NPG स्पेशल-लॉकडाउन के बावजूद छत्तीसगढ़ का अचंभित करने वाला आर्थिक ग्रोथ….कई विकसित राज्यों को पीछे छोड़ा, कृषि संबंधित गतिविधियों में तेजी को आरबीआई ने सराहा

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रायपुर 20 अप्रेल 2020। लॉकडाउन में जब पूरे देश में आर्थिक गतिविधियां ठहर सी गई….ऐसे में छत्तीसगढ़ का आर्थिक ग्रोथ दिल्ली के प्लानिंग कमीशन के योजनाकारों को भी अचंभित कर रहा है। दरअसल, छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने लॉकडाउन में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए कृषि गतिविधियों को जारी रखा। कृषि मंडी खुले रहे तो किसानों को बीज की आपूर्ति भी जारी रही। फल-सब्जियों की खरीदी-बिक्री पर भी लॉकडाउन का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। आरबीआई ने भी अपनी रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ के कृषि संबंधित गतिविधयों में तेजी की सराहना की है।

वैसे भी, छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल किसानों के हितैषी मुख्यमंत्री के रूप में जाने जाते हैं। किसानों को प्रोत्साहन देने के लिए उन्होंने अनेक कार्य किए हैं। लिहाजा, लॉकडाउन में भी उन्होंने कृषि विभाग के अफसरों को निर्देश दिए कि खेती-किसानी गतिविधियां में भी कोई अवरोध नहीं आए। और, यही वजह है कि लॉकडाउन में किसानों को कोई दिक्कत नहीं आई। फल, सब्जियो की खरीदी-बिक्री चलती रही।

जाहिर है, भूपेश सरकार के किसानोंन्मुखी होने का यह सीधा नतीजा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लॉकडाउन के दौरान भी किसानों के लिए पूरजोर व्यवस्था रखी। कोविड 19 से सावधानी के निर्देशों का पूरी कड़ाई से पालन करते हुए मंडियाँ खुली रखी गईं और यह व्यवस्था दी गई कि किसान सौदा पत्रक के आधार पर अपने घर से सीधे कृषि उपज सीधे व्यापारियों को बेच सके। जिसका नतीजा यह हुआ कृषि और उससे जुड़ा व्यवसाय प्रभावित तो हुआ पर उतना नही, जितना कि बाक़ी राज्यों में हुआ।

कृषि विभाग की प्रमुख सचिव मनिंदर कौर द्विवेदी ने एनपीजी को बताया,
“आँकड़ों की अगर आप बात करेंगे तो 22 मार्च से 16 अप्रैल तक 17.84 लाख क्विंटल अधिसूचित कृषि उपज का क्रय विक्रय हुआ है, जबकि 22 मार्च से 16 अप्रैल के बीच लगभग 2.81 लाख क्विंटल फल सब्ज़ियों का क्रय विक्रय हुआ है। सभी संयुक्त संचालकों और मंडी सचिवों को यह निर्देश है कि मंडी प्रांगण में या समीप बैंक/एटीएम में विक्रेताओं के भुगतान हेतु नगद राशि उपलब्ध रहे इसके लिए बैंक अधिकारियों से समन्वय रखें।”

छत्तीसगढ़ सरकार ने लॉकडाउन में कृषि और किसानों के हित में कई फैसले किए। इनमें मंडी चालू रखी गईं, उप मंडी परिसर चालू किए गए, किसानों को सौदा पत्रक के ज़रिए सीधे बेचने की अनुमति दी गई, बीज ग्रेडिंग टेस्टिंग जारी रही। लॉकडाउन में काम लगातार चलता रहा और एक लाख मीट्रिक टन बीज, समितियों तक पहुँच चुका है। इस पूरी क़वायद से छत्तीसगढ़ का कृषि अर्थ तंत्र लॉकडाउन में भी नुक़सान में नहीं रहा। यही वजह है कि आरबीआई की रिपोर्ट में यह उल्लेख हुआ कि खाद्यान्न कृषि और संबंधित गतिविधियों के कार्य में निरंतर तेज़ी वाले चुनिंदा राज्यों में छत्तीसगढ़ शामिल रहा।

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि देश व्यापी लॉक्डाउन के बावजूद छत्तीसगढ़ जेसे राज्य में आर्थिक क्षेत्र में तेज़ी से वृद्धि देखी गयी जो कि देश में सुखद वातावरण बनाता हे। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में कहा हे कि, पिछले तीन हफ्तों में, घरेलू विकास पर कुछ आंकड़े जारी किए गए हैं, लेकिन वे अर्थव्यवस्था की स्थिति का व्यापक मूल्यांकन करने के लिए बहुत निराश करते हे। इन सबके बावजूद छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, ओडिशा, असम, कर्नाटक और जैसे राज्य तालाबंदी के बावजूद बुवाई गतिविधि में अग्रणी हैं। खाद्यान्न और बागवानी के उत्पादन में कृषि और संबद्ध गतिविधियों के सभी कार्य निरन्तर तेज़ी बनी रहने के कारण इन राज्यों में देश के अन्य विकसित राज्यों के मुक़ाबले आर्थिक विकास की दर काफ़ी अच्छी हे।

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने अपनी नियमित रिपोर्ट में यह उल्लेख किया है कि, लॉकडाउन के दौरान भी छत्तीसगढ़ में आर्थिक क्षेत्र में तेज़ी से वृद्धि देखी गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन राज्यों में इस लॉकडाउन में भी खाद्यान्न के उत्पादन और कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियाँ में निरंतरता रही है उनमें छत्तीसगढ़ भी एक है।

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