बज़ट से अनियमित कर्मचारी निराश, बोले- इस बज़ट से अनियमित कर्मचारियो के सपनो को लगा ठेस…. अब एक मात्र विकल्प आंदोलन

रायपुर 3 मार्च 2020। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने कार्यकाल का दूसरा बजट विधानसभा में आज पेश किया। इस बजट को लेकर अनियमित कर्मचारियों ने अपना बयान जारी किया है। छत्तीसगढ़ सँयुक्त प्रगतिशील कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष बजरंग मिश्र ने कहा है कि छ्त्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के द्वारा आज जो बज़ट पेश किया गया वह छत्तीसगढ़ के विकास के लिए रोल मॉडल बनेगा। लेकिन उनके द्वारा अनियमित कर्मचारियो से किये वादे अनुरूप इस बज़ट में प्रावधान नहीं किये जाने से सभी अनियमित कर्मचारियो का भविष्य अंधकारमय प्रतीत हो रहा है। अनियमित कर्मचरियों का शोषण पूर्ववर्ती व वर्तमान सरकार में बैठे अधिकारियों द्वारा लगातार किया जाता रहा है।

वहीँ महासंघ के प्रदेश सचिव राजकुमार कुशवाहा ने कहा है भुपेश सरकार का यह दूसरा बज़ट था जोकि 1 लाख करोड़ से ज्यादा का होने के बावजूद भी इस बज़ट में अनियमित कर्मचारियो के नियमितीकरण किये जाने बज़ट में प्रावधान ना किये जाने से अनियमित कर्मचारियो में रोष व गुस्सा है , शाहिद मंसूरी ने कहा जहाँ सरकार ने इस विशाल बज़ट में अनियमित कर्मचारियो को आशाए थी कि उन्हें नियमित किये जाने हेतु लगभग 5 हज़ार करोड़ का प्रावधान इस बज़ट में किये जा सकते थे।

धर्मेंद्र सिंह राजपूत,कमलेश कुमार सिन्हा व मानसिंह चौहान द्वारा सयुक्त बयान में कहा कि इस बज़ट से अनियमित कर्मचारियो के सपनो को ठेस पहुँची है और वे अपने आप को ठगे से महसूस कर रहे है जबकि मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व में कहा गया था कि अगला वर्ष कर्मचारियो के लिए होगा, अनियमित कर्मचारियो के पास एक मात्र विकल्प आंदोलन ही दिखाई पड़ता है।अनियमित के द्वारा पूर्व में किये आंदोलनों में स्वयं भुपेश बघेल ने आश्वासन दिया था व काँग्रेस के घोषणा पत्र में भी अनियमित कर्मचारियो को नियमित किये जाने व छटनी नहीं किये जाने का वादा किया था मगर आज जमीनी स्तर पर करनी और कथनी में अंतर नज़र आ रहा है।

कर्मचारियों ने कहा कि शिक्षाकर्मियों को 2 साल पूर्ण होने पर नियमित होने का प्रावधान कर दिया गया है परंतु अनियमित कर्मचारी जो वर्षों से कार्यरत हैं उनके लिए बजट में कोई भी प्रावधान नही किया जाना अति निराशाजनक है। अनियमित कर्मचारी जल्द ही छत्तीसगढ़ सँयुक्त प्रगीतिशील कर्मचारी महासंघ के बैनर तले आंदोलन करने लामबंद होंगे।

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