टेंडर बिड के लिए अनिवार्य बैंक गारंटी की वैधता का पालन करना जरुरी, हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता कंपनी की रिट याचिका को किया खारिज, पढ़िए कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया
Bilaspur High Court News: छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा टेंडर बिड के लिए अनिवार्य बैंक गारंटी की वैधता का पालन करना जरुरी है। अगर आपने ऐसा नहीं किया है तो यह निविदा में दी गई शर्तों का सीधेतौर पर उल्लंघन है। इस टिप्पणी के साथ ठेका कंपनी की रिट याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

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बिलासपुर 26 मार्च 2026, छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा टेंडर बिड के लिए अनिवार्य बैंक गारंटी की वैधता का पालन करना जरुरी है। अगर आपने ऐसा नहीं किया है तो यह निविदा में दी गई शर्तों का सीधेतौर पर उल्लंघन है। इस टिप्पणी के साथ ठेका कंपनी की रिट याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
वेपकॉस लिमिटेड ने याचिकाकर्ता ठेकेदार को एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय EMRS के निर्माण से जुड़ी सरकारी टेंडर प्रक्रिया से अयोग्य ठहरा दिया था, जिसे उसने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता मेसर्स रामशरण सिंह प्रोजेक्ट्स LLP, जो सिविल निर्माण कार्य करता है, ने भारत सरकार के उपक्रम वेपकॉस WAPCOS लिमिटेड, द्वारा जारी एक ई-मेल की वैधता को चुनौती दी थी।
वेपकॉस लिमिटेड ने ई-मेल के ज़रिए कांकेर में EMRS के निर्माण के लिए 'टेंडर आमंत्रित करने की NIT की सूचना के जवाब में मेसर्स रामशरण सिंह द्वारा जमा की गई बिड को, जिसकी अनुमानित लागत GST को छोड़कर 31,52,70,889/- रुपये थी, बिड मूल्यांकन प्रक्रिया में तकनीकी रूप से अयोग्य घोषित कर दिया था। बिड को तकनीकी रूप से अयोग्य घोषित करने के निर्णय को चुनौती देते हुए मेसर्स रामशरण सिंह प्रोजेक्ट व वेपकॉस ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
इसलिए खारिज कर दी थी बिड
याचिकाकर्ता मेसर्स रामशरण सिंह प्रोजेक्ट्स द्वारा बिड सुरक्षा के तौर पर दी गई बैंक गारंटी 18 अक्टूबर 2025 तक ही वैध थी, जबकि NIT ने यह शर्त रखी थी, बिड सुरक्षा अंतिम बिड वैधता अवधि के बाद 45 दिनों तक, यानी 04 जनवरी 2026 तक वैध रहनी चाहिए। डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है, अदालत टेंडरिंग अथॉरिटी के फैसलों पर अपीलीय प्राधिकरण के तौर पर तब तक दखल नहीं दे सकता, जब तक कि वे स्पष्ट रूप से मनमाने या अतार्किक न हों। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने बिड खारिज किए जाने के फैसले को सही ठहराया।
याचिकाकर्ताओं ने स्वीकार किया, वैध अवधि तक बैंक गारंटी देने में रहे असफल
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा, इससे साफ है, विभागीय अधिकारियों द्वारा याचिकाकर्ताओं को अयोग्य ठहराने का फैसला बोलीदाताओं द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों के मूल्यांकन और टेंडर की शर्तों के अनुरूप ही लिया गया। याचिकाकर्ता, जैसा कि उन्होंने खुद स्वीकार किया, ऐसी बैंक गारंटी देने में विफल रहे जो NIT के तहत आवश्यक अवधि तक वैध रहती। बिड सुरक्षा से संबंधित ऐसी शर्त टेंडर प्रक्रिया की एक अनिवार्य आवश्यकता है। इसका पालन न करने पर बिड का अयोग्य घोषित होना निश्चित है।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में ये कहा
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले कहा है, याचिकाकर्ता 04 अगस्त 2025 के टेंडर आमंत्रण नोटिस के जवाब में प्रस्तुत बोलियों बिड्स का मूल्यांकन करते समय विभागीय अधिकारियों द्वारा अपनाई गई निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की मनमानी, दुर्भावना या अवैधता को सिद्ध करने में असफल रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं ने स्वीकारोक्ति रूप से बिड सुरक्षा की वैधता से संबंधित अनिवार्य शर्त का पालन नहीं किया। इसलिए विभागीय अधिकारियों द्वारा याचिकाकर्ताओं की तकनीकी बोली को अयोग्य घोषित करना पूर्णतः न्यायसंगत था। इस टिप्पणी के साथ डिवीजन बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया है।
