दावा: नक्सली की तरफ से भी रमन्ना की मौत की पुष्टि की गयी… बीमारी को बताया गया डेढ़ करोड़ के इनामी नक्सली की मौत की वजह… जानिये कौन था रमन्ना…

जगदलपुर 12 दिसंबर 2019। …क्या वाकई में करोड़ों का इनामी नक्सली रमन्ना मर गया ? पुलिस सूत्रों से छन-छनकर आ रही खबरों से रमन्ना के मौत की खबर साफ हो रही थी। इसी बीच बस्तर के एक स्थानीय पत्रकार ने दावा किया है कि नक्सलियों ने भी रमन्ना की मौत की पुष्टि की है। दावा है कि माओवादी प्रवक्ता विकल्प ने फोन कर रमन्ना की मौत की पुष्टि की है। साथ ही ये भी बताया गया है कि रमन्ना की मौत लंबी बीमारी के बाद हुई है।रमन्ना माओवादी पार्टी की सेंट्रल कमेटी का सदस्य होने के अलावा दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सचिव भी था. उसे सेंट्रल कमेंटी का मेंबर 2014 में बनाया गया था.

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रमन्ना मूल रूप से तेलंगाना के सिद्धपीठ जिले का रहने वाला था और लंबे समय से अंडरग्राउंड था. उसकी पत्नी सोडी ईडीमी उर्फ सावित्री भी अंडरग्राउंड माओवादी लीडर है और बस्तर के बस्तर के किस्ताराम एरिया कमेटी की सेक्रेटरी है. उसका बेटा श्रीकांत उर्फ रंजीत भी पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PGLA) के लिए काम करता है. रमन्ना का भाई पराशरामुलु भी पूर्व नक्सलवादी नेता था जो 1994 में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मारा गया था.

दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का हेड होने के नाते बस्तर के जंगलों में नक्सली मूवमेंट की जिम्मेदारी रमन्ना के कंधो पर ही थी. इसके अलावा महाराष्ट्र में पड़ने वाले गढ़चिरौली के जंगलों में भी रमन्ना का सिक्का चलता था.

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झीरम व ताड़मेटला जैसी बड़ी नक्सली वारदातों का मोस्ट वांटेड रमन्ना पर 1 करोड़ 40 लाख रुपये का ईनाम था। जैसा कि दावा है कि नक्सलियों ने रमन्ना की मौत की पुष्टि करते हुए इसे अपने संगठन के लिए बड़ा नुकसान बताया है। पिछले कुछ दशक से बस्तर क्षेत्र में हुई बड़ी घटनाओं का वह मास्टरमाइंड था। इनमें 2010 में ताड़मेटला में 76 जवानों की मौत तथा वर्ष 2013 में दरभा घाटी नक्सली हमला शामिल है। इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मारे गए थे। रमन्ना तेलंगाना के वारंगल जिले का निवासी था। छत्तीसगढ़ में उसपर 40 लाख रुपए का ईनाम है।

उसकी पत्नी सावित्री उर्फ सोढ़ी हिडमे एक स्थानीय आदिवासी महिला है। वह दक्षिण बस्तर में प्रमुख माओवादी नेता है तथा किस्टाराम एरिया कमेटी में सचिव के रूप में काम कर रही है। रमन्ना का बेटा रंजीत अपनी मां के समूह में सदस्य के रूप में सक्रिय है। रमन्ना को क्षेत्र में होने वाले नक्सली घटनाओं का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता था। वह लंबे समय से बस्तर और पड़ोसी राज्यों महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों में नक्सली आंदोलन की अगुवाई कर रहा था।

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