Civil Services day:कोविड वारियर : 30 दिन से नहीं देखा घर.. केवल चार घंटे की नींद.. भूख भूल हर क्षण कोरोना से जूझती महिला IAS

 

पानीपत 21 अप्रैल 2020 आज सिविल सर्विस डे है। डीसी बनने के लिए जितने दृढ़ निश्‍चय और लगन की जरूरत होती है, बनने के बाद उससे कहीं अधिक मेहनत और समर्पण भाव की आवश्यक होती है। लोगों की सेवा में खुद और परिवार को भूल जाना ही सिविल सर्विस है। इसका सटीक उदाहरण पानीपत की डीसी हेमा शर्मा हैं। कोरोना और लॉकडाउन में जिलेभर के लोगों का पेट भरने की जिम्मेदारी उठाने वाली डीसी को मात्र चार-पांच घंटे की नींद के साथ 15 घंटे के अंतराल पर खाना नसीब हो रहा है। बच्चों से मिले पूरा एक महीना बीत चुका है।

लॉकडाउन में डीसी हेमा शर्मा को 24 घंटे उपलब्ध रहना पड़ रहा है। वैसे तो उनके दिन की शुरुआत पांच बजे से होती है, लेकिन 24 घंटे फोन और मैसेज जारी रहते हैं। जिले के साथ अन्य प्रदेश और केंद्र के संपर्क में रहना होता है। वह करीब 8:30 बजे नाश्ता करती हैं। इसके बाद रात को करीब 11 बजे ही खाना मिलता है। दिनभर ऑफिस और बाहर तथा विभिन्न स्थानों का दौरा करती है। सैकड़ों लोग रोजाना मिलते हैं, हजारों फोन कॉल अटेंड करती हैं। रात में सोने के दौरान भी फोन सुनना पड़ता है। ताकि कोई जरूरी कार्य और सूचना मिस न हो।

डीसी हेमा शर्मा के दो बेटे हैं, जो कक्षा सात और आठ में पढ़ते हैं। दोनों बच्चे अपनी बुआ के साथ पंचकूला में रहते हैं। डीसी हेमा शर्मा ने बताया कि 20 मार्च को वह बच्चों से मिली थी। अब बस फोन पर ही बातें होती हैं। बच्चों से मिलने का न समय है और न ही हालात हैं।

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