
बिलासपुर, 14 अप्रैल 2022। गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय में आज बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की 131वीं जयंती कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता रणवीर सिंह मरहास रहे। मुख्ता वक्ता के रूप में मनोज परांजपे अधिवक्ता, छत्तीसगढ उच्च न्यायालय रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल ने की।
कार्यक्रम के प्रारंभ में एनएसएस कोऑर्डिनेटर दिलीप झा की अगुवाई में गुरु घासीदास जी की प्रतिमा से डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की मूर्ति तक रैली निकालकर समानता, छुआछूत और स्वच्छता विषय पर नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति दी। अतिथियों द्वारा परिसर स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर की भव्य प्रतिमा पर पूजा अर्चना कर पुष्प अर्पित किया गया। इसके बाद प्रशासनिक भवन के सभाकक्ष में आयोजित कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर मां सरस्वती की मूर्ति एवं बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के तैल चित्र पर पुष्प अर्पित किये गये। तंरग बैंड ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। तत्पश्चात नन्हें पौधे से मंचस्थ अतिथियों का स्वागत किया गया। अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. एम.एन. त्रिपाठी ने स्वागत उद्बोधन दिया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्वविद्यालय कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल ने भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 131वीं जयंती पर नमन करते हुए सभी को बाबा साहब के बताये मार्ग पर चलने का आह्वान किया। बाबा साहब सभी के पथ प्रदर्शक होने के साथ ही समाज को संविधान के माध्यम से एक माला में पिरोने के प्रणेता रहे हैं। हम सभी को भीतर झांकने की आवश्यकता है ताकि हम बाबा साहब के सिद्धांतों को स्वयं में पहचान सकें। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हम एक हैं, हम भारत हैं, हम इस धरती की विरासत हैं।
हमारा प्रयास है कि विश्वविद्यालय स्थानीय तथा सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप जुड़ाव स्थापित करे। हम बाबा साहब के सामाजिक भेदभाव से मुक्त भारत देश की कल्पना को साकार करने की ओर अग्रसर हैं। हमें बाबा साहब के लिखे और उनसे जुड़े साहित्य का निरंतर अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर सभी को बधाई प्रेषित की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री रणवीर सिंह मरहास ने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। उन्होंने पूरे जीवन सभी के लिए समान न्याय और समान अवसर की वकालत की। मौलिक अधिकारों की सुरक्षा एवं सुनिश्चितता से लेकर नागरिक स्वतंत्रता के मुखर पक्षधर रहे। फिल्म भी एक माध्यम है जिसके माध्यम से विद्यार्थियों को बाबा साहब के जीवन से जुड़े विभिन्न आयामों को बताया जा सकता है। इस अवसर पर उन्होंने बाबा द्वारा लिखी पुस्तकों और साहित्य के विषय में भी जानकारी साझा की।
मुख्ता वक्ता के रूप में श्री मनोज परांजपे अधिवक्ता, छत्तीसगढ उच्च न्यायालय ने संविधान सभा की कार्यवाही का जिक्र करते हुए बाबा साहब के महत्वपूर्ण योगदान की व्याख्या की। उन्होंने समता, समानता, बन्धुता एवं मानवता आधारित भारतीय संविधान की रचना में अहम भूमिका निभाई। कानूनी फैसलों में बाबा साहब के वचनों एवं आदर्शों का आज स्पष्ट उल्लेख नजर आता है। सामाजिक न्याय के मुखर अग्रणी समाज सुधारक के रूप में सदैव याद रहेंगे।
अतिथियों का शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव प्रो. शैलेन्द्र कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन एवं संचालन डॉ. गरिमा तिवारी ने किया।
