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MD/MS Seats: छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन ने MD/MS सीटों को लेकर की मांग, कहा- “जब न्यायालय ने दिशा सुधारी है, तो शासन भी तुरंत नियम सुधारे”

MD/MS Seats: उच्च न्यायालय के हालिया स्पष्टीकरण आदेश में पूर्व निर्णय के उस भाग को वापस ले लिया गया है, जिसकी वजह से राज्य शासन को यह भ्रम हो गया था कि अन्य राज्यों से MBBS करने वाले अभ्यर्थियों को भी राज्य कोटे की शासकीय PG सीटों के लिए पात्र बनाना आवश्यक है...

MD/MS Seats: छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन ने MD/MS सीटों को लेकर की मांग, कहा- “जब न्यायालय ने दिशा सुधारी है, तो शासन भी तुरंत नियम सुधारे”
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By Sandeep Kumar

MD/MS Seats: रायपुर। छत्तीसगढ़ में शासकीय मेडिकल कॉलेजों की MD/MS सीटों को लेकर चल रहा विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। उच्च न्यायालय के हालिया स्पष्टीकरण आदेश में पूर्व निर्णय के उस भाग को वापस ले लिया गया है, जिसकी वजह से राज्य शासन को यह भ्रम हो गया था कि अन्य राज्यों से MBBS करने वाले अभ्यर्थियों को भी राज्य कोटे की शासकीय PG सीटों के लिए पात्र बनाना आवश्यक है। अब न्यायालय के संशोधित रुख से स्थिति पूर्णतः स्पष्ट हो चुकी है कि राज्य को अपने ही शासकीय मेडिकल कॉलेजों से MBBS करने वाले विद्यार्थियों को संस्थागत वरीयता देने का वैधानिक अधिकार प्राप्त है और शासकीय सीटों को बाहरी अभ्यर्थियों के लिए खोलने का कोई न्यायिक दबाव नहीं था।

छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन स्पष्ट रूप से कहना चाहता है कि जब न्यायालय ने स्वयं अपने आदेश में संशोधन कर राज्य को यह अधिकार पुनः प्रदान कर दिया है, तब शासन का यह नैतिक और संवैधानिक दायित्व बनता है कि वह 01.12.2025 को लाए गए अन्यायपूर्ण नियमों को तत्काल प्रभाव से वापस ले और शासकीय कॉलेजों की शेष राज्य कोटे की सीटों पर पुनः अपने राज्य के विद्यार्थियों के हित में नई अधिसूचना जारी करे।

यह अत्यंत चिंताजनक है कि

* शासकीय कॉलेज पहले ही अपनी कुल स्वीकृत सीटों का 50% अखिल भारतीय कोटे को दे चुके हैं।

* उसके बाद भी राज्य कोटे की शेष सीटों को “स्टेट ओपन” बनाकर बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों के लिए खोल दिया गया।

* अब जबकि उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि संस्थागत वरीयता वैध है, शासन के पास अपने ही छात्रों से सीट छीनने का कोई कानूनी आधार शेष नहीं है।

अब उच्च न्यायालय के स्पष्टीकरण के बाद राज्य शासन के पास यह वैधानिक अधिकार भी स्पष्ट हो चुका है कि निजी मेडिकल कॉलेजों की राज्य कोटे की सीटों पर भी छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों से MBBS करने वाले विद्यार्थियों को संस्थागत वरीयता दी जा सकती है, जिससे राज्य के छात्रों के हितों की बेहतर सुरक्षा संभव है।

छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन शासन से पूछना चाहता है

जब छात्रों के अहित में मात्र एक सप्ताह के भीतर नया नियम राजपत्र में प्रकाशित किया जा सकता है, तो क्या उनके हित में वही तत्परता नहीं दिखाई जा सकती?

क्या राज्य के प्रतिभाशाली डॉक्टरों का भविष्य बचाने के लिए त्वरित निर्णय लेना शासन के लिए संभव नहीं है?

छत्तीसगढ़ के सरकारी मेडिकल विद्यार्थियों के साथ जो हुआ है वह केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं बल्कि उनके अधिकारों का सुनियोजित हनन है। हजारों छात्रों के आंदोलन, लाखों रुपये के न्यायालयीन व्यय और करियर पर लटकी अनिश्चितता के बाद अब यह पूरी तरह सिद्ध हो चुका है कि शासन ने बिना स्पष्ट न्यायिक निर्देश के सरकारी सीटों को बाहरी अभ्यर्थियों के लिए खोल दिया।

छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन की स्पष्ट मांगें

1. 01.12.2025 के PG Admission Rules को शासकीय मेडिकल कॉलेजों की सीटों के संदर्भ में तत्काल निरस्त किया जाए।

2. शासकीय एवम प्राइवेट कॉलेजों की राज्य कोटे की सीटों पर पुनः संस्थागत वरीयता लागू करते हुए नई अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित की जाए।

3.काउंसलिंग प्रक्रिया पूर्णतः संशोधित नियमों के आधार पर करवाई जाए।

4. छात्रों के साथ हुए अन्याय की उच्च स्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही की जाए।

यदि शासन ने अब भी देरी की तो यह राज्य के सर्वश्रेष्ठ और मेधावी सरकारी डॉक्टरों के भविष्य के साथ स्थायी अन्याय होगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन पर होगी।


Sandeep Kumar

संदीप कुमार कडुकार: रायपुर के छत्तीसगढ़ कॉलेज से बीकॉम और पंडित रवि शंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी से MA पॉलिटिकल साइंस में पीजी करने के बाद पत्रकारिता को पेशा बनाया। मूलतः रायपुर के रहने वाले हैं। पिछले 10 सालों से विभिन्न रीजनल चैनल में काम करने के बाद पिछले सात सालों से NPG.NEWS में रिपोर्टिंग कर रहे हैं।

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