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जान बड़ी या... सीट बेल्ट न लगाने के सौ बहाने, 25 फीसदी लोग कपड़े खराब होने से नहीं लगाते बेल्ट, जानिए सीट बेल्ट का कानून और इतिहास

जान बड़ी या... सीट बेल्ट न लगाने के सौ बहाने, 25 फीसदी लोग कपड़े खराब होने से नहीं लगाते बेल्ट, जानिए सीट बेल्ट का कानून और इतिहास
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By NPG News

दिव्या सिंह

रायपुर I भारत सरकार ने साइरस मिस्त्री की मौत के बाद त्वरित कदम उठाते हुए कार की पिछली सीट पर बैठने वाले यात्रियों के लिए भी सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य कर दिया है।सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने तीन दिन के भीतर इस आदेश को प्रभावभशील करने को कहा है।पिछली सीट पर बैठे यात्री के सीट बेल्ट न लगाए पाए जाने पर जुर्माना तय है। साथ ही दुर्घटना की स्थिति में क्लेम की रकम भी कम मिलने की संभावना है।

साइरस मिस्त्री की मौत की मुख्य वजह दुर्घटना के वक्त सीट बेल्ट न लगाए जाने को ही माना जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कहा है कि अगर पिछली सीट पर बैठे यात्री भी सीट बेल्ट लगाएं तो सड़क दुर्घटना में मरने वालों की संख्या 25 प्रतिशत तक कम हो सकती है। कानून बने होने के बावजूद हमारे देश में सीट बेल्ट को लेकर जागरुकता बेहद कम है। सड़क सुरक्षा की दिशा में काम करने वाले एनजीओ सेवलाइफ के सर्वेक्षण में सामने आया था कि मात्र 7 प्रतिशत लोग ही पिछली सीट पर बेल्ट लगाते है। सीट बेल्ट की उपेक्षा दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की बड़ी वजह है।

क्या है कानून, कब लागू हुआ

सेंटर मोटर वीइकल रूल्‍स की धारा 381 (1) के तहत, गाड़ी चलते वक्‍त फ्रंट सीट्स और पीछे की फ्रंट फेसिंग सीट्स पर बैठे हुए पैसेंजर्स का सीट बेल्‍ट लगाना अनिवार्य है। यह नियम अक्‍टूबर 2002 से लागू हुआ था। CMVR की धारा 125 (1A) के जरिए सभी चार पहिया वाहन निर्माताओं के लिए फ्रंट और रियर सीट्स पर बेल्‍ट देना अनिवार्य किया गया है।

कब बना कार के लिए सीट बेल्ट

सड़क या यातायात सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण फोर व्हीलर वाहनों की सीट बेल्ट 1800 के दशक में अस्तित्व में आया। सबसे पहले एक अंग्रेजी विमानन प्रर्वतक जॉर्ज केली ने इसका आविष्कार किया था। हालांकि उनके निर्माण के पीछे मूल मकसद यह सुनिश्चित करना था कि पायलटों को उनके ग्लाइडर के अंदर रखा जा सके। पायलटों के लिए पहले बनाई गई सीट बेल्ट को सड़क पर आने में काफी समय लगा।

एक लंबे अंतराल के बाद साल 1959 में वोल्वो के कहने पर स्वीडिश इंजीनियर निल्स बोहलिन द्वारा वी-टाइप थ्री-पॉइंट सीट बेल्ट का आविष्कार करने के बाद इसका मौजूदा स्वरूप अस्तित्व में आया। वाल्वो ने ही इसका पेटेंट करवाया। लेकिन सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होने के कारण उन्होंने इसका एकाधिकार नहीं रखा और बाकी वाहन निर्माता कंपनियों के साथ भी जानकारी साझा की। उस समय तक सीट बेल्ट दो-बिंदु वाले लैप बेल्ट थे - जैसा कि अब हम हवाई जहाज में देखते हैं। इस प्राथमिक डिज़ाइन ने स्ट्रैप ड्राइवरों और यात्रियों को एक बकल्स के साथ मदद की जिसे पेट पर बांधा गया था। इसकी तुलना में इनोवेटिव थ्री-पॉइंट सीट बेल्ट सड़क दुर्घटना की स्थिति में ड्राइवरों और यात्रियों को बेहतर सुरक्षा प्रदान करता है। अपने डिजाइन के आधार पर यह सीट बेल्ट शरीर के ऊपरी और निचले दोनों हिस्सों को अधिक मजबूती से सुरक्षित करने में मदद करती है। इसने पिछले कुछ वर्षों में विश्व स्तर पर लाखों लोगों की जान बचाने में मदद की है।

कैसे सुरक्षा देती है सीट बेल्ट

सरल विज्ञान द्वारा सीट बेल्ट से मिलने वाली सुरक्षा से जुड़े तथ्य की पुष्टि की जाती है।100 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से यात्रा करने वाले एक वाहन में पिछली सीट के यात्री का वजन अगर लगभग 80 किलोग्राम हो और जो सीट बेल्ट की मदद से सुरक्षित नहीं है तो सड़क दुर्घटना की स्थिति में 30,864 जूल के भारी बल पर वह चोटिल हो जाता है। इतनी तेज गति उस यात्री और अन्य दोनों सहयात्री को वाहन के भीतर और बाहर गंभीर चोट पहुंचाने में सक्षम है।

तीन मुख्य वजहें जान जाने या गंभीर क्षति

- पहले में वह स्थिति शामिल है जहां उनके शरीर वाहन के इंटीरियर के संपर्क में आते हैं।इससे गंभीर क्षति होती है।

- दूसरा तरीका यह है कि बिना सीट बेल्ट बांधे यात्री साथी यात्रियों से टकराते हैं. इससे सभी पक्षों को शारीरिक क्षति होती है.

- तीसरा तरीका जिसमें बिना सीट बेल्ट बांधे पीछे की सीट के यात्रियों को चोट लगने या मौत होने का खतरा होता है, वह है वाहन की विंडस्क्रीन और खिड़कियों के माध्यम से उनको तेज चोट लगने की स्थिति।

जिस तरह किसी बाइक सवार के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य है। उसी तरह सरकार ने कानून बनाकर सीट बेल्ट लगाना भी अनिवार्य किया है, लेकिन लोग बिना सीट बेल्ट के चल पड़ते है। पिछली सीट पर बेल्ट लगाने के मामले में स्थिति और भी खराब है। 90 फीसदी से ज्यादा लोग पिछली सीट पर बेल्ट नहीं लगाते है।

एक सर्वेक्षण के मुताबिक मात्र 27 प्रतिशत लोग ही सीट बेस्ट से संबंधित कानून के बारे में जानते हैं।

मात्र 7 प्रतिशत लोग ही पिछली सीट पर बैठे होने पर सीट बेल्ट लगाते हैं।

2020 में 15146 लोगों की मौत सीट बेल्ट न लगाने के कारण हुई थी।

7810 लोगों की मौत ड्राइवर सीट पर बेल्ट न लगाने के कारण हुई।

7336 लोगों की मौत पैसेंजर सीट पर बैठने के दौरान बेल्ट न लगाने से हुई।

कानून तो बना, लेकिन न मानने के लिए लोगों ने दिए अजीब तर्क

2017 में मारुति ने एक सर्वे किया था, जिसमें सीट बेल्ट न लगाने को लेकर लोगों ने अजीब कारण गिनाए थे। 17 बड़े शहरों में सर्वे हुआ था।

मात्र 25 प्रतिशत लोग ही थे, जो नियमित तौर पर सीट बेल्ट लगाते थे।

32 प्रतिशत लोगों का मानना है कि चालान नहीं होता इसलिए सीट बेल्ट नहीं लगाते हैं।

27 प्रतिशत लोगों को लगता है कि सीट बेल्ट लगाने से छवि खराब होती है।

25 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इससे कपड़े खराब हो जाते हैं।

23 प्रतिशत लोग मानते ही नहीं कि सीट बेल्ट से कोई सुरक्षा मिलती है।

एयरबैग खुलने के लिए भी बेल्ट लगाा बहुत जरुरी

दुर्घटना की स्थिति में सुरक्षा के लिए गाड़ियों में एयरबैग की व्यवस्था की जाती है। टक्कर होते ही एयरबैग खुल जाते हैं, जिससे कार सवार लोग सामने टकराने से बच जाते हैं। हालांकि महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि कार में बैठे व्यक्ति ने सीट बेल्ट न लगाई हो, तो एयरबैग नहीं खुलता है। सीट बेल्ट को कार में प्राइमरी सेफ्टी फीचर और एयरबैग को सेकेंडरी फीचर माना जाता है। एक्‍सपर्ट्स के अनुसार, सीट बेल्‍ट और एयरबैग एक-दूसरे के पूरक हैं। एयरबैग्‍स इम्‍पैक्‍ट को कुशन करते हैं जबकि बेल्‍ट मूवमेंट को रोकती है। बिना बेल्‍ट के एयरबैग्‍स बेकार हैं।

सीट बेल्‍ट के बिना एयरबैग से गहरी चोट लगने और मौत का ज्‍यादा खतरा रहता है। सीट बेल्‍ट्स ने उन पुरानी कारों में भी जिंदगियां बचाई हैं जिनमें एयरबैग्‍स नहीं हैं ।एयरबैग को लेकर सरकार नए प्रविधान करने जा रही है, जिससे सभी कारों में अधिकतम संभव एयरबैग सुनिश्चित किए जाएंगे।

"जान है तो जहान है" सुनते-सुनते पीढ़ियां बदल गईं पर भारतीय मानसिकता नहीं बदली। साइरस मिस्त्री की मौत ने एक बार फिर चेताया है कि सावधानी में ही सुरक्षा है। वाहन की गति नियंत्रित रखना, सीट बेल्ट लगाना, सुरक्षित दूरी मेंटेन करना, गलत दिशा से और तेजी से ओवरटेक न करना, नशा-मोबाइल से दूरी और अलसुबह की झपकी से सावधान रहना आदि सुरक्षित ड्राइविंग के बुनियादी नियम हैं और सबको पता भी हैं, बस ज़रूरत है इन्हें अपनी आदत में शामिल कर लेने की।

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