CG कंप्यूटर खरीदी घोटाला, 18 जिलो के स्कूलों के नाम पर सरकार को लगाए 4.72 करोड़ का चूना, तीन आरोपियों के खिलाफ एसीबी-ईओडब्ल्यू ने पेश किया चालान
CG Computer kharidi ghotala: फर्जी ऑथराइजेशन लेटर और महंगे दामों पर माॅनिटर खदीदकर सरकार को करोड़ा का चूना लगाने वाले तीन आरोपियों के खिलाफ ईओडब्ल्यू-एसीबी ने आज रायपुर विशेष कोर्ट में चालान पेश किया।

CG Computer kharidi ghotala: रायपुर। छत्तीसगढ़ में राजीव गांधी शिक्षा मिशन में कॅम्प्यूटर खरीदी में हुए घोटाले मामले में एसीबी-ईओडब्ल्यू की टीम ने रायपुर विशेष कोर्ट में चालान पेश किया। जांच में पता चला कि आरोपी आलोक कुशवाहा, अंजू कुशवाहा और संजीत साहा ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सरकार को 4 करोड़ 72 लाख 88 हजार की आर्थिक क्षति पहुंचाई थी।
जानिए पूरा मामला
दरअसल, राजीव गांधी शिक्षा मिशन में वर्ष 2010-11 और 2011-12 के दौरान कम्प्यूटर उपकरण की खरीदी प्रकरण में करोड़ों का घोटाला किया गया था। मामले में ACB EOW में अपराध क्रमांक 38/16 धारा 420, 467, 468, 471, 120 (बी) भादवि में अपराध पंजीबद्ध किया गया था। साथ ही तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। मामले में आज विशेष न्यायालय (भ्र.नि.अधि.) रायपुर के समक्ष चालान पेश किया गया।
जांच में यह सामने आया कि 2010-11 और 2011-12 के दौरान आलोक कुशवाहा, अंजू कुशवाहा और संजीत साहा ने आपराधिक षड्यंत्र रचकर फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। आरोपियों ने इस तरीके से शासन को 4 करोड़ 72 लाख 88 हजार 462 रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाई।
जाँच में यह भी पाया गया कि राजीव गांधी शिक्षा मिशन रायपुर द्वारा कम्प्यूटर समर्थित योजना के तहत राज्य के तात्कालीन सभी 18 जिलों में शासकीय उच्च प्राथमिक शालाओं को एलएफडी/टीएफटी कम्प्यूटर देना था। दो चरणों में कुल 638 नग एलएफडी/टीएफटी मानिटर्स की शासन के द्वारा मांग की गयी थी।
वर्ष 2010-11 में 246 नग व वर्ष 2011-12 में 392 नग। मिनी इंफोटेक रायपुर संचालक आलोक कुशवाहा के द्वारा वर्ष 2010-11 में 246 नग मानिटर्स की आपूर्ति की गयी व ग्लोबल नेटवर्क सॉल्यूशन रायपुर वर्ष 2011-12 में 392 नग मानिटर्स की आपूर्ति की गयी।
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने एचपी और एग्माटेल कंपनी के फर्जी ऑथराइजेशन लेटर तैयार किए थे। इसके अलावा मॉनिटर की कीमतों में भारी हेरफेर कर शासन को प्रति मॉनिटर 1,26,500 रुपये की दर से आपूर्ति दिखाई गई, जबकि उस समय बाजार में इसकी कीमत मात्र 57,950 रुपये थी। आरोपियों के द्वारा आपस में सांठ-गांठ कर फर्जी दस्तावेज (आथॉराईजेशन पत्र) की सत्यता को जान बूझकर शासकीय संज्ञान से छिपाकर रखा गया था।
जाँच के बाद आलोक कुशवाहा, अंजू कुशवाहा व संजीत साहा के खिलाफ चालान विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम रायपुर के समक्ष पेश किया गया। प्रकरण से संबंधित शासकीय अधिकारियों के खिलाफ संबंधित विभाग को विधिवत विभागीय कार्रवाई के संबंध में अनुशंसा की गई है।
