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Bilaspur High Court: सुसाइड केस में आया हाई कोर्ट का बड़ा फैसला; प्रेम संबंध टूटना, शादी से इंकार करना, आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं... निचली अदालत के फैसले को रखा बरकरार

Bilaspur High Court: सुसाइड केस में बिलासपुर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।कोर्ट ने कहा, प्रेम संबंध का टूटना और शादी से इंकार करना, आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता। पढ़िए हाई कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा है।

Bilaspur High Court: सुसाइड केस में आया हाई कोर्ट का बड़ा फैसला; प्रेम संबंध टूटना, शादी से इंकार करना, आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं... निचली अदालत के फैसले को रखा बरकरार
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इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

By Radhakishan Sharma

बिलासपुर 05 मार्च 2026, सुसाइड केस में बिलासपुर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।कोर्ट ने कहा, प्रेम संबंध का टूटना और शादी से इंकार करना, आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता। इस टिप्पणी के साथ जस्टिस संजय एस अग्रवाल के सिंगल बेंच ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी है।

निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर राज्य शासन की अपील पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस संजय एस अग्रवाल ने कहा कि केवल प्रेम संबंध टूट जाना या शादी से इंकार कर देना, किसी व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने (दुष्प्रेरण) का सबूत नहीं माना जा सकता।।उन्होंने साफ कहा, जब तक सरकारी पक्ष यह साबित न कर दे कि आरोपी की भूमिका आत्महत्या के मामले में सीधी और सक्रिय थी, तब तक उस पर दुष्प्रेरण का आरोप नहीं लगाया जा सकता। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया। निचली अडाक्ट द्वारा आरोपी को दोषमुक्त करने के फैसले को हाई कोर्ट ने बरकरार रखा है।

क्या है पूरा मामला ?

छत्तीसगढ़ बिलासपुर जिले के चकरभाठा थाना क्षेत्र निवासी सुनील कुमार साहू और 21 वर्षीय युवती के बीच प्रेम सम्बन्ध था। वर्ष 2016 में दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन सुनील के माता-पिता इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं थे। इसी दौरान साल 2016 में ही युवती ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आरोप लगाया गया कि घटना से 3-4 दिन पहले दोनों के बीच विवाद हुआ था। बताया गया कि युवक ने शादी से इनकार किया, जिससे आहत होकर युवती ने यह कदम उठाया।

पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। तकरीबन डेढ़ महीने बाद सुनील के खिलाफ धारा 306 आईपीसी के तहत केस दर्ज कर, उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

ट्रायल में आरोप नहीं हुआ साबित

पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश किया, उसमें युवती के पास से सुसाइड नोट मिलने का जिक्र था। हालांकि उस सुसाइड नोट में सुनील पर किसी तरह का कोई आरोप नहीं था। सरकारी वकील ने युवती की बहन, पिता और मां को गवाह बनाया।

पुलिस की कहानी और बयान अलग-अलग

बहन ने प्रेम संबंध और शादी की बात स्वीकार की, लेकिन शादी से इनकार की बात उसने सीधे आरोपी से नहीं सुनी थी। दूसरी बहन ने भी विवाह की बात बताई, लेकिन आत्महत्या के कारण को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दे सकी। पिता ने कहा कि वे शादी के लिए तैयार थे, लेकिन युवक के पिता राजी नहीं थे। मां ने भी इनकार की बात सुनी होने की बात कही, पर स्वीकार किया कि उनके सामने ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट में आरोपी के खिलाफ पुलिस ठोस सबूत प्रस्तुत नहीं जर स्की।

सत्र न्यायालय ने किया दोषमुक्त, राज्य सरकार ने दायर की अपील

मामले की सुनवाई चतुर्थ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के कोर्ट में हुई। कोर्ट ने आरोप सिद्ध नहीं होने पर आरोपी को दोषमुक्त कर दिया। इस फैसले के खिलाफ राज्य शासन ने धारा 378 के तहत हाई कोर्ट में अपील पेश की थी।

हाई कोर्ट ने फैसले में ये कहा

याचिका की सुनवाई जस्टिस संजय एस. अग्रवाल के सिंगल बेंच में हुई। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है सरकारी वकील यह साबित नहीं कर सका कि आरोपी ने मृतका को आत्महत्या के लिए उकसाया या प्रेरित किया था। मृतका के पत्र में भी आरोपी पर कोई आरोप नहीं लगाया गया था।

सजा के लिए ठोस प्रमाण पेश करना होगा

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने कहा, धारा 306 आईपीसी के तहत सजा देने के लिए यह जरूरी है कि आरोपी ने आत्महत्या के लिए उकसाने या दुष्प्रेरित करने में प्रत्यक्ष भूमिका निभाई हो, इसका ठोस प्रमाण हो।

इसलिए नहीं ठहरा सकते दोषी

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, केवल प्रेम संबंध टूट जाना या विवाह से इंकार कर देना, आत्महत्या के लिए उकसाने का सबूत नहीं माना जा सकता। जब तक अभियोजन यह साबित न कर दे, आरोपी की भूमिका सीधे तौर पर सक्रिय रही, तब तक उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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