Raigarh News: CSR फंड के नाम पर ठगी, एनजीओ कार्यकर्ता को झांसा देकर करोड़ों का किया ट्रांजेक्शन, 5 आरोपी गिरफ्तार
Raigarh News: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में सीएसआर फंड के नाम पर ठगी करने वाले एनजीओ कार्यकर्ताओं से करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश पुलिस ने किया है। पुलिस की टीम ने पांच आरोपियों को धर-दबोचा है।

Raigarh News: रायगढ़। रायगढ़ पुलिस को एक बड़े ऑनलाइन फ्रॉड मामले में बड़ी सफलता हाथ लगी है। साइबर पुलिस थाना टीम ने अंतरराज्यीय ठगी से जुड़े गिरोह के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके तार कई राज्यों में फैले हुए है।महिला एनजीओ कार्यकर्ता को CSR फंड दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी की गई थी। एनजीओ कार्यकर्ता के खाते का इस्तेमाल कर 2.17 करोड़ का ट्रांजेक्शन किया गया। देशभर में 44 साइबर फ्रॉड शिकायतों में करोडों के धनराशि का खुलासा हुआ है।
जानिए पूरा मामला
दरअसल, इंदिरानगर रायगढ़ की रहने वाली महिला आयशा परवीन एनजीओ से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आयशा परवीन ने 12 मार्च को साइबर थाना रायगढ़ में रिपोर्ट दर्ज कराई कि दिसंबर 2025 में उसके भांजे ने उसकी पहचान अभय यादव और विजय चंद्रा से कराई थी।
विजय चंद्रा ने बताया कि वो एक कंपनी CSR मद से सामाजिक कार्यों के लिए अनुदान देना चाहता है, जिसके लिए उसके संस्थान के पंजीयन से संबंधित दस्तावेज लिए गए। कुछ दिनों बाद विजय चंद्रा ने अपने साथी अजय साहू और सचिन चौहान से आयशा परवीन का संपर्क कराया। आरोपियों ने महिला को भरोसे में लिये, महिला अपने संस्थान के नाम से एक्सिस बैंक में खाता खुलवाया।
खाता खुलवाने के बाद अजय यादव जो पहले बैंक में काम कर चुका है उसने ऑनलाईन ट्रांजक्शन के लिए MPIN तथा अन्य लॉगिन संबंधी प्राक्रिया पूर्ण कर खुद ही 10 रूपये मेरे खाते में भेजकर चेक किया। कुछ दिन बाद महिला को कंपनी से नौकरी दिये जाने और अनुदान राशि लेने के लिये गुवाहटी जाने की बात कहने लगे। ठगो ने ही महिला और उसके पति की फ्लाइट टिकट और होटल में रूकने की व्यवस्था किये। हॉटल में शाम में दो अज्ञात व्यक्ति ने खुद को कंपनी की ओर से होना बताकर NGO का बैंक खाता रजिस्टर्ड लेकर मोबाइल पर APK फाईल डाउनलोड किये। आरोपियों ने बताया कि अब कंपनी के अधिकारियों के द्वारा खाते को चेक किया जायेगा। उसके बाद कई बार आकर मोबाइल लेकर चेक करने लगे और बोले कि उनके खाते में कोई समस्या आ गई है, जिस कारण पैसे का ट्रांजक्शन नहीं हो पा रहा हैं। लगभग एक सप्ताह तक उन्हें वहीं रखकर विभिन्न ट्रांजेक्शन कराए गए और 12 जनवरी को उन्हें वापस जाने दिया गया।
जांच में सामने आया कि आरोपी साइबर फ्रॉड गैंग से जुड़े हुए थे। विजय चंद्रा ने गुवाहाटी स्थित गैंग से संपर्क कर महिला के कॉरपोरेट अकाउंट की जानकारी साझा की। इसके बाद आरोपियों ने महिला और उसके पति को गुवाहाटी बुलवाया, जहां होटल में उनके ठहरने की व्यवस्था की गई। वहां गैंग के सदस्यों ने महिला का मोबाइल, चेकबुक आदि अपने पास रखकर उसके मोबाइल में APK फाइल इंस्टॉल कराई और उसके बैंक खाते के माध्यम से ट्रांजेक्शन कराए।
रायगढ़ लौटने के बाद महिला को बैंक से कॉल आया कि उसके खाते में संदिग्ध लेनदेन हो रहे हैं। 14 जनवरी को बैंक द्वारा बताया गया कि उसके खाते से साइबर फ्रॉड की गतिविधियां हुई। बाद में महिला को देश के विभिन्न राज्यों से मेल प्राप्त हुए, जिनमें उसके खाते में साइबर फ्रॉड से संबंधित विवादित रकम जमा होने की जानकारी दी गई। जांच में पता चला कि 29 दिसंबर 2025 से ही उसके खाते में संदिग्ध ट्रांजेक्शन शुरू हो गए थे। जब महिला ने इस बारे में विजय चंद्रा से संपर्क किया तो उसने बैंक की गलती बताकर समय मांगा, लेकिन बाद में संपर्क से गायब हो गया।
महिला की शिकायत पर साइबर पुलिस थाना रायगढ़ में अपराध क्रमांक 03/2026 धारा 318(4), 3(5) BNS के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू की गई। महिला से पूछताछ कर अंतरराज्यीय साइबर ठगी से जुड़े पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपी
मितेश सोनी (31 वर्ष) निवासी वसुंधरा नगर भिलाई-3 जिला दुर्ग
विजय चंद्रा (35 वर्ष) निवासी ग्राम कटौत थाना डभरा जिला सक्ती
अजय साहू (35 वर्ष) निवासी ढिमरापुर चौक थाना सिटी कोतवाली रायगढ़
अभय यादव (23 वर्ष) निवासी कौहवाकुंडा पहाड़ मंदिर थाना चक्रधरनगर रायगढ़
सचिन चौहान (24 वर्ष) निवासी कलमीडिपा थाना चक्रधरनगर रायगढ़ शामिल हैं।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी अभय यादव पहले एक स्थानीय बैंक में कार्य कर चुका था। उसकी पहचान विजय चंद्रा से थी और विजय चंद्रा की पहचान अजय साहू और मितेश सोनी से हुई, जो पहले से साइबर फ्रॉड गैंग से जुड़ा था। इसी के माध्यम से अभय यादव, विजय चंद्रा, अजय और सचिन चौहान को टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ा गया, जहां से उन्हें कॉरपोरेट बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने का काम सौंपा गया। आरोपी विभिन्न राज्यों में सक्रिय साइबर फ्रॉड गैंग को ऐसे बैंक खाते उपलब्ध कराते थे, जिनका उपयोग साइबर ठगी के पैसे ट्रांजेक्शन के लिए किया जाता था और इसके बदले उन्हें फ्रॉड से प्राप्त रकम का 5 से 15 प्रतिशत कमीशन मिलता था।
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने 25 से 30 बैंक खाते अलग-अलग राज्यों में उपलब्ध कराने की जानकारी दी है। आरोपियों के कब्जे से छह मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में साइबर पुलिस के समन्वय पोटर्ल पर पीड़ित महिला के खाते के संबंध में देशभर से 44 अलग-अलग साइबर फ्रॉड शिकायतें दर्ज पाई गई हैं जिनमें करोडों के विवादित ट्रांजेक्शन हुआ है।
