Rajim: आस्था और विकास का संगम, राजिम की पवित्र त्रिवेणी संगम को CM विष्णुदेव ने आध्यात्मिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया
Rajim: राजिम कुंभ कल्प आज छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में गिना जाता है। हाल के वर्षों में इस आयोजन ने जिस भव्यता और सुव्यवस्थित स्वरूप को प्राप्त किया है, उसने इसे प्रदेश की आध्यात्मिक पहचान का प्रमुख प्रतीक बना दिया है।

Rajim: रायपुर। समग्र रूप से राजिम कुंभ आज छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक परंपरा, संत संस्कृति और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक बन चुका है। त्रिवेणी संगम पर आयोजित यह भव्य आयोजन आस्था, संस्कृति और पर्यटन का ऐसा संगम है जो प्रदेश की पहचान को नई ऊंचाई देता है। राजिम कुंभ अब केवल एक धार्मिक मेला नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक ऊर्जा का विराट उत्सव बन चुका है, जो हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को एक ही आस्था सूत्र में बांध देता है। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित राजिम का पवित्र त्रिवेणी संगम राज्य की आध्यात्मिक चेतना का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों का संगम सदियों से श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक रहा है।
इसी दिव्य स्थल पर आयोजित राजिम कुंभ कल्प आज छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में गिना जाता है। हाल के वर्षों में इस आयोजन ने जिस भव्यता और सुव्यवस्थित स्वरूप को प्राप्त किया है, उसने इसे प्रदेश की आध्यात्मिक पहचान का प्रमुख प्रतीक बना दिया है। राजिम को लंबे समय से छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक त्रिवेणी संगम में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के कारण हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचकर संगम स्नान करते हैं और पूजा अर्चना, कल्पवास तथा विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। देशभर से साधु संत और नागा सन्यासी भी इस अवसर पर राजिम पहुंचते हैं, जिससे यह आयोजन संत परंपरा के बड़े समागम के रूप में स्थापित हो चुका है।
राजिम को प्राचीन ग्रंथों में पद्मक्षेत्र या कमलक्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है। यहां स्थित राजीव लोचन मंदिर भगवान विष्णु की प्राचीन उपासना परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है, जबकि कुलेश्वर महादेव मंदिर त्रिवेणी संगम के तट पर स्थित होकर शिव भक्ति की आस्था को मजबूत करता है। इन प्राचीन मंदिरों और संगम तट की धार्मिक परंपराएं राजिम को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक बनाती हैं। वर्ष 2005 में राजिम कुंभ को राज्य स्तरीय धार्मिक आयोजन का दर्जा मिलने के बाद इसका स्वरूप लगातार विस्तृत होता गया। समय के साथ यह आयोजन केवल स्नान और पूजा तक सीमित न रहकर संत समागम, आध्यात्मिक प्रवचन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का बड़ा मंच बन गया।
सुव्यवस्थित प्रबंधन से मिला नया स्वरूप
हाल के वर्षों में राजिम कुंभ के आयोजन में व्यवस्थागत सुधारों ने इसे और अधिक भव्य और व्यवस्थित बनाया है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मेला क्षेत्र का विस्तार किया गया और सुरक्षा, स्वच्छता तथा यातायात प्रबंधन को प्राथमिकता दी गई। पूरे मेला परिसर में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, स्वास्थ्य सेवाएं और आपदा प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। विस्तृत मेला मैदान, साधु संतों के सुव्यवस्थित शिविर, सांस्कृतिक मंच और प्रदर्शनी क्षेत्र ने इस आयोजन को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक स्वरूप प्रदान किया है। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, भोजन और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाओं का भी व्यापक प्रबंध किया गया है, जिससे दूरदराज से आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सांस्कृतिक और पर्यटन संभावनाओं का विस्तार
राजिम कुंभ का स्वरूप अब केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा है। इसमें छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, लोकनृत्य और पारंपरिक कलाओं की झलक भी दिखाई देती है। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, आध्यात्मिक प्रवचनों और विभागीय प्रदर्शनी के माध्यम से यह आयोजन प्रदेश की समृद्ध परंपराओं को व्यापक मंच प्रदान करता है। देश और विदेश से आने वाले पर्यटकों की बढ़ती भागीदारी ने राजिम कुंभ को पर्यटन के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण बना दिया है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिल रही है और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हो रही है।
9000 फीट की ऊंचाई पर राजिम कुंभ कल्प का प्रचार
पर्वतारोहण एवं ट्रैकिंग के क्षेत्र में सक्रिय ग्राम पोंड़, जिला गरियाबंद के युवा खेमराज साहू ने हिमाचल प्रदेश की बर्फीली वादियों में राजिम कुंभ कल्प मेला 2026 का प्रचार कर जिले एवं प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कुल्लू जिले की सोलंग वैली से पतालसू पीक ट्रैक के दौरान लगभग 9000 फीट की ऊंचाई पर माइनस 6 डिग्री तापमान में तिरंगा एवं छत्तीसगढ़ महतारी की छायाप्रति के साथ मेले का संदेश प्रदर्शित किया।
उल्लेखनीय है कि पतालसू पीक की कुल ऊंचाई लगभग 13,900 फीट है। 03 फरवरी 2026 को अत्यधिक बर्फबारी एवं प्रतिकूल मौसम के कारण कुल्लू जिला प्रशासन द्वारा ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ट्रैकिंग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। निर्धारित मार्ग पर 8 से 10 फीट तक बर्फ जमी होने के बावजूद खेमराज साहू एवं उनके साथियों ने एडवेंचर वैली के प्रशिक्षु माउंटेनियर के मार्गदर्शन में सोलंग वैली से शगाडुग के जंगलों के रास्ते ट्रैकिंग का प्रयास किया।
सीने तक जमी बर्फ को हटाते हुए एवं कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए लगभग 9000 फीट की ऊंचाई पर उन्होंने सफलतापूर्वक तिरंगा लहराते हुए राजिम कुंभ कल्प मेला 2026 का प्रचार किया। इस अभियान में छत्तीसगढ़ के नितेश अग्रवाल, राजनांदगांव तथा ओड़िशा की प्रवासिनी सहित अन्य साथी शामिल रहे। पूर्व में वर्ष 2023 में खेमराज साहू केदारकंठा (12,500 फीट), उत्तराखंड में भी जिले का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं तथा उनका नाम वर्ल्ड वाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज है।
राजिम कुंभ कल्प छत्तीसगढ़ की अस्मिता एवं पहचान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजिम में आयोजित राजिम कुंभ कल्प 2026 के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राजिम कुंभ कल्प केवल एक धार्मिक मेला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता और पहचान का प्रतीक पर्व है।
मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए राजिम में सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला निर्माण हेतु 50 लाख रुपये की घोषणा की। साथ ही, राजिम बैराज कार्य को शीघ्र प्रारंभ करने और पूर्व में प्रस्तावित विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री साय ने मुख्य मंच पर भगवान राजीव लोचन की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने अपने उद्बोधन की शुरुआत भगवान राजीव लोचन, कुलेश्वर महादेव, राजिम दाई, छत्तीसगढ़ महतारी और भारत माता के जयघोष के साथ की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के त्रिवेणी संगम की पावन भूमि सदियों से तप, त्याग और साधना की साक्षी रही है। “छत्तीसगढ़ का प्रयाग” कहे जाने वाला राजिम अपनी आध्यात्मिक गरिमा के कारण विशेष स्थान रखता है।
महाशिवरात्रि की शुभकामनाएँ देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान शिव त्याग, संयम और सेवा के प्रतीक हैं, जिनका संदेश आज के युग में संतुलन और समर्पण का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा श्रद्धालुओं के लिए आवागमन, स्वच्छता, पेयजल, स्वास्थ्य सेवा, प्रकाश व्यवस्था एवं सुरक्षा के व्यापक प्रबंध सुनिश्चित किए गए थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में राजिम कुंभ मेला-स्थल को और अधिक सुव्यवस्थित एवं भव्य बनाया जाएगा तथा इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित आध्यात्मिक आयोजन के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने प्रदेशवासियों से सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा युवा पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने का आह्वान किया।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री दयाल दास बघेल ने कहा कि राजिम कुंभ कल्प सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का विराट उत्सव है। इस वर्ष पंचकोसी धाम और द्वादश ज्योतिर्लिंग की थीम ने आयोजन को विशेष स्वरूप प्रदान किया।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि राजिम कुंभ कल्प छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का उत्सव है और इसे राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार प्रतिबद्ध है, जिससे स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
