बांदा जेई राम भवन केस: भारत का 'जेफरी एपस्टीन'! 33 मासूमों से दरिंदगी करने वाले बांदा के हैवान पति-पत्नी को फांसी की सजा
Banda JE Ram Bhavan case: सिंचाई विभाग में जूनियर के पद पर तैनात इंजीनियर रामभवन और पत्नी दुर्गावती 10 सालों तक 33 नाबालिग बच्चों से दरिंदगी की. इतना ही नहीं उनका अश्लील वीडियो बनाकर पोर्नसाइट पर बेचा. मामले में कोर्ट ने शुक्रवार को दोनों पति पत्नी को मौत की सजा सुनाई है.

Banda JE Ram Bhavan case
Banda JE Ram Bhavan case: आपने नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और सेक्स-ट्रैफिकिंग करने वाले 'जेफरी एपस्टीन' के बारे में सूना होगा, जिसके फाइल्स के खुलासे ने अमेरिका से लेकर भारत तक को हिला दिया. जेफरी एपस्टीन जैसी वारदात 5 साल पहले उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में हुई. "जेई राम भवन केस" पति पत्नी ने मिलकर 10 सालो तक 33 नाबालिग बच्चों के साथ दरिंदगी की और उनका अश्लील वीडियो विदेशी पोर्न साइट्स पर बेचा. आखिरकार अदालत ने मामले में ऐतिहासिक सजा सुनाया है. कोर्ट ने पति पत्नी को फांसी की सजा सुना दी है.
कोर्ट ने क्यों सुंसाई फांसी की सजा
सिंचाई विभाग में जूनियर के पद पर तैनात इंजीनियर रामभवन और पत्नी दुर्गावती पर यौन शोषण, कुकर्म और उनकी अश्लील वीडियो बनाने - बेचने का आरोप है. दोनों बच्चों को बहला फुसलाकर दरिंदगी करते थे, उनकी वीडियो बनाकर डार्क वेब और विदेशी पोर्न साइट्स पर बेचते थे. यह केस जेई राम भवन केस नाम से जाना जाता है. शुक्रवार को बांदा की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने जेई राम भवन केस में फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कस को "रेयरेस्ट ऑफ द रेयर" करार देते हुए दोनों को फांसी की सजा सुनाई है. साथ ही 10-10 लाख रुपए जुर्माना लगाया है.
बांदा जेई राम भवन केस क्या है?
पूरा मामला मामला साल 2020 का है. घटना चित्रकूट और बांदा से जुड़ी है. आरोपी रामभवन और उसकी दुर्गावती चित्रकूट में रहते थे. रामभवन सिचाई विभाग ने जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनात था. दोनों की शादी साल 2007 में हुई थी. कोई संतान नहीं थी. लेकिन किसे पता था जिसकी संतान नहीं वो ही बच्चों का दुश्मन बन जाएगा.
रामभवन और दुर्गावती बच्चों को कैसे फंसाते थे?
रामभवन और उसकी दुर्गावती दोनों मिलकर इस वारदात को अंजाम देते थे. दुर्गावती पड़ोसियों और करीबियों के मासूम बच्चों को लालच देकर फंसाती थे. कभी चॉकलेट, गिफ्ट तो तभी ऑनलाइन गेम का लालच देकर घर बुलाती थी. फिर रामभवन उनके साथ दरिंदगी करते था. ज्यादातर बच्चे 3 से 16 साल के होते थे. यह घिनौनी करतूत सिर्फ हवस मिटाने तक सीमीत नहीं थी. वे बच्चों के जरिये पैसे भी कमाते थे. बच्चों की अश्लील वीडियो बनाकर डार्क वेब और इंटरनेशनल पोर्न वेबसाइट्स बेचते थे. रामभवन की पहचान इंटरनेशनल चाइल्ड पोर्नोग्राफी नेटवर्क तक थी. पैसों के लालच में ये बच्चों की वीडियो वायरल करने की धमकी देकर परिवार वालों से भी रकम ऐंठते थे.
कैसे हुआ रामभवन और दुर्गावती केस का खुलासा
साल 2020 में मामला सामने आया. रामभवन और पत्नी के में 31 अक्टूबर 2020 खिलाफ केस दर्ज हुआ. पूछताछ के बाद 16 नवंबर 2020 को दोनों की गिरफ्तारी हुई. अप्राकृतिक यौन अपराध, गंभीर यौन शोषण, बच्चों का पोर्नोग्राफी में इस्तेमाल और आपराधिक साजिश धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ. केस इंटरनेशनल पोर्नोग्राफी से जुड़ा था, इसलिए सीबीआई की 10 सदस्यीय टीम को जांच सौपी गयी.
आरोपियों के घर से क्या मिला
जांच के दौरान, आरोपी के घर से 8 लाख कैश, बच्चों के 66 वीडियो और 600 अश्लील तस्वीरें, 8 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, सेक्स टॉयज मिले. पीड़ित बच्चों के बयान लिए गए. 10 फरवरी 2021 को जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल किया. सीबीआई के जांच के अनुसार, मामला सिर्फ बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा नहीं था बल्कि एक बड़ा साइबर क्राइम भी था.
जेई राम भवन केस में कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया
जेई राम भवन केस मामले में कोर्ट शुक्रवार को फैसला सुनाया. पास्को कोर्ट के न्यायाधीश प्रदीप मिश्रा ने मामले की सुनवाई की. उन्होंने तमाम सबूतों के आधार पर दोनों पति- पत्नी को मौत की सजा सुनाई. कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा, "इस मामले में में अपराधी के सुधार की कोई संभावना नहीं है. “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” की श्रेणी में आता है. समाज में कड़ा संदेश देने के लिए मौत की सजा जरुरी है." साथ ही कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार को पीड़ितों के परिवार को 10-10 रूपए मुआवजा देने का आदेश दिया.
आरोपियों ने कितने बच्चों को निशाना बनाया?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़, 2010 से 2020 के बीच 33 छोटे बच्चों को अपना शिकार बनाया. रामभवन और दुर्गावती ने बच्चों से इस कदर हैवानित की, कि बच्चों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा, कई बच्चे निजी अंगों पर चोट आयी, कुछ को आंखों में तिरछापन (स्क्विंट) की समस्या हो गयी. और कुछ तो आज भी ट्रामा से जूझ रहे हैं.
