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उपभोक्ता आयोग का महत्वपूर्ण फैसला: एजेंट धोखाधड़ी करे तो जिम्मेदारी से नहीं बच सकता डाकघर, आयोग ने डाकघर पर ठोंका जुर्माना

अमानत में ख्यानात से जुड़े एक मामले में उपभोक्ता आयोग ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने अपने फैसले में कहा है कि डाकघर से जुड़े अधिकृत अभिकर्ता यदि ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी करता है तो संबंधित डाकघर अपनी जिम्मेदारी के निवर्हन से बच नहीं सकता। धाेखाधड़ी से प्रभावित अपने ग्राहक की भरपाई करना पड़ेगा।

उपभोक्ता आयोग का महत्वपूर्ण फैसला: एजेंट धोखाधड़ी करे तो जिम्मेदारी से नहीं बच सकता डाकघर, आयोग ने डाकघर पर ठोंका जुर्माना
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By Radhakishan Sharma

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर उपभोक्ता आयोग ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि डाकघर का पंजीकृत एजेंट बचत के नाम पर किसी व्यक्ति से धोखाधड़ी करता है और संबंधित प्रतिष्ठान अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। यह उसकी जवाबदेही है कि पीड़ित व्यक्ति को राहत पहुंचाए। इस कड़ी टिप्पणी के साथ उपभोक्ता आयोग ने पीड़ित व्यक्ति को 9 फीसदी ब्याज के साथ मूलधन दो लाख रुपये की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है। आयोग ने अमानत में खयानात को लेकर डाकघर पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोंका है।

जूनाबिलासपुर निवासी राहुल पाठक ने 14 मई 2019 को डाकघर बिलासपुर के अधिकृत एजेंट संजय नारंंग के माध्यम सेकिसान विकास पत्र खरीदा था। नारंग ने शिकायकर्ता को छह किसान विकास पत्र की बिक्री की थी। नारंग ने राहुल पाठक के अलावा कई और लोगों को डाकघर में रुपये निवेश करने का झांसा देकर लाखों रुपए लेकर फरार हो गया।

इस बात की जानकारी राहुल को लगी। तब उसने डाकघर के अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराई और अपने किसान विकास पत्र की वैधता और राशि वापसी के संबंध में पूछताछ की। राहुल की शिकायत पर जब डाकघर के अधिकारियों ने पड़ताल की तब पता चला कि संजय ने राहुल से छह किसान पत्र के रुपये लिए और डाकघर में पांच किसान विकास पत्र का पैसा जमा किया। एक किसान विकास पत्र का पैसा वह खुद ही हड़प लिया। एक किसान विकास पत्र की कीमत दो-दाे लाख रुपये की थी।

छठवे किसान विकास पत्र के दबले फर्जी किसान विकास थमाकर दो लाख रुपये हजम कर गया। राहुल ने जब डाकघर से छठवें किसान विकास पत्र की राशि के भुगतान के संबंध में अफसरों से मांग की तब अफसरों ने इसे एजेंट की जिम्मेदारी बताते हुए राशि लौटाने से इंकार कर दिया। डाकघर के अफसरों से किसी प्रकार की मदद ना मिलने पर उसने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।

मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने डाकघर को नोटिस जारी कर शिकायतकर्ता को किसान विकास पत्र के एवज में दो लाख रुपये की राशि 9 फीसदी ब्याज के साथ भुगतान करने का निर्देश दिया है। आयोग ने शिकायतकर्ता को हुई मानसिक प्रताड़ना के एवज में 10 हजार रुपये व मामले मुकदमे में खर्च की गई राशि पांच हजार रुपये का अलग से भुगतान करने का निर्देश दिया है। आयोग ने इसके लिए डाकघर को 45 दिनों की मोहलत दी है।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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