Begin typing your search above and press return to search.

रेलवे व ठेका कंपनी के बीच 1.38 करोड़ रुपए का भुगतान विवाद, हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज को सिंगल बेंच ने बनाया आर्बिट्रेटर, अब ये जज करेंगे मध्यस्थता

Bilaspur High Court: दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे और ठेका कंपनी के बीच 1.38 करोड़ रुपये के बिल भुगतान विवाद का निपटारा छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के रिटायर जज करेंगे। मामले की सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के सिंगल बेंच ने यह व्यवस्था दी है।

रेलवे व ठेका कंपनी के बीच 1.38 करोड़ रुपए का भुगतान विवाद, हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज को सिंगल बेंच ने बनाया आर्बिट्रेटर, अब ये जज करेंगे मध्यस्थता
X

इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

By Radhakishan Sharma

बिलासपुर।5 अप्रैल 2026| दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे और ठेका कंपनी के बीच 1.38 करोड़ रुपये के बिल भुगतान विवाद का निपटारा छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के रिटायर जज करेंगे। मामले की सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के सिंगल बेंच ने यह व्यवस्था दी है।

बता दें, इसी तरह के एक विवाद में ठेका कंपनी को कमर्शियल कोर्ट के आदेश पर रेलवे ने बिल का भुगतान किया था। इस ठेके में रेलवे ने भुगतान करने से मना कर दिया है। यह विवाद अब हाई कोर्ट पहुंच गया है। हाई कोर्ट ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे और एक निजी कंपनी के बीच चल रहे करोड़ों रुपए के भुगतान विवाद को सुलझाने आर्बिट्रेटर की नियुक्ति की है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने इस मामले में हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस दीपक कुमार तिवारी को एकमात्र मध्यस्थ नियुक्त किया है।

एसईसीआर ने दिल्ली की कंपनी एंजेलिक इंटरनेशनल लिमिटेड को वर्ष 2017 में तीसरी लाइन के विद्युतीकरण का काम सौंपा था। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत तकरीबन 16.40 करोड़ रुपए थी। काम के दौरान लोहे और स्टील की कीमतों में बदलाव यानी प्राइस वेरिएशन हुआ।

इसी तरह के एक प्रकरण में कंपनी को रेलवे ने किया है भुगतान

कंपनी का कहना है कि स्टील की कीमतों की गणना आईईईएमए इंडेक्स के आधार पर होनी चाहिए, जबकि रेलवे इसे मानने को तैयार नहीं था। कंपनी ने इस मद में 1.38 करोड़ रुपए का बिल रेलवे को भेजा, लेकिन रेलवे ने भुगतान करने से मना कर दिया। बता दें, इसी तरह के एक दूसरे कॉन्ट्रैक्ट में कंपनी पहले ही केस जीत चुकी है। उस मामले में कमर्शियल कोर्ट ने कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाया था और रेलवे ने उसे भुगतान भी कर दिया था। लेकिन इस नए प्रोजेक्ट के लिए रेलवे ने वही नियम मानने से इनकार कर दिया।

दोनों पक्षों की सहमति के बाद कोर्ट ने तय किया आर्बिट्रेटर

जब रेलवे ने कंपनी के नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया, तो कंपनी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। कंपनी ने कहा, इस मामले में रेलवे खुद अपना आर्बिट्रेटर नियुक्त करना चाहता है, लेकिन यह कानूनन गलत है। सुनवाई के दौरान रेलवे के अधिवक्ता ने हाई कोर्ट द्वारा आर्बिट्रेटर नियुक्त किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। दोनों पक्षों की सहमति के बाद चीफ जस्टिस की सिंगल बेंच ने हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस दीपक कुमार तिवारी को मध्यस्थ नियुक्त कर दिया। अब वे तय करेंगे कि कंपनी को बकाया राशि मिलनी चाहिए या नहीं।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

Read MoreRead Less

Next Story