VIDEO…एम्स ले जाने आये डाक्टरों को देख रोने लगा कोरोना मरीज…..2 मार्च को नागपुर से आया था कोरबा, 22 को किया गया क्वारंटीन….33 दिन बाद भी लक्षण नहीं दिखा….बिना सिम्टम के कोरोना पॉजेटिव ने बढ़ायी प्रशासन की चुनौती

कोरबा 4 अप्रैल 2020। कोरबा में जिस तरह से एक कोरोना पॉजेटिव जमाती मिला है, उसने स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ जिला प्रशासन को भी चिंता में डाल दिया है। दरअसल नाबालिग  के बारे में जानकारी मिली है कि वो 2 मार्च को ही नागपुर से कोरबा आया था और एक मस्जिद में रूका था। कोरोना पॉजेटिव के साथ दो और लोग भी आये थे और उसी मस्जिद में रह रहे थे।

केंद्र सरकार की तरफ से पूर्ण लॉकडाउन की गाइडलाइन जारी होने के बाद से ही बाहर से आये इन लोगों को क्वारंटीन पर रखा गया था। वहीं निजामुद्दीन के तबलीगी जमात के प्रकरण के आने के बाद बाहर से आये सभी जमातियों का कोरोना टेस्ट कराया गया था। कोरबा से कुल 51 लोगों का सैंपल जांच के लिए भेजा गया था, जिसमें इस नाबालिग का टेस्ट पॉजेटिव आया है।

लक्षण नहीं उभरा था नाबालिग में 

कोरबा में जिस नाबालिग की रिपोर्ट पॉजेटिव आयी है, उसमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं उभरे थे। लिहाजा बिना लक्षण के पॉजेटिव रिपोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के भी कान खड़े कर दिये हैं। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से एहितियाती तौर पर कराये गये टेस्ट में ही इस नाबालिग की रिपोर्ट पॉजेटिव आ गयी है। इधर दोपहर करीब सवा 12 बजे से पॉजेटिव पाये गये नाबालिग को रायपुर एम्स के लिए भेज दिया गया है।

कोरोना संक्रमित होने पर उठे सवाल 

युवक महाराष्ट्र का रहने वाला है, लेकिन वो कोरबा में 2 मार्च से रह रहा है, ऐसे में वो कोरबा में कैरियर बनकर आया था या फिर कोरबा में रहकर संक्रमित हुआ, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि अभी तक की पूछताछ में संक्रमित नाबालिग ने इस बात से इनकार किया है कि वो निजामुद्दीन की जमात से लौटा था। उसका कहना है कि वो सीधे महाराष्ट्र से ही आया है, ऐसे में क्या नाबालिग कोरबा में किसी और से संक्रमित हुआ या फिर महाराष्ट्र से ही संक्रमित होकर कोरबा आया था। दोनों ही हालात में ये बड़े खतरे की घंटी है।

डाक्टर पहुंचे लेने तो रोने लगा मरीज 

कोरोना पॉजेटिव मरीज की सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम मस्जिद पहुंची थी।  इसी दौरान एंबुलेंस भी मरीज को एम्स शिफ्ट करने के लिए पहुंची, जैसे ही नाबालिग को इस बात की सूचना दी गयी कि उसे रायपुर में भर्ती कराया जायेगा, वो रोने लगा। नाबालिग बोल रहा था वो पूरी तरह ठीक है, हमको कुछ नहीं हुआ है, उसके बाद भी डाक्टरों ने जब उसे अस्पताल में इलाज के लिए चलने के लिए कहा, तो वो जोर-जोर से रोने लगा।

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