरू करने की तैयारी

मल्टीनेशनल ब्रांड को टक्कर दे रहा गोबर पेंट
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रायपुर 15 जनवरी 2023 I छत्तीसगढ़ के गांवों में जमीन और घरों की लिपाई-पुताई के काम आने वाले गोबर से अब इमल्शन और डिस्टेंपर पेंट तैयार किए जा रहे हैं। गोबर से तैयार हो रहे इमल्शन और डिस्टेंपर अब मल्टीनेशनल ब्रांड को टक्कर देने की तैयारी में हैं। पेंट निर्माण में अमूमन मल्टी नेशनल कंपनियां ही काबिज थीं, लेकिन अब छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाएं भी इस क्षेत्र में मजबूती से कदम रख चुकी हैं। एंटी बैक्टिरियल, एंटीफंगल, इको-फ्रेंडली और नॉन टॉक्सिक के रूप में प्रमाणित गोबर पेंट महंगे और बड़े ब्रांड की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत सस्ता भी है। प्रदेश के 25 जिलों की 37 गोठानों में गोबर से पेंट बनाने की यूनिट शुरू करने की तैयारी है। अभी रायपुर, दुर्ग और कांकेर जिलों की पांच गोठानों में इस तरह का पेंट बन रहा है।रायपुर के जरवाय गौठान गोवर्धन क्षेत्र स्तरीय महिला स्व सहायता समूह द्वारा लक्ष्मी ऑर्गेनिक संस्थान के सहयोग से गोबर पेंट बनाई जा रही है। इस समय इस गौठान में स्थापित यूनिट द्वारा प्रतिदिन 2 हजार लीटर इमल्शन पेंट बनाने की क्षमता है। जिसे भविष्य में मांग अनुरूप 5 हजार लीटर तक वृद्धि की जा रही है। यहां पर पुट्टी और डिस्टेंपर भी बनाई जा रही है। इस पेंट से राजधानी के नगर निगम मुख्यालय की इमारत जोन क्रमांक 8 की इमारत में पोताई की गई है। वहीं दुर्ग जिले के ग्राम लिटिया की ग्रामीण बहनें गांव में ही डिस्टेंपर निर्माण कर रही हैं। डिस्टेंपर यूनिट की निर्माण क्षमता हर दिन हजार लीटर तक की है। उन्होंने इसका विक्रय भी आरंभ कर दिया है। कांकेर जिले के चारामा विकासखण्ड के ग्राम सराधुन नवागांव के गौठान में सागर महिला क्लस्टर समूह द्वारा गोबर से पेंट का निर्माण किया जा रहा है, जिससे महिला स्व-सहायता समूह को आमदनी भी हुई है। इस गौठान में अब तक 1400 लीटर पेंट का निर्माण किया जाकर 373 लीटर पेंट का विक्रय भी किया जा चुका है, जिससे स्व-सहायता समूह की महिलाओं को 75 हजार 525 रुपए की आमदनी हुई है।


एंटी बैक्टीरिया, एंटीफंगल है गोबर पेंट

राष्ट्रीय स्तर की संस्था से प्रमाणित यह पेंट भारत सरकार की संस्था राष्ट्रीय प्रशिक्षण शाला के द्वारा प्रमाणित भी किया गया है। साथ ही इसके इसके विभिन्न प्रकार के गुण हैं। यह एंटी बैक्टीरिया, एंटीफंगल, इको-फ्रेंडली, नॉन टॉक्सिक है। यह भी वैज्ञानिक संस्थान द्वारा प्रमाणित है। इस प्राकृतिक पेंट में हैवी मटेरियल का उपयोग नहीं किया गया है। यह नेचुरल थर्मल इन्सुलेटर है अर्थात् इसमें चार से पांच डिग्री तापमान कम करने की क्षमता भी है।

30 से 40 फीसदी सस्ता है गोबर पेंट

रायपुर के जरवाय गौठान, दुर्ग जिले के गांव लिटिया और कांकेर के सराधुन नवागांव में गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने का का शुरू किया गया है। गोबर से बनने वाला प्राकृतिक पेंट बिल्कुल मल्टी नेशनल कंपनियों के द्वारा तैयार किए गए पेंट जैसा है। इसकी गुणवत्ता उच्च स्तरीय है, यह पेंट एंटी बैक्टीरिया और एंटीफंगल होता है। गोबर से बने इस पेंट की कीमत बाजार में उपलब्ध प्रीमियम क्वालिटी के पेंट की तुलना में 30 से 40 फीसदी कम है। इमल्शन पेंट की कीमत 225 रुपए प्रति लीटर है। यह 1,2,4 और 10 लीटर के पैकेज में तैयार किया जा रहा है। साथ ही यह बड़ी कंपनियों के पेंट की तरह करीब 4 हजार रंगों में भी उपलब्ध है। साथ ही पुट्टी डिस्टेंपर भी तैयार किया जा रहा है।

गोबर पेंट से होगी सरकारी भवनों की पुताई

रायपुर के सीजी मार्ट में पेंट की बिक्री की जा रही है। इसे जल्द ही ऑनलाइन प्लेटफार्म पर भी उपलब्ध कराने की योजना है। राज्य के 75 गौठानों में गोबर से प्राकृतिक पेंट और पुट्टी निर्माण की इकाइयां स्थापित की जा रही है। इस तरह हर दिन 50 लीटर और साल भर में 37.50 लाख प्राकृतिक पेंट का उत्पादन होगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे इस उच्च गुणवत्ता के पेंट को देखते हुए सभी शासकीय भवनों की पुताई कराने के निर्देश दिए हैं। लोक निर्माण विभाग द्वारा इसके लिए एसओआर भी जारी कर दिया गया है।

25 जिलों में लगेंगी 37 यूनिट

वर्तमान में गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने के लिए पांच यूनिट लगाई जा चुकी हैं। रायपुर और दुर्ग जिले के गौठानों में दो-दो तथा कांकेर के चारामा में एक यूनिट संचालित है। जहां से अब तक आठ हजार 997 लीटर प्राकृतिक पेंट का उत्पादन किया जा चुका है। इसमें से तीन हजार 307 लीटर प्राकृतिक पेंट के बिक्री से 7 लाख 2 हजार 30 रुपए की आय अर्जित हुई है। अब प्रदेश के 25 जिलों में 37 चिन्हित गौठानों में गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने की यूनिट स्थापना की कार्यवाही तेजी से पूरी की जा रही है। जनवरी महीने के अंत तक यह सभी 37 यूनिटें गोबर से प्राकृतिक पेंट का उत्पादन करने लगेंगी।

डेढ़ साल में करीब दो सौ करोड़ की गोबर खरीदी

छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना से जुड़ी कारोबारी गतिविधियों का विस्तार तेज हो रहा है। इस योजना के जरिये सरकार दो रुपया प्रति किलोग्राम की दर से गोबर और चार रुपया प्रति लीटर की दर से गौमूत्र खरीद रही है। छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना की शुरुआत 20 जुलाई 2020 से हुई। इसके जरिये सरकार दो रुपया प्रति किलोग्राम की दर से गोबर खरीदती है। अब तक इस योजना से 387 करोड़ 32 लाख रुपए का भुगतान हो चुका है। केवल 31 दिसम्बर 2022 तक गोबर बेचने वालों को ही 197 करोड़ 85 लाख रुपए का भुगतान हुआ है। गोठान समितियों और महिला स्व-सहायता समूहों को 171.87 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। राज्य में अब तक चार हजार 564 गोठान स्वावलंबी हो चुके हैं। यानी वे अपनी कमाई से गोबर खरीद रही हैं। स्वावलंबी गोठानों ने अब तक 35 करोड़ 19 लाख रुपए का गोबर अपने पैसे से खरीदा है।

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