CG Digital Arrest: 13 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट, खुद को IPS अफसर बताकर विद्युत विभाग के रिटायर्ड अधिकारी से ठग लिए 36.97 लाख...
CG Digital Arrest: छत्तीसगढ़ में इन दिनों डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के अपराध लगातार बढ़ते जा रहे है। ठग आये दिन किसी न किसी को ठगी का शिकार बना रहे। अब एक और मामला डिजिटल अरेस्ट का सामने आया है। साइबर ठगों ने विद्युट विभाग के सेवानिवृत्त परिवेक्षक से 36.97 लाख की ठगी कर ली।

CG Digital Arrest: रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में विद्युत विभाग के सेवानिवृत्त परिवेक्षक को 13 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगों ने 36.97 लाख की ठगी कर ली। आरोपियों ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफतारी की धमकी देकर धोखाधड़ी की। पुलिस में शिकायत के बाद 2 लाख होल्ड कराया गया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है।
जिले में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें अज्ञात साइबर ठगों ने खुद को टेलीकॉम अधिकारी, पुलिस अधिकारी और सीबीआई अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट विद्युत विभाग के सेवानिवृत्त परिवेक्षक को किया। इस दौरान ठगों ने 36,97,117 रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित द्वारा 17 फरवरी को साइबर पुलिस थाना रायगढ़ में लिखित आवेदन देकर घटना की शिकायत दर्ज कराई गई, जिस पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 02/2026 धारा 308(6), 318(4) भारतीय न्याय संहिता एवं 66(D) आईटी एक्ट के तहत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी
पीड़ित ने बताया कि वह जनवरी 2022 में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत परेषण कंपनी से परिवेक्षक (Supervisor) के पद से सेवानिवृत्त हुआ है। 14 जनवरी 2026 को उसके मोबाइल पर एक अज्ञात महिला का कॉल आया, जिसने स्वयं को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) से संबंधित बताते हुए कहा कि उसके पहचान पत्र का उपयोग कर जियो कंपनी का मोबाइल नंबर लेकर गलत गतिविधियां की जा रही है। इसके बाद कॉल को तथाकथित टेलीकॉम अधिकारी व दिल्ली के बारह खंभा रोड पुलिस स्टेशन के फर्जी अधिकारी से कनेक्ट कराया गया, जिसने पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी।
आरोपी ने खुद को IPS अधिकारी नीरज ठाकुर बताया
इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने वीडियो कॉल कर स्वयं को आईपीएस अधिकारी नीरज ठाकुर बताया और पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाते हुए कहा कि उसके खिलाफ गंभीर अपराध दर्ज है और उसे जांच में सहयोग करना होगा। ठगों ने पीड़ित से उसके बैंक खाते, संपत्ति और अन्य वित्तीय जानकारी ली तथा यह कहकर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवाई कि जांच पूरी होने के बाद राशि वापस कर दी जाएगी। ठगों की धमकी और दबाव में आकर पीड़ित ने 30 जनवरी से 11 फरवरी 2026 के बीच कुल 36,97,117 रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराये। बाद में परिजनों को जानकारी होने पर उन्हें ठगी का अहसास हुआ, जिसके बाद साइबर थाना में शिकायत की गई।
पुलिस ने तत्काल रिपोर्ट दर्ज कर 2 लाख रुपये होल्ड कराये। साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक नासिर खान में पीड़ित को बताया कि वे जितनी जल्दी शिकायत लेकर थाने आते या नेशनल साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करते तो उनके रुपए होल्ड कराया जा सकता था।
पीड़ित के रिपोर्ट पर रायगढ़ साइबर थाने द्वारा बैंक खातों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है।
एसएसपी ने आम नागरिकों से की अपील
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने आम नागरिकों को जागरूक करते हुए कहा कि “पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा कभी भी मोबाइल कॉल, वीडियो कॉल या सोशल मीडिया के माध्यम से किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं किया जाता और न ही जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश दिए जाते हैं। इस प्रकार के कॉल पूरी तरह साइबर ठगी का हिस्सा होते हैं। नागरिक ऐसे कॉल से सावधान रहें, किसी भी स्थिति में अपनी बैंकिंग जानकारी साझा न करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराएं।”
