NPG से बोले दिग्विजय सिंह “पचास बरसों का रिश्ता है.. वे जो फ़ैसला लेती थीं उस पर दृढ़ रहती थीं.. उनका जाना मेरी व्यक्तिगत क्षति है..उन जैसे ममतामय व्यक्तित्व की कमी मुझे हमेशा खलेगी”

अंबिकापुर, 12 जनवरी 2020। सरगुजा राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव की यादों को लेकर भावुक दिग्विजय सिंह एक क्षण के लिए भी राजमाता की पार्थिव देह से दूर नहीं हुए। भावनाओं के बेहद आवेग ने उनकी आँखों की कोर को भीगा दिया।

सरगुजा राजपरिवार के लिए दिग्विजय सिंह का नाम “दादाभाई” है। दादाभाई का अर्थ बड़े भैया। सरगुजा पैलेस से राघौगढ़ पैलेस का यह रिश्ता बरसों का है। दिग्विजय सिंह के लिए राजमाता  देवेंद्र कुमारी सिंहदेव उन चुनिंदा शख़्सियत में रही हैं जिनसे दिग्विजय ने सियासत का ककहरा सीखा। दिग्विजय सिंह के लिए मुख्यमंत्री बनने के लिए जरुरी विधायकों के समर्थन में राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव का आशिर्वाद सबसे अहम था। तब अविभाजित सरगुजा के सभी विधायकों ने राजमाता के एक ईशारे पर दिग्विजय को समर्थन दे दिया था।

राजमाता के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने अंबिकापुर पहुंचे दिग्विजय सिंह के लिए यह कठिन क्षण था। एयरपोर्ट पर दिग्विजय सिंह ने NPG से कहा –

“उनका जाना मेरी व्यक्तिगत क्षति है, जिसकी पूर्ति ही संभव नहीं है, वे जब कुछ निर्णय कर लेती थीं तो अंत तक उस पर क़ायम रहती थीं।कई आंदोलनों में उनकी दृढ़ता अविस्मरणीय है, उनके मातृत्व भाव के साथ जो संरक्षण मिलता था.. वह मैं कभी नहीं भूल सकता”

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