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कोरोना से महिला मंत्री की मौत : दो हफ्ते पहले मिली थीं शिक्षा मंत्री कोरोना पॉजिटिव….दो बार सांसद और विधायक रही थी…. आज सुबह बिगड़ी थी अचानक से तबीयत, इलाज के दौरान तोड़ा दम

कोरोना से महिला मंत्री की मौत : दो हफ्ते पहले मिली थीं शिक्षा मंत्री कोरोना पॉजिटिव….दो बार सांसद और विधायक रही थी…. आज सुबह बिगड़ी थी अचानक से तबीयत, इलाज के दौरान तोड़ा दम
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By NPG News

लखनऊ 2 अगस्त 2020। उत्तर प्रदेश की कैबिनेट मंत्री कमल वरुण का निधन हो गया है. उनका पूरा नाम कमल रानी वरुण था और वे यूपी विधानसभा की सदस्य थीं. इससे पहले वे सांसद भी रह चुकी हैं. कमल रानी वरुण यूपी सरकार में टेक्निकल एजुकेशन मंत्री थीं. कमल वरुण कोरोना से संक्रमित थीं और लखनऊ के पीजीआई में उनका इलाज चल रहा था.कमल रानी वरुण उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री थीं, कमल रानी की कोरोना से मौत हुई है.

कैबिनेट मंत्री कमल रानी को दो दिन से बुखार आ रहा था। उन्होंने सिविल अस्पताल में ट्रनेट मशीन से जांच कराई, जिसके बाद उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। सिविल अस्पताल के निदेशक डॉ़ डीएस. नेगी ने बताया कि फाइनल जांच के लिए सैंपल केजीएमयू भेजा गया है। जिसमें वह कोरोना पॉजिटिव आयी थीं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने उन्हें पीजीआई में भर्ती कराया था। उन्हें सांस लेने में तकलीफ के चलते आईसीयू में रखा गया था। शनिवार रात को उनकी तबीयत विगड़ गई थी। रविवार सुबह अचानक तबीयत और बिगड़ी जिससे उनकी मौत हो गई।

वे 18 जुलाई को कोरोना से संक्रमित हुई थीं. बाद में इलाज के लिए उन्हें लखनऊ पीजीआई में दाखिल कराया गया था जहां रविवार को उनका निधन हो गया. कमल वरुण का जन्म 3 मई 1958 को हुआ था. पिछले महीने उनका कोरोना टेस्ट कराया गया था जिसमें वे संक्रमित पाई गई थीं. कमल रानी वरुण योगी सरकार में प्राविधिक शिक्षा मंत्री थीं। कमल रानी वरुण की तबीयत खराब होने के बाद उनका सैंपल जांच के लिए सिविल अस्पताल में भेजा गया था। रिपोर्ट आने के बाद उन्हें एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया था।

लखनऊ में हुई थीं पैदा, कानपुर में शादी

ऐसे हुई राजनीतिक करियर की शुरुआत

1989 में वह कानपुर के द्वारिकापुरी वॉर्ड से बीजेपी के टिकट पर पार्षद बनीं। 1995 में वह दूसरी बार पार्षद का चुनाव जीतीं। भाजपा ने 1996 में उन्हें उस घाटमपुर (सुरक्षित) संसदीय सीट से चुनाव मैदान में उतारा। वह 1998 में उसी सीट से दूसरी बार चुनाव जीतीं। हालांकि 1999 के लोकसभा चुनाव में उन्हें सिर्फ 585 मतों से बीएसपी के प्यारेलाल संखवार से चुनाव हार गई थीं। सांसद रहते हुए कमलरानी ने लेबर ऐंड वेलफेयर, उद्योग, महिला सशक्तिकरण, राजभाषा और पर्यटन मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समितियों में भी काम किया।

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