कलिंगा विश्वविद्यालय के सीआईएफ के द्वारा एसइएम के माध्यम से हैंड्स ऑन ट्रेनिंग प्रोग्राम के आयोजन का शुभारंभ...

रायपुर 21 दिसम्बर 2021। कलिंगा विश्वविद्यालय मध्य भारत का प्रतिष्ठित उच्च शिक्षा संस्थान है। जिसे राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के द्वारा बी प्लस की मान्यता प्रदान की गयी है। यह छत्तीसगढ़ में एकमात्र निजी विश्वविद्यालय है जो एनआईआरएफ रैंकिंग 2021 में उच्चस्तरीय 151-200 विश्वविद्यालयों में एक है। कलिंगा विश्वविद्यालय के सभी पाठ्यक्रमों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद आदि प्रतिष्ठित संस्थानों से मान्यता प्रदान की गयी है। मूल्य आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुसंधान पर केंद्रित कलिंगा विश्वविद्यालय में नये शोध और नयी खोज को विकसित करने के लिए सर्वसुविधायुक्त सेंट्रल इंस्ट्रुमेंटेशन सुविधा (सीआईएफ) की स्थापना की गयी है। सीआईएफ के द्वारा विश्वविद्यालयीय छात्रों और शिक्षकों के साथ-साथ बाहरी शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान एवं विकास संगठनों के लिए भी उच्च-स्तरीय शोध उपकरणों को उपलब्ध कराकर एक बेहतर शोध वातावरण बनाने के लिए प्रयास किया जाता है।
इसी तारतम्य में कलिंगा विश्वविद्यालय में सीआईएफ विभाग के द्वारा 20 से 21 दिसंबर 2021 तक स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप (एसईएम) के माध्यम से सार्वजनिक व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयोजन के प्रथम चरण में कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.आर.श्रीधर, महानिर्देशक डॉ. बैजू जॉन, कुलसचिव डॉ. संदीप गांधी, छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. आशा अंभईकर, अकादमी मामलों के अधिष्ठाता श्री राहुल मिश्रा एवं सभी संकाय के अधिष्ठाता, समस्त विभागाध्यक्ष, समस्त प्राध्यापक, प्रतिभागी और विद्यार्थियों की उपस्थिति में ज्ञान और विद्या की देवी माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना करने के पश्चात कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
इस अवसर पर कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर. श्रीधर ने उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में अत्याधुनिक अनुसंधान के लिए नवीनतम और सबसे उन्नत विश्लेषणात्मक तकनीकों के साथ एक केंद्रीय सुविधा प्रदान करना है।जो अपने उपयोगकर्ताओं को शोध उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, उन्हें उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाए। जिससे शोधकर्ता अपने सटीक शोध निष्कर्षों को देश-विदेश के प्रतिष्ठित रिसर्च जर्नल में भेजकर प्रकाशित करें और वैश्विक विकास के सहभागी बनें।विश्वविद्यालय के महानिर्देशक और शोध प्रकोष्ठ के अधिष्ठाता डॉ. बैजू जॉन ने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को गुणवत्तापूर्ण संरचना के साथ इस तरह से तैयार किया गया है कि एक प्रशिक्षु प्रयोगशाला अनुसंधान और औद्योगिक आवश्यकताओं को आसानी से पूरा किया जा सके। प्रशिक्षण के बाद, प्रशिक्षु निश्चित रूप से एसईएम के निर्माण, कार्य और संचालन को समझेंगे। प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित शोधार्थियों को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ.संदीप गांधी ने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विश्वविद्यालय के मुल दृष्टिकोण की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। हम मानक स्तर पर बेहतरीन शिक्षा एवं प्रशिक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का पहला दिन उद्घाटन समारोह के बाद पहला वैज्ञानिक सत्र विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता डॉ. वी.पी. कोला के द्वारा लिया गया जबकि दूसरा वैज्ञानिक सत्र का संचालन रसायन विज्ञान की सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रीति पांडे के द्वारा किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले दिन का समापन डॉ. वी.पी. कोला के द्वारा एसईएम के प्रदर्शन के साथ हुआ। व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन की शुरुआत प्रतिभागियों द्वारा नमूना तैयार करके किया गया। इसके बाद प्रतिभागियों ने विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता डॉ. वी.पी. कोला के कुशल मार्गदर्शन और प्रशिक्षण के तहत नमूनों का विश्लेषण किया। नमूना तैयार करने और विश्लेषण के बाद सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. एन. के. धापेकर द्वारा इंजीनियरिंग में एसईएम के आवेदन पर एक तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र के पश्चात फार्मेसी में एसईएम के आवेदन पर फार्मेसी विभाग के प्राचार्य डॉ संदीप तिवारी के द्वारा भी तकनीकी सत्र का संचालन किया गया। इसके बाद सुश्री अंकिता निहलानी ने प्रतिभागियों से फीडबैक लिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन का समापन औपचारिक समापन समारोह के साथ हुआ। समापन समारोह में कुलपति- डॉ आर श्रीधर, महानिर्देशक डॉ. बैजू जॉन, कुलसचिव डॉ संदीप गांधी, छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ आशा अंभईकर, अकादमिक विभाग के अधिष्ठाता श्री राहुल मिश्रा और समस्त अधिष्ठाता और प्रमुखों की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
विदित हो कि यह आयोजन विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों, संकाय सदस्यों, प्रतिभागियों और छात्रों के लिए प्रशिक्षण एसईएम की क्षमताओं और सीमाओं का बुनियादी ज्ञान प्रदान करने में सफल सिद्ध रहा। जिसमें इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी के सैद्धांतिक पहलुओं पर व्याख्यान और उसके बाद व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किया गया। जिसमें शोधकर्ताओं को नियमित रूप से विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी के साथ नमूना तैयार करने, डेटा संग्रह और मात्रा का ठहराव जैसी चुनौतियों से निपटने में मददगार सिद्ध हुआ। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी, इमेजिंग और विश्लेषण में अंतर्निहित तकनीकी की जानकारी को प्रदान किया गया। एसईएम पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन के पश्चात समस्त प्रतिभागियों ने जैव प्रौद्योगिकी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ सुषमा दुबे के नेतृत्व में विश्वविद्यालय परिसर का भ्रमण किया और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। विदित हो कि विश्वविद्यालय का सीआईएफ, जिसमें कई परिष्कृत विश्लेषणात्मक उपकरण है जिसे विश्वविद्यालय के शोध प्रकोष्ठ के अधिष्ठाता डॉ बैजू जॉन के सक्षम नेतृत्व में प्रोफेसरों, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के एक समर्पित और योग्य समूह द्वारा संचालित और रखरखाव किया जाता है।
