RTE पर हाई कोर्ट सख्त: नाराज हाई कोर्ट बोला- अधूरी जानकारी नहीं चलेगी, एडमिशन की पूरी सूची पेश करना होगा, निजी स्कूलों पर गंभीर आरोप....

Bilaspur High Court
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फोटो सोर्स- NPG News

Bilaspur High Court: चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच के समक्ष संयुक्त सचिव स्कूल शिक्षा ने 25 हजार बच्चों का RTE के तहत स्कूलों में दाखिला दिए जाने की जानकारी दी। इस बात पर चीफ जस्टिस ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा,

बिलासपुर।10 अप्रैल 2026| छत्तीसगढ़ में नया शैक्षणिक सत्र एक अप्रैल से शुरू हो गया है, लेकिन RTE शिक्षा के अधिकार के तहत प्रवेश प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। इससे गरीब और जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच के समक्ष संयुक्त सचिव स्कूल शिक्षा ने 25 हजार बच्चों का RTE के तहत स्कूलों में दाखिला दिए जाने की जानकारी दी। इस बात पर चीफ जस्टिस ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, जो डेटा दे रहे हैं, उससे काम नहीं चलेगा। स्कूलों में रिक्त सीटों पर किन-किन बच्चों को और किस-किस स्कूल में प्रवेश दिया गया है, उसकी पूरी सूची कोर्ट में पेश करना होगा। कोर्ट ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा कि, जब सत्र शुरू हो चुका है, तो बच्चों का दाखिला अब तक क्यों नहीं हो सका। जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच ने 20 अप्रैल की तिथि तय कर दी है।

पढ़िए सरकार की ओर से पेश शपथ पत्र में क्या है?

डिवीजन बेंच में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्र के अनुसार, छत्तीसगढ़ के 6,861 स्कूलों में कुल 38,439 आवेदन प्राप्त हुए। RTE के तहत कुल 21,698 सीटें उपलब्ध हैं। वर्तमान में 2,045 आवेदन लंबित हैं, 7,066 खारिज हुए हैं और 25,550 स्वीकृत हुए हैं। कई जिलों में तो जांच की रफ्तार बेहद धीमी है और 10 प्रतिशत से भी कम आवेदन ही सत्यापित किए जा सके हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सरकार ने पहले 80,000 सीटों की बात कही थी लेकिन कोर्ट में माना गया कि 21,698 सीट ही भरी गई यानी हजारों सीटें खाली हैं, जबकि गरीब बच्चे प्रवेश के लिए भटक रहे हैं।

नाराज चीफ जस्टिस ने कहा, अधूरी जानकारी से काम नहीं चलेगा, पूरी सूची पेश करनी होगी

राज्य सरकार द्वारा शपथ पत्र के साथ पेश किए गए आधी अधूरी जानकारी को लेकर चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस ने दोटूक कहा, अधूरी जानकारी स्वीकार नहीं होगी, पूरी लिस्ट पेश करें। सरकार की ओर से दाखिल शपथपत्र में बताया है, विभाग ने देखा कि स्कूल सीटों की सही संख्या नहीं देते हैं, राज्य ने मनमाने ढंग से सीटें कम नहीं की हैं, बल्कि गणना अब कक्षा 1 से शुरू होकर 6-14 वर्ष के बच्चों तक सीमित है। पिछले सत्रों में संख्या अधिक होने का एक कारण यह भी था, उनमें प्री-स्कूल श्रेणी की सीटें शामिल थीं । राज्य RTE अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है।

स्कूल छात्रा ने एक प्राइवेट स्कूल पर लगाई गंभीर आरोप

हस्तक्षेप याचिका में स्कूली छात्रा ने सेंट जेवियर्स स्कूल के बारे में यह शिकायत की है, यहां जो भी आरटीई में एडमिशन लेने आता है, उसे सरकारी स्कूल जाने का सुझाव दिया जाता है। संयुक्त सचिव ने दाखिल व्यक्तिगत शपथ पत्र में प्राइवेट स्कूल की मनमानी और शिकायतों के संबंध में बताया है, डीईओ दुर्ग की रिपोर्ट में श्री शंकरा विद्यालय भिलाई के खिलाफ शिकायत के संबंध में,स्कूल भवन और सुविधाओं के साथ क्रियाशील पाया है। जिला शिक्षा अधिकारी, दुर्ग के पास लंबित शिकायतों के संबंध में कुल 118 शिकायतों में से 77 का निराकरण कर दिया गया है।

1 अप्रैल 2026 से नारायणा को मिली है सीबीएसई से सम्बद्धता

पेश शपथ पत्र में जानकारी दी है, नारायणा स्कूल बिलासपुर की डीईओ की समिति की जांच की है, स्कूल नर्सरी से कक्षा VIII तक के लिए मान्यता प्राप्त है। पांचवीं और आठवीं बोर्ड स्थानीय बोर्ड परीक्षाओं के लिए माता-पिता से उचित सहमति ली गई थी। 1 अप्रैल 2026 शाला को सीबीएसई से सम्बद्धता मिली हुई है। शिकायतों के संबंध में जॉइंट डायरेक्टर द्वारा गठित कमेटी की रिपोर्ट लंबित है। याचिकाकर्ता की ओर से देवर्षि ठाकुर, राहुल अंबस्ट, राज्य की ओर से प्रसून कुमार भादुड़ी (उप महाधिवक्ता), भारत संघ की ओर से अन्नपूर्णा तिवारी ने पैरवी की, अन्य प्रतिवादियों के वकीलों मामले में बहस की। कोर्ट ने सरकार को समय देते हुए अगली सुनवाई 20 अप्रैल तय की है।

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