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जिला अस्पतालों और CSC, PSC में प्रायवेट की तरह होगी पैथालॉजी जांच, सरकारी कंपनी से MOU, जानिये किस दिन से मिलेंगी ये सुविधा

छत्तीसगढ़ सरकार एक बड़ा काम करने जा रही है। एक अप्रैल से सरकारी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों में अब प्रायवेट की तरह पैथोलॉजी जांच की सुविधा शुरू होने जा रही है। इसके लिए सरकारी क्षेत्र की कंपनी से करार किया गया है। पता चला है, मुख्य सचिव विकास शील इसकी खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

जिला अस्पतालों और CSC, PSC में प्रायवेट की तरह होगी पैथालॉजी जांच, सरकारी कंपनी से MOU, जानिये किस दिन से मिलेंगी ये सुविधा
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इमेज सोर्स- NPG News

By Anjali Vaishnav

रायपुर।27 मार्च 2026| सरकारी अस्पतालों में रीएजेंट, मशीन और मैनपावर की कमी से पैथोलॉजी जांच अब प्रभावित नहीं होगी। अभी छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों की यही तस्वीर है। कहीं भी ढंग से खून, पेशाब समेत दीगर जांच नहीं हो पा रही। किसी अस्पताल में जांच मशीन है तो रीएजेंट नहीं, और रीएजेंट है तो मशीन नहीं, और कहीं दोनों है तो मैनपावर नहीं। और तीनों है तो जांच की क्वालिटी नहीं। इस वजह से छत्तीसगढ़ के अस्पतालों की व्यवस्था चरमरा गई है। अब जांच ही नहीं होगी तो डॉक्टर इलाज कैसे करेंगे।

जांच की व्यवस्था पटरी पर क्यों नहीं?

पिछली सरकार में 400 करोड़ के रीएजेंट घोटाले के बाद न हेल्थ विभाग और न सीजीएमएससी अब रीएजेंट खरीदने के लिए तैयार है। उपर से पेचीदिगियां भी काफी है। इस मामले में जेल की हवा खा रहे सप्लायर शाशांक चोपड़ा ने आटोमेटिक के नाम पर सेमिआटोमेटिक मशीनें सप्लाई कर दी, उपर से उसने साफ्टवेयर चेंज कर ऐसा सिस्टम बना दिया कि उसमें दूसरी कंपनी का रीएजेंट काम ही नहीं करेगा। याने चोपड़ा जो सप्लाई करता वहीं रीएजेंट उसमें काम आएगा। ये झोल इतना बड़ा है कि स्वास्थ्य विभाग के अफसर इसमें सक नहीं पा रहे। इसलिए, लफड़े से छुटकारा पाने के लिए प्रायवेट से करार करने का रास्ता निकाला गया।

सरकारी कंपनी से करार

राज्य सरकार अब इन झंझटों से मुक्ति पाने का तरीका ढूंढ लिया है। चीफ सिकरेट्री विकास शील छत्तीसगढ़ में सिकेट्री हेल्थ रहे हैं, भारत सरकार में भी वे चार साल तक नेशनल हेल्थ मिशन के प्रमुख रहे। इस वजह से उन्हें इन परिस्थितियों से निबटने का अनुभव है। उनके निर्देश पर हेल्थ डिपार्टमेंट ने पीएसयू याने सरकारी कंपनी एचएलएल लाइव केयर लिमिटेड के साथ एमओयू किया है।

प्रायवेट से उम्दा रिपोर्ट

एचएलएल लाइव केयर कंपनी प्रायवेट लेब की तरह फास्ट जांच करेगी और उससे अधिक विश्वसनीय उसकी रिपोर्ट होगी। कंपनी ने इसकी तैयारी कर ली है। पांचों संभागीय मुख्यालय में चेकिंग लेबोरेटरी बनाई जा रही है। चेकिंग इसलिए ताकि जांच रिपोर्ट को रैंडमली चेक किया जा सकें कि जांच ठीकठाक हो रही या नहीं। एक तरह से कहें तो यह उसका विलिजेंस सिस्टम होगा।।

मोबाइल पर जांच रिपोर्ट

पैथोलॉजी जांच के लिए जिलों में एडवांस लेबरोटरी बनाए जा रहे हैं। कंपनी सभी जिलों में अपना रनर रखेगी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से सेम्पल लेकर वह लेबोरेटरी में पहुंचाएगी और निर्धारित समय के भीतर जांच रिपोर्ट आपके मोबाइल पर आ जाएगी। इसके लिए जोमैटो और स्वीगी की तरह रनर रखे जो रहे, जो बिना देर किए सेंपल जिला मुख्यालयों में स्थित लेबोरेटरी तक पहुंचाएंगे।

एमओयू में कड़ी शर्तें

स्वास्थ्य विभाग और एचएलएल लाइव केयर लिमिटेड के साथ जो करार हुआ है, उसमें स्पष्ट है कि जहां सरकारी अस्पतालों में जांच मशीनें या मैनपावर हैं, वहां कंपनी उनका इस्तेमाल करेगी और उस हिसाब से पैसा काटा जाएगा। हालांकि, कंपनी के सर्वे में यह बात सामने आई है कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में सेमिआटोमेटिक मश्ीनें लगी हुई हैं, कंपनी अपना आटोमेटिक मशीनें लगा रखी है।

रायपुर में कंट्रोल सिस्टम

कंपनी रायपुर में कंट्रोल सिस्टम बनाई है। यहां 20 लोगों की डेटा टीम रहेगी, जो रोज सेंपल कलेक्शन के साथ ही किस जगह जांच में निर्धारित टाईम से कितना लेट हुआ, उसका ब्यौरा तैयार करेगी। ताकि, आगे इसे इंप्रूव किया जा सके।

एक अप्रैल से यह सेवा प्रारंभ

छत्तीसगढ़ में एक अप्रैल से यह सेवा प्रारंभ हो जाएगी। इसका नाम दिया गया है इंट्रीग्रेटेड पैथो टेस्ट। हेल्थ सिकेट्री अमित कटारिया ने आज इसका रिव्यू किया और निर्देश दिया कि प्रारंभिक चरण में इसे बस्तर से शुरू किया जाए। डायरेक्टर हेल्थ संजीव झा ने बताया कि विभाग की कोशिश होगी कि दो-तीन महीने के भीतर पूरे प्रदेश में यह सर्विस प्रारंभ हो जाए।

जानिये एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड के बारे में

एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है। इसकी शुरूआत 1966 में ’हिन्दुस्तान लेटेक्स लिमिटेड’ के रूप में हुई थी। इसके प्रमुख उत्पादः कंडोम (जैसे ’निरोध’), गर्भनिरोधक गोलियां (’सहेली’), सर्जिकल टांके, ब्लड बैग, और अन्य चिकित्सा उपकरण हैं। यह ’हिन्दलैब्स’ ब्रांड के तहत पैथोलॉजी लैब और इमेजिंग सेंटर भी संचालित करती है। हालांकि, भारत सरकार इसकी सौ प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने याने निजीकरण करने की तैयारी में है, जिसके लिए कई बोलियाँ प्राप्त हुई हैं। मार्च 2026 में, इसने चित्तरंजन नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया है।

Anjali Vaishnav

अंजली वैष्णव मैंने छत्तीसगढ़ के कल्याण कॉलेज भिलाई से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म करने के बाद रायपुर कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में M.sc Electronic Media की पढ़ाई की. इस दौरान मैने 2021 से TCP News, फिर TV 24 MPCG में बतौर कंटेट राइटर और बुलेटिन प्रोड्यूसर का कार्य किया, वर्तमान में मैं NPG.NEWS में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं, कंटेंट राइटिंग के साथ मुझे रिपोर्टिंग करना पसंद है.

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