इंटरनेशनल किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा: रात के अंधेरे में निकलती थी किडनियां, जानिए कहां से कहां तक फैला था 3 अस्पतालों का नेटवर्क
Kanpur Kidney Kand: कानपुर में इंटरनेशनल किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा हुआ है। इस मामले में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

फोटो सोर्स- इंटरनेट, एडिट, npg.news
कानपुर 01 अप्रैल 2026, उत्तर प्रदेश के कानपुर में इंटरनेशनल किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा हुआ है। कानपुर पुलिस और क्राइम ब्रांच ने इस मामले में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) कानपुर की उपाध्यक्ष डॉक्टर प्रीति आहुजा, पति डॉ सुरजित आहुजा, दलाल शिवम अग्रवाल समेत तीन अन्य अस्पताल संचालकों को गिरफ्तार किया है, जो कि बड़े शातिराना तरीके से इस रैकेट को अंजाम दे रहे थे।
कैसे सामने आया कानपुर किडनी कांड ?
दरअसल, बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले आयुष ने रावतपुरा थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि दलाल शिवम अग्रवाल ने उसे 10 लाख का लालच देकर अपनी किडनी देने के लिए तैयार किया था। 29 मार्च को आयुष की किडनी मुजफ्फरपुर नगर की पारुल तोमर (30) को लगाई गई, जिसके बदले पारुल से 60 लाख रुपए से ज्यादा की रकम वसूली गई। वहीं 9 लाख 50 हजार मिलने के बाद जब आयुष ने बकाया 50 हजार मांगे, तो उसे धमकाया गया। इसके बाद आयुष ने पुलिस से इसकी शिकायत कर दी।
कब और कौन-कौन हुए गिरफ्तार ?
शिकायत के बाद कानपुर पुलिस और क्राइम ब्रांच ने 30 मार्च की रात मेड लाइफ हॉस्पिटल, आहुजा हॉस्पिटल और प्रिया हॉस्पिटल में एक साथ छापेमारी की। इसके बाद 31 मार्च को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) कानपुर की उपाध्यक्ष डॉक्टर प्रीति आहुजा, पति डॉ सुरजित आहुजा, दलाल शिवम अग्रवाल समेत तीन अन्य अस्पताल संचालकों को गिरफ्तार किया गया।
कैसे चलता था इंटरनेशनल किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट ?
जब पुलिस ने मामले की जांच शुरु कि तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। इंटरनेशनल किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पूरा खेल तीन अस्पतालों से होकर गुजरता था। सबसे पहले केशवपुर के आहुजा हॉस्पिटल में डोनर की किडनी निकाली जाती थी और ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया भी यहीं होती थी। इसके बाद डोनर को रिकवरी के लिए कल्याणपुर के प्रिया हॉस्पिटल में भेजा जाता और किडनी रिसीवर को पनकी मेडिलाइफ हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया जाता था।
और क्या काम हो रहा था ?
इतना ही नहीं काम इतना शातिर तरीके से होता था कि किसी को इसकी भनक भी नहीं लगती थी। किडनी निकालने के लिए सभी ऑपरेशन देर रात किए जाते थे। डोनर और रिसीवर के बीच फर्जी रिश्ते साबित करने के लिए फर्जी आधार कार्ड के साथ ही नोटरी से प्रमाणित प्रमाण पत्र भी तैयार किया जाता था। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग तीनों अस्पताल सील करने के साथ ही उनकी मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया में जुट गई है।
पुलिस कमिश्नर ने क्या कहा ?
पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के मुताबिक, यह गिरोह पिछले दो साल से एक्टिव था और अब तक 50 से ज्यादा अवैध किडनी ट्रांसप्लांट करा चुका है। गिरोह के तार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जुड़े होने के सबूत भी मिले हैं। इसमें दक्षिण अफ्रीका और नेपाल के मरीज भी शामिल है।
