नवा छत्तीसगढ़ के 36 माहः कोरबा में बिहान की दीदियाँ घर में ही बना रहीं सेनेटरी पेड तो धमतरी में वर्मी कंपोस्ट भी

कोरबा 28 दिसंबर 2021। स्त्रियों के स्वाभिमान, सेहत की रक्षा के लिए राष्ट्रीय आजीविका मिशन बिहान के एक समुह की महिलाएं घर में ही सेनेटरी पेड बना कर इन्हें बेचकर 30 हजार रुपये से ज्यादा का लाभ अर्जित कर रहीं हैं. इसके साथ ही वह महिलाओं, किशोरियों को स्वच्छता जागरूकता का महत्वपूर्ण संदेश दे कर उनमें जागृति भी ला रहीं हैं। सखी स्वसहायता समूह, छुरी की 10 महिला सदस्यों ने वर्ष 2017 में अपना समूह गठित करके आपस में पैसे जमा करके बचत करना शुरू किया। वर्ष 2018 में समूह की आय बढ़ाने के लिए उन्हें चक्रीय निधि 15000 रुपये दी गयी. वर्ष 2020 में समूह का व्यवसाय बढ़ाने के लिए सामुदायिक निवेश कोष के तहत 60,000 रुपये की राशि प्रदाय की गई. सेनेटरी पेड निर्माण के प्रशिक्षण उपरांत समूह को 1 लाख रुपये का लोन स्वीकृत किया गया, जिसकी सहायता से समूह की महिलाओं ने सेनेटरी पेड बनाने की मशीन खरीदकर, घर में ही सेनेटरी पेड बनाना शुरू किया. अब समूह प्रति दिन 300 सेनेटरी पेड बना कर, काटकर, पेकिंग करके तैयार कर लेता है. इस प्रकार एक माह में समूह की दीदियों द्वारा 9000 सेनेटरी पैड बना लिये जाते हैं जिसका समुह द्वारा निर्धारित मूल्य अनुसार करीब 33 हजार रुपये के होते हैं. सेनेटरी पेड का ब्रांड नाम स्त्री स्वाभिमान रखा है. इंडिया बनाये गये सेनेटरी पेड को गर्ल्स स्कूल, कन्या छात्रावास, मेडिकल दुकानों में बेचकर लाभ अर्जित किया जा रहा है. समुह की अध्यक्ष रश्मि भार्या ने बताया कि समूह द्वारा बनाये गये सेनेटरी पेड आकर्षक तथा स्त्री सेहत की सुरक्षा हेतु बेहद लाभदायक है. उन्होंने बताया कि 08 पेड का एक पैकेट बनाते हैं जिसकी कीमत मात्र 30 रुपये रखी है, जो कि ग्रामीण महिलाओं के लिए बाजार मूल्य से कम दर पर उपलब्ध हैं. उन्होंने बताया कि एक माह में 30 हजार रुपये से ज्यादा के पैड बना लिये जाते हैं. गर्ल्स स्कूल एनटीपीसी में उन्होंने 600 सेनेटरी पेड की पूर्ति की है।
पीआरपी फूलकुमारी का कहना है कि सेनेटरी पेड के उपयोग एवं जागरूकता हेतु ग्राम संगठन की बैठक, समूह की बैठक, संकुल बैठक, तथा ग्रामीण महिलाओं के संपर्क के दौरान स्वच्छता संदेश देकर इसके उपयोग हेतु प्रेरित किया जा रहा है. बिहान योजना के सहयोग से जहां समुह की महिलाओं को स्वरोजगार से आजीविका का साधन मिला है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं को स्वच्छता जागरूकता अभियान का हिस्सा बन कर समूह की महिलाओ ने खुशी जाहिर की है।
वहीं धमतरी जिले के तमनार ब्लाक के सराईपाली के अन्तर्गत आने वाले जिवरी गोठान महिला समूहों ने अपने प्रयासों से सफलता की मिसाल पेश की है। कृषि विस्तार अधिकारी बताती है कि यह गोठान तैयार होने के पश्चात प्रथम चरण में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा महिलाओं को वर्मी कम्पोस्ट निर्माण के लिए प्रशिक्षित किया गया। इस कार्य के लिए महिलाओं को लगातार उत्साहवर्धन भी किया गया। गोठान जंगल में होने के कारण सूखे कचरे की अधिकता थी, जिससे पश्चात अतिरिक्त सूखे कचरे की व्यवस्था किया गया। टांका भराई पश्चात प्रति टांका 4 किलो केचुआ डाला गया। जिसमें 150-200 केचुआ थे, अगली चुनौती केचुआ का उत्पादन था। जिसके लिए कई प्रयोग किया गया। आज जिवरी गोठान में प्रति टंकी 2-3 लाख केचुआ उपलब्ध है। गौठान में अब तक कुल 402 क्विंटल खाद विक्रय किया जा चुका है। जिसमें से 01 लाख 47 हजार रूपए का मुनाफा महिला समूह को हुआ। इसके अतिरिक्त महिलाओं द्वारा 70 हजार रुपये का केचुआ भी अभी तक विक्रय किया जा चुका है।
महिलाओं ने आय मूलक कार्य भी किया शुरू
महिलाओं द्वारा वर्मी कम्पोस्ट विक्रय से लाभ अर्जित करने के साथ ही अतिरिक्तआय एवं रोजगार के लिए अन्य गतिविधियां भी तैयार की जा रही है। जिसमें मुख्य रूप से मशरूम उत्पादन, कटिंग, बडिंग एवं ग्राफटिंग से उन्नत पौधे तैयार करना शामिल है। इसके अलावा टमाटर प्रोसेसिंग, रेशम के धागे तथा टोकरी बनाना शामिल है।
किसानों को जैविक खाद के उपयोग के लिए भी कर रही प्रोत्साहित
गोठान में मुख्य रूप से वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण किया जाता है। जिसे महिला समूह द्वारा किया जा रहा है, इससे महिलाएं स्वावलंबी बन रही है। आज महिलाएं गोधन न्याय योजना के क्रियान्वयन के साथ ही ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों में सहभागिता निभा रही है। समूह की महिलाएं वर्मी कम्पोस्ट निर्माण के अलावा अपने घरों में भी जैविक सब्जियां उगा रही है। इसके साथ ही अन्य किसानों को वर्मी कम्पोस्ट के फायदे बताकर किसानों को जैविक खाद के उपयोग के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
