माओवाद के कोर बस्तर इलाक़े में पाँच शीर्षस्थ नक्सली नेताओं की मौजूदगी की पुष्ट ख़बर.. पांचो सेंट्रल कमेटी मेंबर..

रायपुर,29 जून 2020। माओवादियों के गढ़ अबूझमाड़ इलाक़े में केंद्रीय स्तर के पाँच शीर्षस्थ नेताओं की मौजुदगी की ख़बर ने बस्तर पुलिस को हाईअलर्ट मोड पर ला खड़ा किया है। माओवादियों की रणनीति से लेकर शीर्षस्थ पदों में बदलाव ये सब कुछ उस वृहद बैठक में होता है, जिसे कांग्रेस कहा जाता है। केंद्रीय ख़ुफ़िया सूत्रों के अनुसार एक लंबा अरसा हो चुका है जबकि माओवादियों की यह कॉंफ़्रेंस नही हो पाई है।इसके पीछे जो वजह बताई जाती है वह है पुलिस और सुरक्षा बलों की तगड़ी घेराबंदी।

हालाँकि माओवादियों ने इस कांग्रेस का कोई विकल्प जरुर तैयार किया है, क्योंकि शीर्षस्थ नेता गणपति की तबियत के कारण अब शीर्षस्थ नेता के रुप में जिसे माओवादियों की कमान मिली है, वह है नंबाला केशव राव उर्फ़ गगन्ना। यह अब तक माओवादी संगठन की ओर से किया गया वो फेरबदल है जिसका अधिकृत ऐलान नही हुआ है। वहीं कई ऐसे पद हैं जो खाली हैं जिन पर क़ाबिज़ नाम बीमारी से मौत के भेंट चढ़ गए या कि फिर उन्होने सुविधाजनक स्थिति पाने वाले राज्य में आत्मसमर्पण कर दिया। पर फ़िलहाल यह लंबे अरसे बाद ऐसा मौका है जबकि एक साथ पाँच शीर्षस्थ माओवादी नेताओं की मौजुदगी बस्तर में माओवादी इलाक़े में होने की सूचना है।

बहरहाल बस्तर पुलिस के पास जो सबसे शानदार चीज़ है वह है पोर्टफ़ोलियो और नक्सलियों को लेकर लगातार मिल रही सूचनाएँ। आज की तारीख में बस्तर पुलिस के पास करीब करीब सभी शीर्षस्थ नेताओं से लेकर पीएलजीए तक की सूचनाएँ और तस्वीरें मौजुद हैं। जबकि कुछ बरस पहले तक पुलिस के पास यदि नाम होते थे तो तस्वीरें नही होती थीं, और तस्वीरें होती थीं तो नाम को लेकर भ्रम बना होता था।

बस्तर पुलिस ने हालिया दिनों शीर्षस्थ माओवादी नेताओं की तस्वीरों नाम समेत एक विस्तृत पॉंपलेट जारी किया है।बस्तर पुलिस ने इसके साथ जो इबारत लिखी है वो ध्यान खींचती है.. उसमें लिखा गया है –
“बस्तर क्षेत्र के विकास विरोधी इन आतंकी चेहरों को पहचानों..इनके आतंक से बस्तर की धरती को  मुक्त कराने में पुलिस को अपना सहयोग प्रदान करें”

इस बात से किसी को इंकार नही है कि बस्तर पुलिस का इंटेलिजेंस और इनपुट बेहद बेहतर हुआ है।बस्तर पुलिस के इंटेलिजेंस को लेकर यह अब कहा जाता है, आप बस्तर तो आ सकते हैं पर भीतर पहुँचते ही आप पुलिस के सूचनातंत्र में दर्ज हो जाते हैं।
कभी पुलिस के तमाम दावों के बावजूद सन् 2010-11 के समय में तब के शीर्षस्थ माओवादी नेता गणपति को लेकर कहा जाता है कि, वह उड़ीसा से रायपुर होते हुए केवल दो लोगों के साथ बड़े आराम से बस्तर चले आया था और तब अबूझमाड़ में नक्सलियों की एक बड़ी मीटिंग हुई थी।

मगर आज ऐसा हो पाना नक्सलियों के लिए दिन का सपना ही है। बस्तर रेंज आईजी पी सुंदरराज ने NPG से कहा

“जनता का विश्वास जीतना हमारी प्राथमिकता थी है और रहेगी.. और हम विश्वास-सुरक्षा-विकास की ओर बढ़ रहे हैं, नतीजतन बस्तर पुलिस के पास पहले से बेहतर ना केवल इनपुट है बल्कि सफलताएँ भी हैं.. ग्रामीण अब बहुत हद तक बगैर डरे हम तक सूचनाएँ देने लगें हैं.. विकास कौन करेगा और कौन उनकी प्रगति का शत्रु है ये वे जानने लगे हैं”

रेंज आईजी पी सुंदरराज ने बस्तर पुलिस की ओर से जारी माओवादियों के पोस्टर दिखाते हुए कहा –
“यह लड़ाई है.. उनसे जो बस्तर के हैं ही नही.. बस्तर का कोई स्थानीय को ये कभी नेतृत्व नही देते.. उपर से नीचे तक की सुची में नाम देखिए.. यह सभी बस्तरिहा को भटका रहे हैं.. और यही हम बस्तर के मूल बाशिंदों को समझा रहे हैं.. ख़ुशी यह है कि बस्तर अब पहले से ज्यादा जागरुक हुआ है.. और बस्तर पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है”

जिन शीर्षस्थ पाँच माओवादियों को लेकर सूचना है कि वे बस्तर के धूर माओवाद इलाक़े में मौजुद है उनमें केंद्रीय समिति सदस्य कट्टरम सुदर्शन,केंद्रीय समिति सदस्य कोसा उर्फ़ सत्यनारायण रेड्डी,सेंट्रल मिलेट्री कमीशन सदस्य देवजी उर्फ़ तिप्परी तिरुपति,सेंट्रल कमेटी मेंबर अक्की राजू उर्फ़ रामकृष्णा, सेंट्रल कमेटी मेंबर चंद्रन्ना उर्फ़ पुल्लरी प्रसाद शामिल हैं। वहीं एक और नाम गणेश उईके उर्फ़ गजदल रवि का भी है।
रेंज आईजी पी सुंदरराज ने NPG से कहा
“हाँ ये सूचना है कि, पाँच बड़े माओवादी लीडर बस्तर के भीतर हैं.. हमारी रणनीति उसे लेकर तैयार ही नही बल्कि क्रियान्वित की स्थिति में है”

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