IAS आलोक शुक्ला की नियुक्ति पर धरमलाल कौशिक ने उठाये सवाल….. तो कांग्रेस प्रवक्ता आरपी बोले…..यह विरोध डॉ आलोक शुक्ला की नियुक्ति का नहीं बेहतर होती स्कूली शिक्षा व्यवस्था का है

रायपुर 1 जून 2020। IAS डॉ आलोक शुक्ला की संविदा नियुक्ति को लेकर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने हैं। आलोक शुक्ला को प्रमुख सचिव पर दी गयी संविदा नियुक्ति पर नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने सवाल उठाये हैं और उसे हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह ने इस मामले में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिश पर निशाना साधा है। आरपी सिंह ने कहा है कि धरमलाल कौशिक का ये विरोध आलोक शुक्ला का नहीं प्रदेश की बेहतर होती शिक्षा व्यवस्था का विरोध है।

30 जून को रिटायरमेंट के बाद आलोक शुक्ला को राज्य सरकार ने रविवार को प्रमुख सचिव बद पर संविदा नियुक्ति दी थी। 3 साल के लिए की गयी इस नियुक्ति के बाद से ही भाजपा ने मोर्चा खोल रखा है। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने  डॉ. आलोक शुक्ला की संविदा नियुक्ति को  अवैध बताया है। नेता प्रतिपक्ष श्री कौशिक ने कहा कि संविदा भर्ती नियम 9/2012 के मुताबिक सेवानिवृत्त अधिकारी के विरुद्ध यदि कोई विभागीय जाँच लम्बित हो या उसके विरुद्ध को ई अभियोजन चल रहा हो तो ऐसी स्थिति में उक्त अधिकारी की पोस्ट रिटायरमेंट संविदा नियुक्ति अवैध है। नियम यह भी कहता है कि जिस पद पर संविदा नियुक्ति करनी हो, वह पद एक साल से रिक्त होना चाहिए। श्री कौशिक ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि डॉ. शुक्ला की नियुक्ति इसलिए भी अवैध है क्योंकि नियमानुसार किसी नियुक्ति वाले पद के लिए जब तक सरकारी अधिकारी आवश्यक अर्हताएँ रखते हैं तब सरकार कोई ऐसा तर्क नहीं दे सकती कि निर्धारित पद के लिए हमारे पास कोई क़ाबिल अधिकारी मौज़ूद नहीं है।

नेता प्रतिपक्ष श्री कौशिक ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा की गई ताज़ा संविदा नियुक्ति उसकी बदनीयती का उदाहरण है। डॉ. शुक्ला नान घोटाले में चार्जशीटेड हैं और उनके ख़िलाफ़ अभियोजन चल रहा है। यहाँ तक कि तत्कालीन मुख्य सचिव ने उनके निलंबन की सिफ़ारिश भी की हुई है। ऐसे सेवानिवृत्त अधिकारी को संविदा नियुक्ति देकर प्रदेश सरकार ने घोटालेबाजों को संरक्षण देकर उपकृत करने की अपनी शर्मनाक मंशा का परिचय दे दिया है। श्री कौशिक ने कहा कि भ्रष्टाचार के एक आरोपी अधिकारी की संविदा नियुक्ति कर और उसे प्रमुख सचिव स्तर की ज़िम्मेदारी सौंपकर प्रदेश सरकार ने अपनी प्रशासनिक समझ और सूझबूझ के दीवाला पिट जाने का परिचय तो दिया ही है, साथ ही भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अपने राजनीतिक पाखंड का पोषण भी किया है। श्री कौशिक ने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को लेकर आला स्तर तक जाएगी, जनता को इस मुद्दे पर जागरूक करेगी और न्यायालय में प्रदेश सरकार के फैसले को चुनौती भी देगी।

वहीं कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह ने बयान जारी करके कहा है कि नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने डॉक्टर आलोक शुक्ला की संविदा नियुक्ति का विरोध नहीं बल्कि बेहतर होती स्कूली शिक्षा का विरोध कर रहे हैं। प्रदेश में 15 वर्षों तक भारतीय जनता पार्टी की सरकार रही और स्वयं धरमलाल कौशिक  बेहद महत्वपूर्ण और जिम्मेदार पदों पर रह चुके हैं। आखिर क्या वजह है कि पूरे प्रदेश में भाजपा की सरकार एक भी अंग्रेजी स्कूल नहीं बना सकी। राज्य में स्कूली शिक्षा व्यवस्था इस कदर लचर रही की प्रदेश की जनता ने धीरे-धीरे सरकारी स्कूलों से मुंह मोड़ना प्रारंभ कर दिया और नतीजा यह हुआ कि राज्य में निजी स्कूलों का जाल फैलता गया और सरकारी स्कूली शिक्षण संस्थाएं लगातार कमजोर होती चली गई।

क्या यह साजिश नहीं थी निजी शिक्षण संस्थाओं को मजबूत करने की और सरकारी शिक्षण संस्थाओं को कमजोर करने की? क्या यह साजिश नहीं थी उन मध्यमवर्गीय गरीब परिवार के बच्चों के खिलाफ जिन्हे महंगी स्कूली शिक्षा सुविधा उपलब्ध नहीं है? क्या यह प्रदेश के भविष्य के साथ साजिश नहीं थी कि बच्चों का अच्छा शैक्षणिक कैरियर ही ना बन सके? आखिर क्यों भारतीय जनता पार्टी यह चाहती थी कि प्रदेश के होनहार बच्चे सिर्फ तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी ही बनकर सिमट जाए?

आज जब प्रदेश में राजनीतिक फिजा बदली है और छत्तीसगढ़ की जनता ने अपने बेहतर भविष्य के लिए कांग्रेस पार्टी की भूपेश बघेल सरकार को चुना है तब नेता प्रतिपक्ष इसमें न जाने किसके इशारे पर अड़ंगे बाजी कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी को यह स्पष्ट करना चाहिए क्या वह राज्य में इस शैक्षणिक सत्र से प्रारंभ हो रहे 40 अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के पक्ष में है या खिलाफ में। भारतीय जनता पार्टी को यह भी स्पष्ट करना चाहिए क्या छत्तीसगढ़ के बच्चों को अंग्रेजी शिक्षा मिलनी चाहिए या नहीं। नेता प्रतिपक्ष का बयान तो यही संदेश देता है कि भारतीय जनता पार्टी राज्य की बेहतर होती शैक्षणिक व्यवस्था के खिलाफ है।

जहां तक बात डॉक्टर शुक्ला के ऊपर लगे आरोपों की है तो नान घोटाला रमन सरकार के भ्रष्टाचार का जीता जागता स्मारक है जो कि छत्तीसगढ़ राज्य के इतिहास के पन्नों में एक रिकॉर्ड के रूप में दर्ज हो चुका है। किसी अधिकारी को उस घोटाले में संलिप्त बताकर आखिरकार नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक  ने अप्रत्यक्ष रूप से ही सही यह स्वीकार तो कर लिया है कि प्रदेश में 36 हजार करोड़ का नान का घोटाला हुआ था। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक और भारतीय जनता पार्टी के किसी भी नेता का किसी अधिकारी के संविदा नियुक्ति पर सवाल उठाना शोभा नहीं देता है। जिस भारतीय जनता पार्टी की पूरी सरकार ही संविदा पर पदस्थ रहे अधिकारी और कर्मचारी चलाते रहे हो। यहां तक कि कुछ अधिकारियों की हैसियत और रुतबा तो तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह से भी ऊंचा हुआ करता था ऐसे अधिकारी अपने आप को सुपर सीएम कहलाना पसंद करते थे। इस सरकार में वैसे हालात तो नहीं है। राज्य में भूपेश बघेल सरकार आने के बाद संविदा नियुक्ति सिर्फ उन अधिकारियों को दी जा रही है जिनकी कर्तव्यनिष्ठा ईमानदारी परिश्रम और योग्यता राज्य के हित में है। कांग्रेस प्रवक्ता आर पी सिंह ने नेता प्रतिपक्ष महोदय को सलाह देते हुए कहा है कि आपका नाम धरमलाल है अर्थात आप धर्मपुत्र हैं। आपके मुंह से हमेशा धर्म न्याय नीति और शास्त्र की बातें शोभा देती है ना कि अधर्म अन्याय और अनीति की! ऐसे हल्के राजनीतिक बयान आपकी गंभीरता को कम करते हैं और रचनात्मक विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाते हैं। आपसे आग्रह है प्रदेश के बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए हम आपस में मिलजुल कर काम करें ताकि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ स्वर्णिम राज्य बन सके।

 

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