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Makar Sankranti Tatapani Festival : मकर संक्रांति पर Chhattisgarh में यहाँ प्राकृतिक गर्म पानी के कुंडों में स्नान करने देश भर से आते हैं सनातनी, जानिए यहाँ की खासियत

Makar Sankranti Tatapani Festival : तातापानी अपने प्राकृतिक गर्म पानी के कुंडों के लिए प्राचीन काल से ही प्रसिद्ध है. इन कुंडों में मौजूद सल्फर औषधीय गुण प्रदान करता है, जो शारीरिक रोगों से मुक्ति दिलाने के साथ-साथ आत्मिक शांति का अनुभव भी कराता है.

Makar Sankranti Tatapani Festival : मकर संक्रांति पर   Chhattisgarh में यहाँ प्राकृतिक गर्म पानी के कुंडों में स्नान करने देश भर से आते हैं सनातनी, जानिए यहाँ की खासियत
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By Meenu Tiwari

Makar Sankranti Tatapani Festival : छत्तीसगढ़ में एक ऐसी जगह है जहाँ मकर संक्रांति को भव्य मेला लगता है. और इस मेले में सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि कई राज्यों से भी लोग मेले का लुत्फ़ उठाने आते हैं. हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में होने वाला तातापानी महोत्सव की, जो बेहद खास है. मिली जानकारी अनुसार इस वर्ष भी मकर संक्रांति का दिव्य संगम 14,15,16 जनवरी को है.


तातापानी मेले की शुरुआत लगभग सौ वर्ष पूर्व हुई थी. उस समय स्थानीय ग्रामीण और श्रद्धालु मकर संक्रांति के दिन तातापानी के गर्म कुंडों में स्नान के लिए एकत्रित होते थे. समय के साथ, यह धार्मिक परंपरा एक भव्य सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सव में परिवर्तित हो गई है. गौरतलब है की तातापानी अपने प्राकृतिक गर्म पानी के कुंडों के लिए प्राचीन काल से ही प्रसिद्ध है. इन कुंडों में मौजूद सल्फर औषधीय गुण प्रदान करता है, जो शारीरिक रोगों से मुक्ति दिलाने के साथ-साथ आत्मिक शांति का अनुभव भी कराता है. यहाँ गर्म पानी कुंडों को लेकर माता सीता और राम जी से भी जुडी कहानिया है.




मकर संक्रांति पर आयोजित होने वाला एक ऐतिहासिक उत्सव है. यह झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी आकर्षित करता है. तातापानी महोत्सव छत्तीसगढ़ में साल का पहला बड़ा उत्सव है, जो अपने धार्मिक महत्व के साथ-साथ राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक और सामाजिक धरोहर को भी प्रदर्शित करता है.



प्राचीन काल से गर्म कुंडों के लिए है प्रसिद्ध



तातापानी अपने प्राकृतिक गर्म पानी के कुंडों के लिए प्राचीन काल से ही प्रसिद्ध है. इन कुंडों में मौजूद सल्फर औषधीय गुण प्रदान करता है, जो शारीरिक रोगों से मुक्ति दिलाने के साथ-साथ आत्मिक शांति का अनुभव भी कराता है. धार्मिक ग्रंथों और लोक कथाओं में तातापानी का उल्लेख इसे स्वास्थ्य लाभ और आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र के रूप में प्रस्तुत करता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान राम ने अपने वनवास के दौरान तातापानी में कुछ समय बिताया था, जिससे इस स्थान का धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया.


कहाँ है ये स्थल

बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में तातापानी नामक प्राकृतिक स्थल सभी जीवों का मन मोहने वाला है। यह स्थल अंबिकापुर से 80 किलोमीटर की दूरी पर है।


प्राचीन लोगों का ये कहना है


यहाँ के ग्रामीण कहते हैं कि जब वनवास के दौरान माता सीता कड़ाही में घी डालकर उससे कुछ भोजन बना रही थीं तब रामच्योरा पर्वत से राम जी ने एक छोटा पत्थर चलाकर फेंका और वो सीधे कड़ाही पर जा गिरा, जिससे गर्म घी के छींटें जहाँ-जहाँ पड़ें वहाँ-वहाँ गर्म जलस्रोत के छोटे-बड़े कुण्ड बन गये। इन गर्म जलस्रोतों का जल यहाँ के लोग त्वचा के रोगों के लिये भी कालांतर से प्रयोग में लाते रहे हैं। इनका धार्मिक विश्वास इन्हें सुकून और राहत जरूर देता आ रहा है। यहाँ का बड़ा शिवमंदिर और यहाँ की जमीन से निकली मूर्तियां भी लोगों के आकर्षण का केंद्र हैं। खास बात यह कि यहाँ का गर्म पानी हजारों सालों से हर मौसम में एक ही लय में है।

खाद्य सामग्री को कपड़े में बाँधकर पकाते हैं

कुण्डों के जल से सल्फर की गन्ध आती है। ऐसी मान्यता है कि इन जल कुंडों में स्नान करने व पानी पीने से अनेक चर्म रोग ठीक हो जाते हैं। इन दुर्लभ जल कुंडों को देखने के लिये वर्ष भर पर्यटक आते रहते हैं। यहाँ थोड़ा रोचकता के लिये अपने साथ लाये खाद्य सामग्री को कपड़े में बाँधकर पकाते हैं।


क्या कहते हैं एक्सपर्ट, ये है वैज्ञानिक कारण




भूतापीय ऊर्जा के कारण पृथ्वी में कई जगह गर्म जलस्रोत के कुण्ड पाये जाते हैं। जियो थर्मल एनर्जी पृथ्वी की सतह पर और अन्दर बनती है। तातापानी के सतह के अन्दर एल्यूमिनियम, सिलिकॉन, कैल्शियम, सोडियम, मैग्नीशियम, सल्फर हाइड्रोजन के तत्व हैं। पृथ्वी के ताप से ऊर्जा का निर्माण होता है। पृथ्वी सतह से जितना नीचे जाएंगे, तापमान बढ़ता ही जाएगा। सतह के नीचे की गर्मी से मेटल के पिघलने से मैग्मा बनेगा। मैग्मा पिघलने का कारण रेडियो एक्टिव तत्व हैंं। रेडियो एक्टिव तत्वों में टाइटेनियम, यूरेनियम और पोटेशियम मैग्मा रॉक को गर्म करते हैं। आग्नेय रॉक गर्म हो जाता है।

तातापानी के क्षेत्र में वर्षा का पानी जब नीचे रिसकर जाता है तो गर्म हो जाता है। मैग्मा रॉक की गर्मी से गर्म हुआ पानी जियो थर्मल एनर्जी बनाता है। जियो थर्मल एनर्जी द्वारा ही जलस्रोत से गर्म पानी बाहर निकलता है। भूकम्प प्रभावी क्षेत्रों में ऐसा अक्सर मिलता है। जमीन के अंदर कार्बन के तत्व और हाइड्रोजन गैस ऑक्सीजन से मिल कर पानी के रूप में परिवर्तित हो जाते हैं। यह पानी भी गर्म होने के साथ ही जियो थर्मल एनर्जी के रूप में बाहर निकलता है। जियो थर्मल ग्रेडिएंड के कारण पानी डिस्चार्ज हो कर ऊपर आएगा। सल्फर मैग्मा का ही भाग है। सल्फेट आयरन, पोटेशियम क्लोराइड चिकित्सा के काम में आता है।

भू तापीय ऊर्जा नवीनीकरण ऊर्जा का स्रोत है। जियो थर्मल एनर्जी से बिजली बनाई जा सकती है। बालनियोलॉजी के तहत गर्म जलस्रोत में मिनरल अधिक होने के कारण मिनरल बॉथ थेरेपी(स्नान चिकित्सा) हो सकती है। चिकित्सा के दौरान गर्म पानी की गुणवत्ता, तापमान चिकित्सक की सलाह पर उपयोग होगा। ऐसे गर्म जलस्रोतो से दर्द, ऐंठन, जोड़ों के दर्द को ठीक किया जा सकता है।

भारत में अब तक लगभग 340 तापीय कुंडों अथवा झरनों की पहचान की जा चुकी है। छत्तीसगढ़ में तातापानी, हिमाचल में मणिकर्ण, लद्दाख में पुगा व छुमथंग, सोन-नर्मदा-तापी क्षेत्र में सालबरदी, पश्चिमी तटवर्ती क्षेत्र में कैम्बे द्रोणी, अंडमान-निकोबार में बैरन व नारकोंडम द्वीप आदि भारत के प्रमुख भू-तापीय ऊर्जा के स्रोत हैं।


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