Begin typing your search above and press return to search.

जशपुर के इस पहाड़ पर है आदि मानव की गुफा, आदिमकाल के शैल चित्रों के साथ मिली रहस्यमय आकृतियां

CG Aadimanav News: छत्तीसगढ़ के जशपुर में घने जंगल के बीच एक गुफा मिली है, माना जाता है कि वहां पर आदि मानव निवास करते थे। आदि मानव के वहां रहने के प्रमाण भी मिले हैं। इस गुफा में शैल चित्र बने हुए हैं, जिनकी ग्रामीण आज भी पूजा करते हैं।

जशपुर के इस पहाड़ पर है आदि मानव की गुफा, आदिमकाल के शैल चित्रों के साथ मिली रहस्यमय आकृतियां
X
By Gopal Rao

CG Aadimanav News: जशपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गृह जिले और आदिवासी बहुल इलाका जशपुर में पर्यटन की भारी संभावनाएं मौजूद हैं। यहां पर प्राकृतिक सुंदरता के अलावा कई स्थान ऐसे हैं, जो आज भी रहस्य समेटे हुए हैं। कुछ इसी तरह की गुफा जशपुर के ग्राम जयमरगा के गढ़पहाड़ में मिली है। इस गुफा में भीतर जाने पर प्रागैतिहासिक काल के आदिमकालीन शैलचित्र भी मिलते हैं।


इस रोमांच कर देने वाली गुफा तक जाना बहुत ज्यादा कठिन नहीं है। यह जरुर है कि घने जंगल से गुजरना पड़ता है। जशपुर से करीब 30 किमी दूर मनोरा विकासखंड के ग्राम जयमरगा तक सड़क के रास्ते आसानी से पहुंचा जा सकता है।


ग्राम पंचायत डड़गांव का आश्रित गांव है जयमरगा और इसकी आबादी करीब 1400 है। जयमरगा तक पहुंचने के बाद यहां की गढ़पहाड़ पर चढ़ना पड़ेगा। पहाड़ पर लगभग 300 मीटर तक चढ़ाई करने के बाद इस गुफा तक पहुंचा जा सकता है।


आदिम काल के लिए उपयुक्त जगह

पुरातत्त्ववेत्ता डॉ. अंशुमाला तिर्की और बालेश्वर कुमार बेसरा ने जानकारी दी है कि जयमरगा गांव इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां पर प्रागैतिहासिक स्थलों की भरमार है। इसका कारण यह है कि आदिम काल से ही आसपास पहाड़, जंगल और नदी है। प्राचीन काल में आजीविका के लिए यही तीन चीजों की आवश्यकता पड़ती थी। पहाड़ पर एक प्रागैतिहासिक शैलचित्र गुफा है, जहाँ मध्य पाषाण काल के उपकरण भी मिले हैं। शैलचित्र में मानव आकृतियाँ, पशु आकृतियाँ, ज्यामितीय आकृतियां बनी हुई हैं। इसके अलावा गुफा में कुछ अज्ञात आकृतियां लाल और सफेद रंग से बनी हुई हैं, जिसे आज भी पुरातत्ववेत्ता सुलझा नहीं सके हैं।


लोकेशन ऐसी कि शिकार करना आसान

खास बात यह है कि यह गुफा एक पहरेदारी की जगह जैसी प्रतीत होती है, जहाँ से प्रागैतिहासिक लोग शिकार के लिए जानवरों पर नजर रखते थे। यहाँ हेमाटाइट पत्थर भी पाया जाता है, जिसका उपयोग रंग बनाने में होता था। इन चित्रों में कुछ प्रारंभिक काल के हैं और कुछ बाद के। यहाँ बैल, तेंदुआ, हिरण और मानव आकृतियां बनी हुई हैं। गुफा के भीतर माइक्रोलिथिक उपकरण जैसे लुनैट, स्क्रैपर, पॉइंट, ट्रैपेज, साइड स्क्रैपर, ब्लेड आदि भी पाए जाते हैं, जो शिकार और अन्य कार्यों के लिए प्रयोग किए जाते थे।




Gopal Rao

गोपाल राव: रायपुर में ग्रेजुएशन करने के बाद पत्रकारिता को पेशा बनाया। विभिन्न मीडिया संस्थानों में डेस्क रिपोर्टिंग करने के बाद पिछले 11 सालों से NPG.NEWS से जुड़े हुए हैं। मूलतः रायपुर के रहने वाले हैं।

Read MoreRead Less

Next Story