
दिल्ली। गुरु नानक देव खालसा कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में 6 से 14 सितम्बर तक हिंदी सप्ताह मनाया गया। कॉलेज की हिंदी साहित्य सभा "मंथन" द्वारा इस मौके पर "नई शिक्षा नीति और हिंदी भाषा" विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया| "अंग्रेजी की रेखा को छोटा करके क्या हिंदी का महत्व बढाया जा सकता है?" विषय पर वाद- विवाद प्रतियोगिता व मुहावरों से सम्बंधित "बोलिये जनाब एक मिनट" प्रतियोगिता का आयोजन भी किया| दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. पूरनचंद टंडन मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
इस मौके पर पूरनचंद टंडन ने नई शिक्षा नीति में हिंदी भाषा के महत्व को बताया कि भारत दुनिया भर में सबसे बड़ी शिक्षा प्रणाली वाला देश है। लगभग 16 लाख विद्यालय, 50 से अधिक राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय महत्त्व की संस्थाएँ, आई.आई.टी , एन.आई.टी. तथा अन्य अनेक शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थान भारत की शिक्षा पद्धति और नीति की ओर ध्यान आकृष्ट करते हैं।
कॉलेज के प्राचार्य प्रो. गुरमोहिंदर सिंह ने हिंदी भाषा के महत्व को बताते हुए कहा कि हमें अपनी मातृभाषा में बात करना चाहिए। अन्य भाषाओँ का जहाँ अपना महत्व है वहां हमे हिंदी को कम नहीं आकना चाहिए।
हिंदी विभाग की प्रभारी डॉ. रेनू दुग्गल ने बताया कि हर भाषा का अपना महत्त्व है। हम किसी भी भाषा को छोटी भाषा या बड़ी भाषा नहीं कह सकते हैं। यह जरूर है कि हिंदी भाषा के लिए हमें प्रत्यन करते रहना चाहिए|
