बहुचर्चित कोकीन केस में नायजेरियन रॉयडन की जमानत याचिका ख़ारिज.. बचाव पक्ष का आरोप – “उड़ीसा से की गई गिरफ़्तारी.. पुलिस कार्यवाही में पेंच की दलील..”

रायपुर,4 नवंबर 2020। राजधानी के बहुचर्चित कोकीन केस में गिरफ़्तार नाइजीरिया मूल के रॉयडन की जमानत याचिका विशेष न्यायालय ने ख़ारिज कर दी।
नाइजीरिया मूल के रॉयडन को लेकर रायपुर पुलिस का दावा था कि, उसे राजधानी के आश्रम तिराहा के पास 9.240 ग्राम कोकीन के साथ गिरफ़्तार किया गया है। बचाव पक्ष की ओर से पुलिस की पूरी कार्यवाही को प्रश्नांकित करते हुए जमानत माँगी गई।
बचाव पक्ष की ओर से बृजेशनाथ पांडेय पैरवी करते हुए दावा किया कि,रॉयडन को तलचर के हॉटल से तब गिरफ़्तार किया गया जबकि वह फर्म के काम से वहाँ मौजुद था। रायपुर पुलिस नीजि वाहन में उसे लेकर आई और रायपुर में उसकी गिरफ़्तारी दर्शाई गई। तर्क दिया गया कि पुलिस ने NDPS की कार्यवाही में धारा 50 का अनुपालन नही किया है,इस के तहत यह अधिकार है कि राजपत्रित अधिकारी या निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष तलाशी किए जाने का आग्रह किए जाने पर उसे पूरा किया जाए। तर्क यह भी दिया गया कि, कोकीन की जो मात्रा बरामद बताई गई है वह वाणिज्यिक श्रेणी में नही आती,इसलिए NDPS एक्ट की धारा 37 के प्रावधान लागू नही होते।
बचाव पक्ष के इन तर्कों का विशेष लोक अभियोजक विनोद भारत ने विरोध किया, और तर्कों को चुनौती देते हुए पुलिस कार्यवाही को विधिसम्मत बताते हुए जमानत नही दिए जाने का आग्रह किया।
विशेष न्यायाधीश राकेश वर्मा (एनडीपीएस एक्ट )ने जमानत ख़ारिज करते हुए आदेश पर लिखा –“केस डायरी में आये तथ्यों से आवेदक/अभियुक्त के विरुद्ध धारा 22-बी,29 एनडीपीएस एक्ट के प्रथम दृष्टया साक्ष्य मौजूद हैं..जहाँ तक यह तर्क कि,आवेदक/अभियुक्त को तलचर ओड़िसा से रायपुर लाकर अभियुक्त के विरुद्ध झूठा मामला तैयार किया गया है। इस तथ्य का निर्धारण इस लेकर पर नही बल्कि विचारण के उपरांत ही किया जा सकता है,अभियुक्त जिन व्यक्तियों से कोकीन ख़रीदता था,उनके विरुद्ध भी कार्यवाही की जा रही है,इसलिए धारा 22 बी और 29 NDPS एक्ट में अभियुक्त की संलिप्तता प्रथम दृष्टया प्रमाणित होती है”
इसके मायने यह है कि, विशेष न्यायालय ने अभियुक्त को तलचर उड़ीसा से लाकर गिरफ़्तारी रायपुर से दर्शाए जाने के मसले पर स्पष्ट किया है कि, इस तर्क ( आरोप ) पर तब ही कोई निर्णय लिया जा सकता है, जबकि नियमित सुनवाई शुरु हो। अभी जो केस डायरी में तथ्य उपलब्ध हैं वह प्रथम दृष्टया आरोपी को निर्दोष या जमानत का लाभ लेने लायक नही लगते।

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