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कर्मचारियों की खबर: परिवार का कोई अन्य सदस्य पहले से नौकरी में है तो भी मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति, हाई कोर्ट ने कहा...

Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस एके प्रसाद के सिंगल बेंच ने अपने फैसले में कहा...

कर्मचारियों की खबर: परिवार का कोई अन्य सदस्य पहले से नौकरी में है तो भी मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति, हाई कोर्ट ने कहा...
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इमेज सोर्स- NPG News

By Radhakishan Sharma

बिलासपुर।1 मार्च 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस एके प्रसाद के सिंगल बेंच ने अपने फैसले में कहा है,NCWA एग्रीमेंट के महत मिलने वाली आश्रित नौकरी को सिर्फ इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता, परिवार का कोई अन्य सदस्य पहले से नौकरी में है। कोर्ट ने कोल इंडिया से कहा कि आदेश की कॉपी मिलने के 45 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता के पक्ष में निर्णय लेने का आदेश दिया है।

जस्टिस एके प्रसाद ने अपने फैसले में कहा है, सेवा के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाने पर, आश्रित व्यक्ति राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते NCWA के तहत निर्मित सामाजिक सुरक्षा योजना के अंतर्गत नियुक्ति के लिए वैध रूप से पात्र होता है। इस पात्रता को केवल इसलिए नकारा नहीं जा सकता क्योंकि परिवार का कोई अन्य सदस्य पहले से ही कार्यरत है, जब तक कि NCWA के तहत कोई स्पष्ट अयोग्यता न हो। ऐसे बाहरी आधार पर अस्वीकृति मनमानी और कानून की दृष्टि से अस्वीकार्य है।

क्या है मामला?

भारत सरकार ने वर्ष 1973 में कोयला क्षेत्र में गैर-कार्यकारी कर्मचारियों की सेवा शर्तों पर बातचीत करने के लिए संयुक्त द्विपक्षीय समिति JBCCI का गठन किया था, जिसके परिणामस्वरूप समय-समय पर एनसीडब्ल्यूए के नाम से जाने जाने वाले क्रमिक समझौते निष्पादित किए गए। एनसीडब्ल्यूए औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 2(p) को धारा 18(3) के साथ पढ़ने पर एक बाध्यकारी समझौता है और यह कोयला खानों में कामगारों की सेवा शर्तों को नियंत्रित करता है।

याचिकाकर्ता सुरेंद्र कुमार ने अपनी याचिका में कहा है,उसकी मां, स्व भगवानिया, राजनगर OCM ओपन कास्ट माइंस में जनरल मजदूर के पद पर कार्यरत थीं और 7 मई 2011 को अपनी मृत्यु तक इस पद पर रहीं। एसईसीएल के अफसरों द्वारा आधिकारिक सेवा अभिलेख में याचिकाकर्ता को उनके आश्रित परिवार के सदस्य के रूप में दर्ज किया गया था। उनकी मृत्यु के बाद, उसने 9 सितंबर 2011 को NCWA के तहत परिकल्पित आश्रित रोजगार के लिए सामाजिक सुरक्षा योजना के अंतर्गत रोजगार हेतु आवेदन किया, जिसमें सभी आवश्यक दस्तावेज संलग्न थे।

हालांकि, पत्र द्वारा 20 अप्रैल 2012 को अफसरों ने उन्हें सूचित किया कि उनके मामले पर विचार नहीं किया जा सकता है, इसके लिए कोई ठोस कारण भी नहीं बताया। याचिका के अनुसार बार-बार निवेदन किए जाने के बावजूद, याचिकाकर्ता के दावे पर न तो विधिवत विचार किया गया है और न ही तर्कसंगत आदेश द्वारा औपचारिक रूप से अस्वीकार किया गया है, जिससे उसे राष्ट्रीय राष्ट्रीय न्याय अधिनियम NCWA)के तहत उसके वैध अधिकार से वंचित किया गया है।

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में क्या मांगी है राहत?

  • संबंधित संपूर्ण अभिलेख मंगवाने की कृपा करें।
  • एसईसीएल के प्रतिवादी अधिकारियों को उसके मामले पर विचार करने और राष्ट्रीय कोयला मजदूरी समझौते के तहत परिकल्पित सामाजिक सुरक्षा योजना के अनुसार याचिकाकर्ता को उसकी माता पर आश्रित होने के नाते रोजगार प्रदान करने का निर्देश देने की मांग हाई कोर्ट से की है।
  • प्रतिवादी कंपनी को राष्ट्रीय कोयला मजदूरी समझौते के अनुसार याचिकाकर्ता के पक्ष में नियुक्ति आदेश जारी करने हाई कोर्ट से मांग की है।
  • प्रतिवादी कंपनी को भुगतान करने का निर्देश दे। याचिकाकर्ता को इस कारण से मुआवजा दिया जाए कि प्रतिवादी कंपनी द्वारा याचिकाकर्ता के बहुमूल्य अधिकार को अनावश्यक रूप से नकारा जा रहा है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने ये दिया तर्क

मामले की सुनवाई जस्टिस एके प्रसाद के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता चंद्रेश श्रीवास्तव ने कहा, आश्रित रोजगार के लिए याचिकाकर्ता का दावा राष्ट्रीय विवाद अधिनियम (एनसीडब्ल्यूए) के बाध्यकारी प्रावधानों पर आधारित है और उसके द्वारा संरक्षित है, जो औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 2(पी) के अर्थ में एक वैधानिक समझौता है और इसकी धारा 18(3) के अनुसार सभी पक्षों पर बाध्यकारी है।

संयुक्त द्विपक्षीय कोयला उद्योग समिति (जेबीसीसीआई) के तत्वावधान में सामूहिक सौदेबाजी के माध्यम से गठित एनसीडब्ल्यूए, कोयला क्षेत्र में गैर-कार्यकारी कर्मचारियों की सेवा शर्तों को नियंत्रित करता है और इसमें वैधानिक स्वरूप है, इसलिए इसके प्रावधान प्रतिवादी कंपनी एसईसीएल के विरुद्ध अनिवार्य रूप से लागू होते हैं। याचिकाकर्ता की माता, स्व भगवानिया, राजनगर ओसीएम में जनरल मजदूर के पद पर कार्यरत रहते हुए सेवाकाल में ही दिवंगत हो गईं, और उनके जीवनकाल में याचिकाकर्ता को उनके आश्रित परिवार के सदस्य के रूप में आधिकारिक सेवा अभिलेख में विधिवत दर्ज किया गया था। उनकी मृत्यु के तुरंत बाद, याचिकाकर्ता ने एनसीडब्ल्यूए के तहत परिकल्पित सामाजिक सुरक्षा योजना के अंतर्गत नियुक्ति के लिए आवेदन किया और सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए। हालांकि, प्रतिवादियों ने कोई ठोस या वैध कारण बताए बिना उनके मामले पर विचार करने से इनकार कर दिया, जो कि सरासर मनमाना और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।

क्या है औद्योगिक विवाद अधिनयम?

अधिवक्ता श्रीवास्तव ने तर्क दिया, सर्वविदित है कि औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 18(3) के अंतर्गत किया गया समझौता न केवल हस्ताक्षरकर्ताओं पर बल्कि सभी कामगारों और संबंधित नियोक्ता पर भी बाध्यकारी होता है, और ऐसे समझौते का वैधानिक बल होता है। इसलिए, प्रतिवादी कंपनी राष्ट्रीय विवाद अधिनियम (NCWA) के स्पष्ट प्रावधानों के विपरीत कार्य नहीं कर सकती। स्वीकृत पात्रता के बावजूद याचिकाकर्ता के आवेदन को अस्वीकार करना या उस पर विचार न करना बाध्यकारी समझौते का उल्लंघन है और रिट क्षेत्राधिकार के प्रयोग में इस पर हस्तक्षेप किया जा सकता है।

एसईसीएल की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने क्या कहा?

एसईसीएल की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता सुधीर कुमार वाजपेयी ने याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए तर्कों का पुरजोर विरोध किया और कहा कि यह रिट याचिका न तो विधिवत है और न ही तथ्यों के आधार पर तथा आरंभिक चरण में ही खारिज कर दी जानी चाहिए। याचिकाकर्ता के पास औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के अंतर्गत एक वैकल्पिक और प्रभावी उपाय उपलब्ध है। प्रतिवादी कंपनी उक्त अधिनियम के अर्थ में एक नियोक्ता है और याचिकाकर्ता की माता उसकी कर्मचारी थीं। रोजगार से संबंधित सेवा शर्तों या लाभों से जुड़े किसी भी विवाद की स्थिति में, याचिकाकर्ता के लिए उचित तरीका औद्योगिक विवाद अधिनियम के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी के अधिकार क्षेत्र का उपयोग करना था।

अधिनियम के अंतर्गत उपलब्ध वैधानिक उपाय का उपयोग किए बिना, याचिकाकर्ता ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत सीधे इस न्यायालय में याचिका दायर की है। यह तर्क दिया जाता है कि जहां एक प्रभावी वैकल्पिक उपाय मौजूद है, वहां रिट याचिका विचारणीय नहीं है, और इसलिए वर्तमान याचिका को केवल इसी आधार पर खारिज कर दिया जाना चाहिए।

अधिवक्ता वाजपेयी ने आगे कहा कि याचिका में घोर विलंब और लापरवाही है। यह स्वीकार किया जाता है कि याचिकाकर्ता की माता, स्व भगवानिया का देहांत 07 मई.2011 को हुआ था। याचिकाकर्ता ने 12.सितंबर 2011 को आश्रित रोजगार के लिए आवेदन किया था और 20. अप्रैल 2012 के एक तर्कसंगत कार्यालय आदेश द्वारा उसका दावा अस्वीकार कर दिया गया था। उक्त आदेश को 11 वर्षों से अधिक समय तक किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी गई और न ही किसी सक्षम प्राधिकारी के समक्ष चुनौती दी गई।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?

जस्टिस एके प्रसाद ने अपने फैसले में कहा है, योजना का उद्देश्य कर्मचारी की सेवारत मृत्यु होने पर शोक संतप्त परिवार को तत्काल सामाजिक-आर्थिक राहत प्रदान करना है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 12 के अंतर्गत "राज्य" होने के नाते, प्रतिवादी निष्पक्ष रूप से और बाध्यकारी समझौते के अनुरूप कार्य करने के लिए बाध्य हैं। प्रतिवादियों द्वारा याचिकाकर्ता को एनसीडब्ल्यूए के अंतर्गत परिकल्पित न किए गए किसी बाहरी आधार पर विचार करने से इनकार करना स्पष्ट रूप से मनमाना है, भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है, और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित और इस न्यायालय द्वारा पुष्ट कानून के विपरीत है।

आदेश की काॅपी प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर जारी करना होगा आदेश

कोर्ट ने कहा, 20 अप्रैल 2012 के आदेश द्वारा याचिकाकर्ता के आश्रित रोजगार के दावे को विचार न करने से संबंधित आदेश को निरस्त किया जाता है। प्रतिवादी अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि वे याचिकाकर्ता की माता की मृत्यु की तिथि पर लागू राष्ट्रीय राष्ट्रीय रोजगार अधिनियम NCWA के प्रावधानों के अनुसार आश्रित रोजगार प्रदान करने के लिए याचिकाकर्ता के आवेदन पर विचार करें और निर्णय लें, इस तथ्य से प्रभावित हुए बिना कि याचिकाकर्ता के पिता पहले से ही कार्यरत हैं। इस आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तिथि से 45 दिनों के भीतर एक तर्कसंगत और स्पष्ट आदेश पारित किया जाए।

याचिकाकर्ता ने SECL के इन अफसरों को बनाया था पक्षकार

  • साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक के माध्यम से, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, सीपत रोड, बिलासपुर, छत्तीसगढ़।
  • महाप्रबंधक, (कार्मिक/मानव संसाधन), साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, सीपत रोड, बिलासपुर, छत्तीसगढ़।
  • क्षेत्रीय महाप्रबंधक, दक्षिण पूर्वी कोयला क्षेत्र लिमिटेड, हसदेव क्षेत्र, डाकघर दक्षिण झगड़खंड, जिला कोरिया छत्तीसगढ़।
  • सब एरिया मैनेजर, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, राजनगर ओसीएम, पोस्ट ऑफिस राजनगर, जिला अनुपपुर (म.प्र.)।
  • वरिष्ठ प्रबंधक (कार्मिक), साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, राजनगर ओसीएम, पोस्ट ऑफिस राजनगर, जिला अनूपपुर।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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