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प्रकृति की वंदना हमारी संस्कृति है...भारत पर्यावरण में विश्व को मार्गदर्शन करने में सक्षम-कुलपति चक्रवाल

प्रकृति की वंदना हमारी संस्कृति है...भारत पर्यावरण में विश्व को मार्गदर्शन करने में सक्षम-कुलपति चक्रवाल
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By NPG News

बिलासपुर, 23 जनवरी 2022। गुरुघासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर के तत्वाधान में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती संसद के क्षेत्रीय प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें देश के 12 केंद्रीय विश्वविध्यालय के 71 प्रतिभागी सम्मिलित हुए। प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल एवं मुख्य अतिथि के रूप में बिलासपुर संसदीय क्षेत्र के सांसद अरुण कुमार साव सम्मिलित हुए I कार्यक्रम की अध्यक्षता गुरु घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल ने की। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं गुरु घासीदास बाबा की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलनद्वारा किया गया। अध्यक्षीय संबोधन में केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ चक्रवाल ने भारतीय संस्कृति में ही पर्यावरण की संरक्षण के जिक्र होने की बात कही। उन्होंने कहा कि हम उस देश में रहते है जहाँ प्रकृति वंदन सर्वोपरि है। हम पेड़ों एवं प्रकृति की पूजा करते है, नदियों में भगवान को देखते है I भारत में आदि काल से ही अद्भुत क्षमता रही है कि वो पर्यावरण के लिए भी विश्व को मार्गदर्शन प्रदान करे I आज हमारे देश के युवा नदी को जानों, एवं रिन्यूएबल ऊर्जा, ग्रीनहाइड्रोजन इत्यादी पर हमारा देश तेजी से कम कर रहा है I पर्यावरण के संरक्षण के लिए उठाये गये कदमों का ही परिणाम है आज हमारा देश सतत विकास के सत्रह लक्ष्यों को 2024 में ही हासिल कर लेगा जबकि विकशित देश इसके लिए 2030 तक समय मांग रहे है I डॉ चक्रवाल ने इस कार्यक्रम में लिए विश्वविद्यालय को मेजबानी का अवसर के लिए राष्ट्रीय समिति का आभार जताया एवं कहा कि गुरु घासीदास को आज देश के केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में अग्रिम पांति में रखा जा रहा है जो हमरे लिए गौरव का विषय है I इस धरा को स्वच्छ एवं सुन्दर बनाने केलिए युवा वर्ग काआवाहन करते हुए उन्हें अग्रिम पंक्ति में खड़े रह कर पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों को सचालित करने हेतु प्रोत्साहित किया। इस सम्बन्ध में गोपाल आर्या द्वारा चलाई जा रही नदियों को जानो योजना एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यो के बारे में विस्तार से बतारे हुये हर्ष व्यक्त किया I सांसद अरुण साव ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का सीधा सम्बन्ध हमारे जीवन शैली से है हमारी जीवन की पद्धति ही पर्यावरण प्रेमी रही है I परन्तु हम आधुनिकता के दौर में अपने बड़ों की सलाह को दरकिनार करते रहे है फलस्वरूप अब हमें इसी गंभीर विषय मानते हुए चर्चा करनी पद रही है I पर्यावरण को हमे ही असंतुलित किया है अतः इसे ठीक करने की जिम्मेदारी भी हमारी ही है I उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि जैसे प्रधानमंत्री के एक आवाज पर स्वक्षता एक जन आन्दोलन बना वैसे ही पर्यावरण संरक्षण को भी जन जन तक पहुचने की जिम्मेदारी आज के युवाओं पर है I


संघर्षो के साये में असली आजादी पलती है I

ये देश उस और चलता है जिस और जवानी चलती है I

निर्णायक मंडल के सदस्य हिमांशु द्विवेदी प्रधान संपादक हरिभूमि पत्र समूह

ने आज की पीढ़ी से पर्यावरण के विकास को सर्वदा आगे रखने पर जोर दिया। समाज में पर्यावरण की आवश्यकता पर युवा पीढ़ी के द्वारा किये गये विचारो पर उन्होंने सहमति जाहिर करते हुए कहा की हमारा युवा वर्ग कही न कही जागृत होकर पर्यावरण को आगे बढ़ाएंगे। श्री विष्णु, निदेशक अचानकमार अमरकंटक बायोस्फियर रिज़र्व ने भी अपने विचार रखे हुए प्रतिभागियों को बताया कि युवाओं के मौलिक विचार से ही आगामी कार्य्रकम बनाये जा सकते है निर्णायक मंडल के सदस्य कृष्ण कान्त चंद्रा ने कार्यक्रम में प्रतिभागियों को कहा कि कृषि में रसायन का अधिक उपयोग एवं प्लास्टिक के प्रयोग को आज रोकना कठिन है अतः इसके वैकल्पिक उपयोग हेतु युवाओ को विचार करना होगा I पेड़ो के लगाने से लेकर उसके संरक्षण पर अधिक बल दिया जाना चाहिए I युवा संसद के राष्ट्रिय प्रतियोगिता के समन्वयक डॉ के के चंद्रा ने प्रतियोगिता के बारे में जानकारी देते हुए स्वागत भाषण प्रस्तुत किया I डॉ अमित खास्कलम ने नियमों की जानकारी दी। डॉ गरिमा तिवारी ने कार्यक्रम का संचालन किया व डॉ भावना दीक्षित ने धन्यवाद ज्ञापन किया I

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