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मेरे फर्स्ट एडिटरः जिनके टिप्स, मेरी जिंदगी के फलसफा बन गए....

मेरे फर्स्ट एडिटरः जिनके टिप्स, मेरी जिंदगी के फलसफा बन गए....
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By NPG News

संजय दीक्षित...

मेरे फर्स्ट एडिटरः जिनके टिप्स, मेरी जिंदगी के फलसफा बन गए....

रमेश नैयर जी नहीं रहे...इस खबर ने झंकझोर दिया। ये जानते हुए भी कि कुछ दिनों से उनकी तबियत ठीक नहीं चल रही थी...इस खबर पर सहसा यकीं नहीं हुआ। दिवाली के दिन जब उनका फोन रिसीव नहीं हुआ तो मैं उनके बेटे संजय को फोन लगाया था। संजय ने भारी मन से बताया, पापा ठीक नहीं हैं। बावजूद इसके....।

नैयर जी का जाना मेरे लिए इसलिए भी हिलाने वाला है कि वे मेरे पहले संपादक ही नहीं, बल्कि मेरे अभिभावक जैसे थे। समेवत शिखर मेरा पहला अखबार था। नैयरजी तब संडे आब्जर्बर को छोड़कर दिल्ली से रायपुर लौटे थे। समवेत शिखर उनके लिए पड़ाव जैसा था। अगस्त में नैयर जी समवेत शिखर को अलविदा कह बतौर संपादक दैनिक भास्कर ज्वाईन किए। उनके जाने के एकाध हफ्ता बाद मैं भी भास्कर पहुंच गया। रायपुर में तब मैं अकेला रहता था। मुफलिसी में जीवन यापन। सितंबर 93 में दैनिक भास्कर का बिलासपुर संस्करण प्रारंभ होने वाला था। नैयर जी ने एक रोज गार्जियन टाईप समझाते हुए निर्णय सुना दिया....संजय तुम बिलासपुर भास्कर चले जाओ...तुम्हारा वहां घर है...खाने-पीने की दिक्कत नहीं होगी। उन्होंने बिलासपुर भास्कर के तत्कालीन प्रबंध संपादक रामबाबू सोनथलिया से अपने रायपुर आफिस में मिलवा भी दिया। मुझे अच्छी तरह याद है...बिलासपुर में दस साल पत्रकारिता करने के बाद 2003 में रायपुर लौटा तो नैयरजी ने हंसते हुए राजनारायण मिश्रजी से कहा था...संजय को लगता है बिलासपुर रास नहीं आ रहा है। फिर बोले...तुमने ठीक किया...रायपुर राजधानी बन गई है...यहां काम करने का अवसर है।

बहरहाल, बहुत सारी बातों को लिखा नहीं जा सकता...बहुत लंबा हो जाएगा। मगर एक वाकया जरूर बताना चाहूंगा, जिसे मैं सूत्रवाक्य बना लिया। दरअसल, प्रेस की अंदरुनी खींचतान से कई बार मैं आहत हो जाता था। चूकि नैयरजी के बेटे संजय और संदीप मेरे दोस्त थे, इसलिए नियमित उनके घर आना-जाना था। एक रोज नैयरजी जब घर में चाय पी रहे थे, इस दौरान प्रेस की कोई बात निकली, मैंने अपनी कोई परेशानी साझा की। उन्होंने कहा, देखो संजय...अल्टीमेटली काम ही काम आता है, तुम अपना काम करते रहो। और दूसरा धैर्य के साथ...बिना धैर्य कोई भी आदमी कामयाब नहीं हो सकता। नैयरजी की इन दोनों बातों को मैंने अपनी जिंदगी का फलसफा बना लिया। यकीनन, आज मैं जो कुछ भी हूं...नैयरजी के इन गुरूमंत्रों की बदौलत।

नैयरजी यादों में अमर रहेंगे...सादर नमन!

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