धोनी बेचते नजर आएंगे कड़कनाथ मुर्गा!… इस मुर्गे में है ये खास बात, इसमें पाए जाते कई पोषक तत्व

नईदिल्ली 12 नवंबर 2020. खबर है कि धोनी मुर्गी के बच्चे को पालने की तैयारी कर रहे हैं. दरअसल यह दावा मध्यप्रदेश के झाबुआ में एक पोल्ट्री फार्म के मालिक ने किया है.

पोल्ट्री फार्म के मालिक का दावा है कि क्रिकेटर महेंद्र सिंह धौनी ने उन्हें कड़कनाथ प्रजाति के दो हजार चूजों (मुर्गी के बच्चे) का ऑर्डर दिया है. पोल्ट्री फार्म के मालिक ने आगे न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि धौनी ने अपने एक दोस्त जो रांची वेटनरी कॉलेज से हैं, उनसे बात करके पता लगाया और फिर हमसे संपर्क करने का काम किया. धौनी की लगभग दो हजार चूजों की मांग है जिसे हमें 15 दिसंबर तक उनको भेजना है.

मांग में लगातार इजाफा : आपको बता दें कि इस कोरोना काल में कड़कनाथ मुर्गा की मांग में लगातार इजाफा होता दिख रहा है. कोविड-19 के जारी प्रकोप के बीच मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ जिले की पारंपरिक मुर्गा प्रजाति कड़कनाथ की मांग इसके पोषक तत्वों के कारण देश भर में बढ़ रही है. झाबुआ का कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) अपनी हैचरी के जरिये कड़कनाथ की मूल नस्ल के संरक्षण और इसे बढ़ावा देने की दिशा में काम करता है.

चर्बी और कोलेस्ट्रॉल काफी कम : केवीके के प्रमुख डॉ. आईएस तोमर ने पिछले दिनों कहा था कि कोविड-19 के राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान परिवहन के अधिकांश साधन बंद होने के चलते कड़कनाथ के चूजों की आपूर्ति पर स्वाभाविक रूप से असर पड़ा था. लेकिन लॉकडाउन खत्म होने के बाद इनकी मांग बढ़ गयी है. देश भर के मुर्गा पालक अपने निजी वाहनों से कड़कनाथ के चूजे लेने हमारी हैचरी पहुंच रहे हैं. उन्होंने बताया कि केवीके ने कोविड-19 की पृष्ठभूमि में कड़कनाथ चिकन को लेकर हालांकि अलग से कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं किया है. लेकिन यह पहले से स्थापित तथ्य है कि दूसरी प्रजातियों के चिकन के मुकाबले कड़कनाथ के काले रंग के मांस में चर्बी और कोलेस्ट्रॉल काफी कम होता है, जबकि इसमें प्रोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत कहीं ज्यादा होती है.

इसमें पाए जानें वाले पोषक तत्व

इस मुर्गे में विटामिन बी-1, बी-2, बी-6, बी-12, सी, ई, नियासिन, कैल्शियम, फास्फोरस और हीमोग्लोबिन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है.

इससे जुड़ी कुछ रोचक बातें

– इसका खून, हड्डियां और सम्पूर्ण शरीर काला होता है.

– यह दुनिया में केवल मध्यप्रदेश के झाबुआ और अलीराजपुर में पाया जाता है.

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