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CJI vs वकील: "ये मत सोचना कि यहाँ बदतमीजी चलेगी!" एडवोकेट नेदुम्पारा की बात सुन आगबबूला हुए CJI, कोर्ट रूम में छा गया सन्नाटा, जानें पूरा मामला

Supreme Court Hearing Today : देश की सर्वोच्च अदालत में आज सोमवार को उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया जब प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक वरिष्ठ वकील की दलीलों पर नाराजगी जताते हुए उन्हें सीधे तौर पर चेतावनी दे डाली. मामला तब बिगड़ा जब वकील ने अदालत की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए बड़े कॉर्पोरेट घरानों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया. सीजेआई ने इस व्यवहार को बदतमीजी करार देते हुए वकील को अदालत की मर्यादा में रहने की दो टूक नसीहत दी है.

CJI vs वकील: ये मत सोचना कि यहाँ बदतमीजी चलेगी! एडवोकेट नेदुम्पारा की बात सुन आगबबूला हुए CJI, कोर्ट रूम में छा गया सन्नाटा, जानें पूरा मामला
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CJI vs वकील: "ये मत सोचना कि यहाँ बदतमीजी चलेगी!" एडवोकेट नेदुम्पारा की बात सुन आगबबूला हुए CJI, कोर्ट रूम में छा गया सन्नाटा, जानें पूरा मामला

By Uma Verma

Supreme Court Hearing Today : नई दिल्ली : देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में आज सोमवार को उस वक्त माहौल बेहद गर्म हो गया जब एक मामले की सुनवाई के दौरान भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और वरिष्ठ वकील मैथ्यूज नेदुम्पारा के बीच तीखी बहस हो गई. वकील की दलीलों से नाराज सीजेआई ने उन्हें सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए भविष्य में संभलकर रहने की नसीहत दी है.

क्या था पूरा मामला

वाकया आज सोमवार सुबह का है, जब अदालत में नियमित सुनवाई चल रही थी. एडवोकेट मैथ्यूज नेदुम्पारा ने एक दलील पेश करते हुए अदालत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा दिए. उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट में अडानी और अंबानी जैसे बड़े नामों से जुड़े मामलों के लिए तो तुरंत बेंच बन जाती है और सुनवाई भी होती है, लेकिन राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियों पर सुनवाई नहीं हो रही है.

वकील के इस बयान पर सीजेआई सूर्यकांत बुरी तरह बिफर गए. उन्होंने वकील को बीच में टोकते हुए कहा कि वे अदालत की गरिमा का ख्याल रखें. सीजेआई ने सख्त लहजे में कहा, मिस्टर नेदुम्पारा, आप जो कुछ भी मेरी अदालत में पेश कर रहे हैं, उसे लेकर सावधान रहें. आपने मुझे चंडीगढ़ में भी देखा है और दिल्ली में भी... मैं आपको चेतावनी दे रहा हूं कि इस तरह की बदतमीजी दोबारा नहीं होनी चाहिए.

पहले भी दिखा चुके हैं कड़ा रुख

यह पहली बार नहीं है जब सीजेआई सूर्यकांत ने खराब कानूनी व्यवहार पर नाराजगी जताई हो. बीते गुरुवार को भी एक जनहित याचिका के निम्न स्तर को देखकर उन्होंने टिप्पणी की थी कि अगर शीर्ष अदालत के सामने ऐसी याचिकाएं आएंगी, तो भगवान ही कानून को बचाए. इसके अलावा, हाल ही में उन्होंने वकीलों द्वारा आर्टिफिशिलय इंटेलिजेंस की मदद से तैयार की गई याचिकाओं पर भी आपत्ति दर्ज कराई थी.

आज इन अहम मुद्दों पर टिकी हैं नजरें

सुप्रीम कोर्ट में आज का दिन बेहद व्यस्त रहने वाला है. कोर्ट कई संवेदनशील और बड़े मामलों पर सुनवाई कर रहा है.

प्रदूषण : दिल्ली-एनसीआर में जानलेवा स्तर पर पहुंचे वायु प्रदूषण की स्थिति.

सोनम वांगचुक : सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत के खिलाफ दायर याचिका.

मेटा और व्हाट्सएप : सीसीआई द्वारा व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर लगाए गए 213.14 करोड़ रुपये के जुर्माने को चुनौती.

वकील के इस व्यवहार की कानूनी गलियारों में काफी चर्चा हो रही है, वहीं सीजेआई की दो टूक ने यह साफ कर दिया है कि अदालत के भीतर तर्कों का स्तर और व्यवहार मर्यादित होना चाहिए.

कौन हैं न्यायाधीश सूर्यकांत

न्यायमूर्ति सूर्यकांत वर्तमान में भारत के 53वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं. उन्होंने 24 नवंबर 2025 को इस प्रतिष्ठित पद की शपथ ली और वे हरियाणा राज्य से इस पद तक पहुँचने वाले पहले न्यायाधीश बने. 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले के पेटवाड़ गाँव में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे न्यायमूर्ति सूर्यकांत का कानूनी सफर बेहद प्रभावशाली रहा है. उन्होंने 1984 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से कानून की डिग्री प्राप्त की और उसी वर्ष हिसार जिला अदालत से अपनी वकालत शुरू की. वे साल 2000 में हरियाणा के सबसे युवा एडवोकेट जनरल बने और 2004 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए. इसके बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और 2019 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएँ दीं.

न्यायमूर्ति सूर्यकांत को उनके संतुलित दृष्टिकोण और कानून की गहरी समझ के लिए जाना जाता है. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण संवैधानिक और मानवाधिकार मामलों में ऐतिहासिक फैसले दिए हैं. वे उन पीठों का हिस्सा रहे हैं जिन्होंने अनुच्छेद 370 को हटाने की चुनौती, पेगासस स्पाइवेयर मामला और जेल सुधारों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सुनवाई की. CJI के रूप में उनके कार्यकाल का मुख्य लक्ष्य न्यायालय में लंबित मामलों को कम करना और न्याय प्रणाली को आम नागरिक के लिए अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाना है. वे 9 फरवरी 2027 को सेवानिवृत्त होंगे, और तब तक भारतीय न्यायपालिका में उनके सुधारवादी एजेंडे और न्यायिक सक्रियता पर देश भर की नजरें टिकी रहेंगी.

Uma Verma

Uma Verma is a postgraduate media professional holding MA, PGDCA, and MSc IT degrees from PTRSU. She has gained newsroom experience with prominent media organizations including Dabang Duniya Press, Channel India, Jandhara, and Asian News. Currently she is working with NPG News as acontent writer.

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