RI Exam Scam: प्रमोशन घोटाले में NPG.NEWS को धमकाने मानहानि की नोटिसों की लगी झड़ी, ACB ने 3000 पेज के चालान में NPG की विश्वसनीयता पर मुहर लगा दी
RI Exam Scam: पटवारी से आरआई परीक्षा घोटाले में एसीबी ने आज कोर्ट में 3000 पेज का चालान जमा कर दिया। एसीबी ने जांच में बताया है कि करीब 100 अभ्यर्थियों को होटलों में प्रश्न पत्र पहुंचाए गए। पेपर लीक करने में बड़े स्तर पर पैसे की लेनदेन हुई। बता दें, आरआई परीक्षा घोटाले को सबसे पहले एनपीजी न्यूज ने लगातार इसे उठाया था। इसको लेकर एनपीजी न्यूज को दर्जन भर से अधिक मानहानि की नोटिसें और धमकाने वाले ई-मेल कराए गए। ताकि, खबर प्रकाशित करना बंद कर दें। एनपीजी की खबर पर मुख्यमंत्री ने इस घोटाले की जांच एसीबी को सौंपी थी।

ACB ने NPG की खबरों पर लगाई मुहर
RI Exam Scam: रायपुर। एसीबी ने 3000 पेज के चालान में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। एक तरह से कहें तो छत्तीसगढ़ की एसीबी ने एनपीजी न्यूज की खबर पर मुहर लगा दी है। एनपीजी ने पटवारी से आरआई प्रमोशन परीक्षा घोटाले को पर्दाफाश करते हुए लगातार 14 खबरें छापी थीं। एनपीजी ने बताया था कि राजस्व अधिकारियों ने किस तरह एक ही परिवार और नाते-रिश्तेदारों पर कृपा बरतते हुए कैसे पेपर मुहैया करवा आरआई बनवा दिया।
लगातार किए जा रहे खुलासों को लेकर एनपीजी न्यूज पर प्रेशर बनाने दर्जन भर से अधिक मानहानि की नोटिसें भेजी गईं। ई-मेल कर सूचना और प्रसारण मंत्रालय में शिकायत कर वेबसाइट को ब्लैकलिस्टेड कराने की धमकियां दी गई। मगर एनपीजी न्यूज अपना दायित्व निभाता रहा।
पटवारी से आरआई बनाने परीक्षा घोटाले की लीपापोती करने राजस्व विभाग के सारे प्रयास विफल हो गए। जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए विष्णुदेव सरकार ने इस मामले को ईओडब्लू के हवाले कर दिया।
बहरहाल, सरकार के ईओडब्लू से जांच का ऐलान से पहले राजस्व विभाग द्वारा इस स्कैम की लीपापोती की जबर्दस्त कोशिशें की गई। राजस्व विभाग ने सात महीने लेटरबाजी में लगा दिया। आईएएस कुंजाम कमेटी की रिपोर्ट के बाद और बारीक जांच के लिए बिना मतलब का गृह विभाग को एसीएस को पत्र लिख दिया। प्रयास था कि किसी तरह लेटर-लेटर और जांच-जांच के नाम पर केस को लिंगारान कर दिया जाए।
आलम यह था कि आईएएस केडी कुंजाम के नेतृत्व वाली पांच सदस्यीय जांच कमेटी पर इतना अधिक प्रेशर था कि उन्हें गोलमोल जांच रिपोर्ट दे दी। कुंजाम कमेटी ने पांच मामलों में परीक्षा सिस्टम को क्लीन चिट दिया तो चार बिंदुओं पर विशेषज्ञों से जांच कराने की अनुशंसा कर और उलझा दिया। बताते हैं, कुंजाम की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय कमेटी के कुछ लोग इस पक्ष में नहीं थे कि जानते समझते हुए मक्खी निगली जाए। सो, कुंजाम कमेटी ने बीच का रास्ता निकालते हुए मिलीजुली रिपोर्ट दे दी।
इसके बाद कुंजाम कमेटी की रिपोर्ट को भी दबाने की कोशिश की गई। राजस्व विभाग के जनसूचना अधिकारी ने सूचना के अधिकार में बेहद ढिठाई के साथ लिखकर दे दिया कि जांच अभी प्रकियाधीन है, इसलिए जानकारी नहीं दी जा सकती। जबकि, उसके दो महीने पहले कुंजाम कमेटी ने राजस्व विभाग को जांच रिपोर्ट सौंप दी थी।
एनपीजी ने जब कुंजाम जांच कमेटी की नौ पेज की जांच रिपोर्ट प्रकाशित कर जनसूचना अधिकारी की झूठ का पर्दाफाश किया तो राजस्व विभाग के अंडर सिकरेट्री ने एसीएस होम मनोज पिंगुआ को जांच के लिए पत्र लिख दिया। उन्होंने लिखा कि कुंजाम कमेटी ने अपने अधिकार क्षेत्र में न होने की वजह से कुछ बिंदुओं की जांच करने में असमर्थता व्यक्त की है, इसलिए गृह विभाग इसकी जांच करें।
उधर, एसीएस मनोज पिंगुआ ने कहा कि गृह विभाग कोई जांच एजेंसी नहीं हैं। राजस्व विभाग को अगर जांच कराना ही है तो थाने में जाए। जानकारों ने भी कहा कि राजस्व विभाग को अगर ईमानदारी से जांच करानी होती तो वह पुलिस में जाता या फिर ईओडब्लू में।
गृह विभाग ने भी राजस्व विभाग का पत्र लौटा दिया था कि यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और न ही गृह विभाग के पास कोई जांच का सेटअप होता है।
एनपीजी न्यूज में इसकी खबर प्रकाशित होने के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय फिर हरकत में आया। राजस्व विभाग को सख्त हिदायत दी गई कि आरआई परीक्षा घोटाला गंभीर विषय है, इसकी ईओडब्लू से जांच कराई जाए। फिर राजस्व विभाग के अंडर सिकरेट्री अन्वेष धृतलहरे ने सामान्य प्रशासन विभाग को ईओडब्लू जांच के लिए पत्र भेजा। सामान्य प्रशासन विभाग मुख्यमंत्री के अधीन आता है। मुख्यमंत्री से हरी झंडी मिलने के बाद फिर परीक्षा घोटाले को ईओडब्लू को सौंप दिया गया।
कुंजाम कमेटी ने जांच रिपोर्ट में इस शिकायत की पुष्टि की है कि 22 सगे-संबंधियों को एक साथ रौल नंबर देकर परीक्षा में बिठाया गया और ये सभी चयनित भी हुए। इनमें पति-पत्नी, साली, भाई-भाई पटवारी से आरआई बन गए।
3000 पृष्ठों का प्रथम चालान पेश
दरअसल, राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण व एंटी करप्शन ब्यूरो में राजस्व निरीक्षक विभागीय परीक्षा 2024 के पेपर लीक प्रकरण में अपराध क्रमांक 64ध्2025, धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी भा.द.वि. एवं धारा 7 (सी) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (यथासंशोधित 2018) का दर्ज किया गया था। आरोपी वीरेंद्र जाटव (सहायक सांख्यिकी अधिकारी) व हेमंत कुमार कौशिक (सहायक सांख्यिकी अधिकारी) के विरुद्ध न्यायालय में आज 3000 पृष्ठों का प्रथम चालान प्रस्तुत किया गया। जाँच में पाया गया कि राजस्व निरीक्षक विभागीय परीक्षा 7 जनवरी 2024 को आयोजित होना था, आरोपी वीरेंद्र जाटव ने वरिष्ठ अधिकारी के आवास पर प्रश्नपत्र टाइप किया। लेकिन परीक्षा शुरू होने के पहले ही आरोपियों द्वारा प्रश्नपत्र लीक कर चुनिंदा उम्मीदवारों को इसकी प्रतियां रकम लेकर उपलब्ध करायी थी।
100 से अधिक अभ्यर्थियों को मिला था प्रश्नपत्र
जाँच में सबूतों के आधार पर यह पुष्टि हुई कि 100 से अधिक अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र मिला था। विवेचना के दौरान प्रकरण में आरोपियों के विरुद्ध डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं, जिनसे यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपियों द्वारा विभिन्न माध्यमों से पटवारी अभ्यर्थियों तक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया, साथ ही उसके बदले राशि प्राप्त की गई थी।
अभ्यर्थियों को ठहराया गया था अलग-अलग होटलों में
जाँच में यह भी पाया गया कि अलग-अलग जिलों के कुछ अभ्यर्थी समूह के रूप में परीक्षा देने आए थे, जिन्हें आरोपियों द्वारा अलग-अलग होटलों में ठहराया गया था। संबंधित होटलों में पहुंचकर उक्त अभ्यर्थियों को प्रश्न उपलब्ध कराए गए। आरोपियों द्वारा अभ्यर्थियों को प्रश्न पढ़कर नोट कराए गए तथा परीक्षा से पूर्व लिखे हुए प्रश्नों को जलाने के लिए कहा गया, ताकि सबूत नष्ट हो सके। इस कार्य हेतु आरोपियों द्वारा अपने रिश्तेदारों का भी उपयोग किया गया, जो अलग-अलग होटलों में जाकर अभ्यर्थियों को परीक्षा में आने वाले प्रश्न नोट कराने की प्रक्रिया में आरोपियों के साथ शामिल रहे।
सीडीआर विश्लेषण में यह भी पाया गया कि परीक्षा से ठीक पहले रात में कई अभ्यर्थियों की लोकेशन आरोपियों की लोकेशन के साथ समान पाई गई। इसके साथ ही आरोपियों द्वारा परीक्षा की पूर्व रात में रात भर अलग-अलग स्थानों, होटलों, फार्म हाउस व रिजॉट्स पर आवागमन कर उन स्थानों पर प्रश्न सामग्री उपलब्ध कराए जाने की पुष्टि भी उनके सीडीआर से प्राप्त टावर लोकेशन से होती है, जहां अभ्यर्थी ठहरे हुए थे।
इसके अतिरिक्त, विवेचना में यह तथ्य भी सामने आया है कि जो अभ्यर्थी एक साथ होटलों में ठहरे थे, उनके परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय समानता पाई गई। संबंधित अभ्यर्थियों के अंकों में समानता के साथ-साथ उनकी उत्तर-पुस्तिकाओं के परीक्षण में सही व गलत उत्तरों के पैटर्न में भी समानता पाई गई।
प्रकरण में वित्तीय लेनदेन (मनी ट्रेल) सहित अन्य संभावित संलिप्त अधिकारियों, राजस्व निरीक्षकों एवं व्यक्तियों की भूमिका की जांच जारी है। दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 173 (8) के तहत् विवेचना जारी है।
