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शराब घोटाला: पूर्व आबकारी कमिश्नर को हाई कोर्ट से झटका, हाई कोर्ट ने कहा- निरंजन दास की मनी लांड्रिंग केस में भूमिका खास...

Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ में दो हजार करोड़ से अधिक के शराब घोटाले के आरोपी पूर्व आबकारी कमिश्नर निरंजन दास को हाई कोर्ट से झटका मिला है। हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने तल्ख टिप्प्णी करते हुए कहा है, पूर्व आबकारी कमिश्नर ने सरकारी खजाने में हेराफेरी किया है। मनी लांड्रिंग केस में उनकी भूमिका खास है। लिहाजा जमानत नहीं दी जा सकती।

शराब घोटाला: पूर्व आबकारी कमिश्नर को हाई कोर्ट से झटका, हाई कोर्ट ने कहा- निरंजन दास की मनी लांड्रिंग केस में भूमिका खास...
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इमेज सोर्स- NPG News

By Radhakishan Sharma

बिलासपुर। 11 मार्च 2026|छत्तीसगढ़ में दो हजार करोड़ से अधिक के शराब घोटाले के आरोपी पूर्व आबकारी कमिश्नर निरंजन दास को हाई कोर्ट से झटका मिला है। हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने तल्ख टिप्प्णी करते हुए कहा है, पूर्व आबकारी कमिश्नर ने सरकारी खजाने में हेराफेरी किया है। मनी लांड्रिंग केस में उनकी भूमिका खास है। लिहाजा जमानत नहीं दी जा सकती।मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच ने कहा कि, आर्थिक अपराध में आरोपी की मुख्य भूमिका है।

हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने राज्य के सरकारीर खजाने को सुरक्षित रखने के अपने कर्तव्य के विपरीत जाकर सार्वजनिक धन की हेराफेरी की है। शराब घोटाले में ईडी ने पूर्व आबकारी आयुक्त और छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड के पूर्व एमडी निरंजन दास को 19 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया था।

उनके खिलाफ यह कार्रवाई ACB की तरफ से दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है। एफआईआर के अनुसार पूर्व आबकारी कमिश्नर निरंजन दास पर शराब नीति में हेरफेर कर अवैध रूप से कमीशन वसूलने का आरोप है। एसीबी ने दास को इस शराब घोटाले के किंगपिन में से एक माना है।

निरंजन दास ने दायर की थी दो अलग-अलग याचिका

निरंजन दास ने हाई कोर्ट में अलग-अलग दो याचिका दायर की थी। जिसमें एक जमानत अर्जी, दूसरी याचिका में आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और PMLA एक्ट के तहत गिरफ्तारी को चुनौती दी थी।

हाई कोर्ट ने कहा, दो महीने को लंबी कैद नहीं माना जा सकता

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, हाई कोर्ट ने कहा कि, आरोपी उस समय आबकारी विभाग के सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर थे। यह मामला एक सुनियोजित और व्यवस्थित आर्थिक अपराध है, जिसने राज्य के वित्तीय ढांचे को नुकसान पहुंचाया।याचिकाकर्ता दास के वकील ने तर्क दिया था कि, 50 से अधिक अन्य आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया है, इसलिए उन्हें भी जमानत मिलनी चाहिए। हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा, आरोपी की हिरासत की अवधि लगभग दो महीने को लंबी कैद नहीं माना जा सकता है।

18 करोड़ की अवैध कमाई के आरोप

सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि ईडी की की जांच के बाद इस घोटाले के माध्यम से लगभग 18 करोड़ रुपए की अवैध कमाई की गई। आरोप है कि निरंजन दास के पास से 8.83 करोड़ रुपए की संपत्ति पहले ही कुर्क की जा चुकी है। शासन की दलीलों के सुनने के बाद हाईकोर्ट ने दोनों याचिकाएं खारिज कर दी है।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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