कोरोना वैक्सीन भारत में इस माह तक तैयार हो जाएगी: भारत, अमेरिका समेत दुनियाभर से कोरोना वैक्सीन को लेकर अच्छी खबरें… जानिए क्या है ताजा अपडेट…. 

नईदिल्ली 24 अक्टूबर 2020. दुनियाभर में कोरोना वैक्सीन के निर्माण की रेस तेज हो गई है। रूस, अमेरिका और चीन जैसे देशों के बाद अब भारत में भी एक वैक्सीन के तीसरे फेज के ट्रायल को मंजूरी मिल चुकी है। यह वैक्सीन है भारत बायोटेक की कोवैक्सिन, जिसे इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च का समर्थन हासिल है। अब भारत बायोटेक ने कहा है कि ह्यूमन ट्रायल्स की स्टेज पार करने के बाद कोवैक्सिन जून 2021 तक तैयार हो जाएगी। हालांकि, कंपनी के एक उच्चाधिकारी ने कहा कि अगर सरकार इसके आपात इस्तेमाल की मंजूरी देता है, तो यह पहले भी बाजार में आ सकती है।

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच दुनियाभर के लोगों को इसकी एक सुरक्षित और कारगर वैक्सीन का इंतजार है। रूस और चीन ने तीसरे चरण के ट्रायल से पहले ही अपनी वैक्सीन को मंजूरी दे दी है और आपातकालीन इस्तेमाल के तहत उच्च जोखिम वर्ग के लोगों को टीका लगाया जाने लगा है। वहीं, इंडोनेशया में भी अगले महीने ऐसा किया जाना है। इधर भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी समेत कई देश वैक्सीन पर सफलता से बस एक कदम दूर हैं। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले कुछ ही महीनों में टीकाकरण अभियानों के लिए एक से ज्यादा वैक्सीन उपलब्ध होगी। भारत में देसी वैक्सीन Covaxin के अलावा सीरम इंडिया की Covishield और जायडस कैडिला की Zycov-D वैक्सीन से भी काफी उम्मीदें हैं। 

हैदराबाद आधारित भारत बायोटेक इंटरनेशनल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर साई प्रसाद ने बताया कि कंपनी तीसरे फेज में 12-14 राज्यों में 20 हजार से ज्यादा लोगों पर कोवैक्सिन टेस्ट करने की योजना बना रही है। अगर हमें सभी मंजूरियां समय पर मिल गईं, तो 2021 की दूसरी तिमाही में तीसरे फेज के ट्रायल के नतीजे मिल जाएंगे, जिसमें वैक्सीन की क्षमता का अंदाजा होगा। यानी अप्रैल, मई और जून तक वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल के नतीजों के बारे में पूरी तरह पता चल जाएगा।

देश में कोरोना टीके हैदराबाद आधारित भारत बायोटेक इंटरनेशनल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर साई प्रसाद ने बताया कि कंपनी तीसरे फेज में 12-14 राज्यों में 20 हजार से ज्यादा लोगों पर कोवैक्सिन टेस्ट करने की योजना बना रही है। अगर हमें सभी मंजूरियां समय पर मिल गईं, तो 2021 की दूसरी तिमाही में तीसरे फेज के ट्रायल के नतीजे मिल जाएंगे, जिसमें वैक्सीन की क्षमता का अंदाजा होगा। यानी अप्रैल, मई और जून तक वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल के नतीजों के बारे में पूरी तरह पता चल जाएगा। की रेस में तीन वैक्सीन कैंडिडेट्स आगे चल रहे हैं। आईसीएमआर के सहयोग से भारत बायोटेक द्वारा विकसित की जा रहे देसी टीके Covaxin को तीसरे चरण के ट्रायल की अनुमति मिल चुकी है। प्रोटोकॉल में थोड़े बहुत संशोधन के साथ करीब 26 हजार वॉलेंटियर्स पर अंतिम चरण के ट्रायल अगले महीने होंगे। कंपनी के मुताबिक, Covaxin का आखिरी ट्रायल दिल्ली के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र और असम में किया जा सकता है। आखिरी चरण के ट्रायल के परिणाम फरवरी तक आने की उम्मीद है। इसके बाद कंपनी वैक्सीन के मंजूरी और मार्केटिंग की अनुमति के लिए आवेदन करेगी।

अमेरिकी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन और एस्ट्राजेनेका जल्द ही तीसरे चरण का ट्रायल फिर से शुरू करेगी। दोनों कंपनियों के वैक्सीन कैंडिडेट्स के ट्रायल के दौरान साइड इफेक्ट सामने आने पर ट्रायल रोक दिए गए थे। ब्रिटेन के साथ मिलकर वैक्सीन विकसित करने वाली कंपनी एस्ट्राजेनेका ने सितंबर में तब ट्रायल रोक दिया था, जब एक ब्रिटिश वॉलेंटियर की रीढ़ की हड्डी में साइड इफेक्ट दिखा था। वहीं, जॉनसन एंड जॉनसन ने भी एक वॉलेंटियर में साइड इफेक्ट दिखने के बाद बीते 12 अक्तूबर को ट्रायल रोक दिया था। यूएस स्वास्थ्य एवं जनसेवा विभाग के उप मुख्य अधिकारी(नीति) पॉल मैंगो के मुताबिक, दोनों वैक्सीन का ट्रायल फिर से जारी रहेगा।

अमेरिका की फाइजर इंक कंपनी ने घोषणा की है कि वह नवंबर तक वैक्सीन की मंजूरी के लिए अमेरिकी प्राधिकरण के पास आवेदन कर सकता है। फाइजर जर्मन कंपनी बायोएनटेक के साथ मिलकर वैक्सीन बना रही है। नैदानिक परीक्षणों में शामिल करीब 44 हजार वॉलेंटियर्स पर वैक्सीन के प्रभाव का डाटा नवंबर से पहले उपलब्ध होने की संभावना नहीं है। फाइजर के मुख्य कार्यकारी अल्बर्ट बोर्ला के मुताबिक, नवंबर के तीसरे हफ्ते तक हमारे पास अंतिम आंकड़े होंगे और वैक्सीन सुरक्षित साबित होगी।

रूस की पहली कोरोना वैक्सीन स्पुतनिक-वी(Sputnik-V) के बड़े पैमाने पर आखिरी चरणों के ट्रायल को भारतीय दवा नियामक डीसीजीआई ने यह तर्क देते हुए रोक दिया था कि रूस या अन्य देशों में भी बड़े पैमाने पर इंसानों पर वैक्सीन का ट्रायल नहीं हुआ है। इसके बाद विषय विशेषज्ञ समिति (SEC) ने परीक्षण के साथ आगे बढ़ने की अनुमति देने के लिए नियामक के पास सिफारिश की थी। खबरों के मुताबिक, Sputnik-V वैक्सीन का बड़े पैमाने पर ट्रायल से पहले 100 वॉलेंटियर्स पर ट्रायल होगा। शनिवार को कंपनी ने कहा कि भारतीय दवा नियामक डीसीजीआई से दूसरे और तीसरे चरणों के ट्रायल की अनुमति मिल गई है। 100 लोगों पर ट्रायल के परिणामों को समर्पित करने के बाद बड़े पैमाने पर ट्रायल को हरी झंडी मिल सकती है।

जर्मनी इस साल के अंत से पहले ही टीकाकरण शुरू करने की तैयारी में है। जर्मन मीडिया बिल्ड डेली की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य मंत्रालय ने 60 विशेष टीकाकरण केंद्र बनाने की योजना तैयार की है, जहां वैक्सीन के उचित तापमान पर स्टोरेज की सुविधा हो सके। तैयारी ऐसी कि इन केंद्रों से देश के 16 राज्यों को उनकी जरूरत के अनुसार, वैक्सीन पहुंचाई जा सके। बिल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, इसी सप्ताह एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान स्वास्थ्य मंत्री जेन्स स्पैन ने बायोएनटेक कंपनी की वैक्सीन के सफलता के करीब होने की चर्चा की थी। बता दें कि बायोएनटेक कंपनी फाइजर के साथ वैक्सीन विकसित कर रही है।

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