केंद्रीय कर्मचारियों के DA में कटौती पर भड़की कांग्रेस, पूर्व PM मनमोहन सिंह और राहुल गाँधी ने सरकार के इस फैसले पर क्या कहा… जानिए

नईदिल्ली 25 अप्रैल 2020। केंद्र सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता रोकने के लिए राहुल गांधी के बाद अब पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने भी नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना की है। पूर्व पीएम डॉ मनमोहन सिंह ने कहा है कि मौजूदा वक्त में सरकारी कर्मचारियों को आर्थिक रूप से मुश्किल में डालना गैरजरूरी है।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आलोचना करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार को सैनिकों और कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) काटने के बजाय सेंट्रल विस्टा, बुलेट ट्रेन परियोजनाओं और फिजूल खर्च पर रोक लगानी चाहिए थी। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, ‘सरकारी कर्मचारियों के भत्तों में कटौती नहीं की जानी चाहिए। मैं मानता हूं कि ऐसे कठिन समय में भी केंद्रीय कर्मचारियों और सैनिकों पर ऐसा फैसला थोपना जरूरी नहीं है।

वायनाड से कांग्रेस सांसद व पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, ‘मुझे परेशानी वहां दिख रही है कि लाखों करोड़ की बुलेट ट्रेन परियोजना और सेंट्रल विस्टा सौंदर्यीकरण परियोजना को रोकने के बजाय सरकार कोरोना से जूझकर जनता की सेवा करने वाले केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनर्स और देश के जवानों का महंगाई भत्ता (DA) काट रही है. ये सरकार का असंवेदनशील तथा अमानवीय फैसला है. आप मिडिल क्लास से पैसा ले रहे हो लेकिन गरीबों को नहीं दे रहे हो और इसे सेंट्रल विस्टा पर खर्च कर रहे हो।

पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबम ने भी सरकार के इस फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार को केंद्रीय कर्मचारियों का  DA काटने से पहले बुलेट ट्रेन, सेंट्रल विस्टा जैसी परियोजनाएं रोकनी चाहिए थी। कांग्रेस नेता वेणुगोपाल, रणदीप सिंह सुरजेवाला, मनीष तिवारी, सुप्रिया श्रीनाते, गौरव वल्लभ, रोहन गुप्ता और प्रवीण चक्रवर्ती ने भी सरकार के फैसले पर सवाल खड़े किए और तत्काल इसे वापस लेने की मांग की।

इससे पहले कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने इस मामले पर कुछ आंकड़े पेश किए और सरकार के इस फैसले पर कर्मचारियों के जले पर नमक छिड़कने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि केवल एक महीने पहले, 23 मार्च, 2020 को मोदी सरकार ने 30,42,000 करोड़ रुपये का बजट पारित किया। स्वाभाविक तौर से बजट में आय व खर्चे का लेखा-जोखा स्पष्ट तौर से दिया जाता है। फिर बजट पेश करने के 30 दिन के अंदर ही मोदी सरकार सेना के जवानों, सरकारी कर्मचारियों व पेंशनर्स के महंगाई भत्ते पर कैंची चलाकर क्या साबित करना चाहती है? अब एक महीने बाद वित्त मंत्रालय ने अजीबोगरीब फरमान जारी कर दिया है।

बता दें कि केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों और पेंशनधारियों के लिए महंगाई भत्ता बढ़ाने पर रोक लगा दी है। सरकार के इस फैसले का असर 54 लाख सरकारी कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ेगा। सरकार का यह फैसला कोरोना वायरस महामारी के चलते लिया गया है, जिसकी वजह से सरकारी राजस्व बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा जारी एक आधिकारिक ज्ञापन में कहा गया है, ”कोरोना वायरस महामारी के कारण उत्पन्न संकट को देखते हुए केंद्र सरकार के कर्मचारियों तथा पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ते में एक जनवरी 2020 से मिलने वाली किस्त को रोकने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही एक जुलाई 2020 से और एक जनवरी 2021 में दी जाने वाली महंगाई भत्ते की अगली किस्त के भुगतान पर भी रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।

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