इनसाइड स्टोरी: भवन अनुज्ञा में बड़ा खेला, पढ़िए निगम के अधिकारियों के साथ मिलकर कॉलोनाइजर ने कैसे किया, आवासीय को कमर्शियल में बदलने का खेला

Chhattisgarh News Hindi: रायपुर। छत्तीसगढ़ के नगर निगमों और नगरपालिकाओं में यह फर्जीवाड़ा बरसों से चल रहा है। निगम के अधिकारी खासकर भवन शाखा के अधिकारी और कॉलोनाइजर बिल्डर्स के बीच मिलीभगत आम बात है। राजनादगांव में इस तरह के एक बड़े फर्जीवाड़ा का खुलासा हुआ है। कॉलाेनाइजर ने पहले आवासीय प्रायोजन के तहत भवन शाखा से अनुमति ले ली, आवासीय अनुज्ञा को फिर धीरे से व्यवसायिक में तब्दील करा लिया। इस खेल में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के जेडी से लेकर डिप्टी डायरेक्टर और नगर निगम के अफसरों के संगठित गिरोह ने फर्जीवाड़ा को अंजाम दिया है। सरकारी खजाने को इन अफसरों और कॉलोनाइजर ने मिलकर लाखों का चूना लगाया है।
बता दें, आवासीय को कमर्शियल में तब्दील कराने के बाद कॉम्पलेक्स तानने का काम तकरीबन पूरा भी हो गया है। फर्जीवाड़ा को अंजाम देने वाले अफसरों ने आंखें बंद कर ली। अगर इस फर्जीवाड़े की शिकायत नहीं होती तो फाइल नगर निगम राजनादगांव और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के ऑफिस में दबकर दफन हो जाती। अफसरों ने कम से कम यह इंतजाम कर ही लिया था। शिकायत के बाद संचालनालय नगर तथा ग्राम निवेश विभाग ने इसे गंभीरता से लिया और जांच कमेटी बनाकर जांच कराने का निर्देश दिया। जांच में चौंकाने वाली बातें और फर्जीवाड़े को किस शातिरानाअंदाज में अंजाम दिया गया है, विस्तृत खुलासा किया गया है।
दोषी अफसरों से रिकवरी की सिफारिश
जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है, दोषी अफसरों ने कॉलोनाइजर से मिलीभगत कर सरकारी खजाने को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया है। नुकसान की भरपाई के लिए दोषी अफसरों से रिकवरी की सिफारिश सरकार से की है।
सिलसिलेवार जानिए क्या है मामला?
शिकायतकर्ता गुरविंदर सिंह चड्डा द्वारा, सत्यम परिवेश, विस्तार आईएनसी. ग्राम नंदई पटवारी हल्का नंबर -41. तहसील व जिला राजनांदगाव स्थित भूमि कुल खसरा 28 कुल रकबा 2.9011 हेक्टेयर पर आवासीय (भू-खण्डीय विकास) हेतु जारी विकास अनुज्ञा के संबंध में विभिन्न विसंगतियों का उल्लेख करते हुए शिकायत प्रस्तुत की गई थी।
संचालनालय ने बनाई जांच कमेटी
शिकायत की जांच हेतु संचालनालय के 20 नवंबर 2025 के आदेश द्वारा रोजी सिन्हा, उप संचालक, संचालनालय नगर तथा ग्राम निवेश की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन किया गया है, जिसमें रोहित गुप्ता, सहायक संचालक, प्रतीक दीक्षित, सहायक संचालक, आलोक त्रिपाठी, सहायक संचालक को जांच दल के सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
पढ़िए समिति की जांच रिपोर्ट में क्या है?
नगर पालिक निगम राजनांदगांव द्वारा आवासीय भू-उपयोग में वाणिज्यक सह आवासीय उपयोग हेतु भवन अनुज्ञा प्रदाय की गई है, जो कि विधिसंगत नही है। उक्त आवासीय कॉलोनी में भवन अधिकारी नगर पालिक निगम राजनांदगांव द्वारा प्रदत्त ऐसे समस्त भवन अनुज्ञा जो कि वाणिज्यिक सह आवासीय प्रयोजन हेतु प्रदाय किये गये है, को छ.ग. भूम विकास नियम 1984 के नियम 25 के तहत प्रतिसंहरण किया जाना उचित होगा।
प्रकरण में विकास अनुज्ञा शतों का उल्लंघन कर भवन अनुज्ञा प्राप्त कर निर्माण कार्य किया गया है, अतः विकास अनुज्ञा शर्त क्रमांक 28 के अनुसार कार्यालय उप संचालक नगर तथा ग्राम निवेष राजनांदगांव के द्वारा 21 जून 2022 को प्रदाय की गई विकास अनुज्ञा को छ.ग. भूम विकास नियम 1984 के नियम 25 के तहत प्रतिसंहरण किया जाना उचित होगा।
कार्यालय उप संचालक, नगर तथा ग्राम निवेष, राजनांदगांव, के 21 जून 2022 को जारी पत्र के द्वारा छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 30 (3) एवं छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 के नियम 27 के तहत प्रदाय की गई विकास अनुज्ञा के उपबन्धों का उल्लंघन हुआ है। अतः उक्त आवासीय कॉलोनी के वाणिज्यिक सह आवासीय भवनों को एवं निर्माणाधीन वाणिज्यिक सह आवासीय भवनों को छ.ग. भूमि विकास नियम 1984 के नियम 34 (4) के तहत सील किया जाना उचित होगा।
जारी विकास अनुज्ञा के उल्लंघन के संबंध में छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 37 के अंतर्गत कार्यवाही किया जाना उचित होगा।
सूर्यभान सिंह ठाकुर, तत्कालीन उप संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश, राजनांदगाव ने किया फर्जीवाड़ा
जांच में यह पाया गया है कि यह प्रकरण कार्यालय में आवक क्रमांक 632, 27 मार्च 2020 पर पंजीबद्ध नहीं हुआ है।
प्रकरण संज्ञान में आने के पश्चात भी किसी प्रकार की कार्यवाही अथवा रोके जाने हेतु नगर पालिक निगम राजनांदगाव एवं संचालनालय नगर तथा ग्राम निवेश को लेख ना किये जाने। उपरोक्त के दृष्टिगत कारण बताओ सूचना जारी कर स्पष्टीकरण प्राप्त किया जाना उचित होगा, कि उनके द्वारा उप संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश के कर्तव्यों के निर्वहन में की गई लापरवाही एवं गैर जिम्मेदाराना रवैये के दृष्टिगत क्यों ना उनके विरुद्ध छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के अंतर्गत कार्यवाही प्रस्तावित की जावे।
कमला सिंह. वर्तमान उप संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश, राजनांदगाव ने ऐसे की गड़बड़ी
प्रकरण संज्ञान में आने के पश्चात भी किसी प्रकार की कार्यवाही अथवा रोके जाने हेतु, नगर पालिक निगम राजनांदगाव एवं संचालनालय नगर तथा ग्राम निवेश को लेख ना किये जाने के कारण उनके द्वारा उप संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश के कर्तव्यों के निर्वहन में की गई लापरवाही एवं गैर जिम्मेदाराना रवैया।
कमला सिंह द्वारा जांच में सहयोग नही किया गया एवं प्रकरण की मूल नस्ती प्रदाय नही की गई। उक्त के संबंध में दिनांक 28 नवंबर 2025 को कार्यालय उप संचालक नगर तथा ग्राम निवेष राजनांदगांव में मेमो प्रदाय किया गया था, किन्तु इस संबंध में आज दिनांक तक कोई भी जानकारी प्रदाय नहीं की गई है। कमला सिंह द्वारा यह लेख किया जाना कि, स्वीकार्य भूमि उपयोग हेतु अनुमति देने हेतु आयुक्त, नगर पालिक निगम, अपने निगम क्षेत्र में सक्षम अधिकारी हैं एवं किसी प्रकार की स्वीकृत अनुज्ञा के अनुसार किये गये निमार्ण में अधिनियम की धारा 37 लागू नहीं होती। उनके अधिनियम, नियम, संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश एवं शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के प्रति अज्ञानता को दर्शाता है।
एक ही प्रकरण पर अलग-अलग अभिमत व दो अलग-अलग जांच प्रतिवेदनों पर हस्ताक्षर
कमला सिंह द्वारा हस्ताक्षरित संयुक्त कलेक्टर के जांच प्रतिवेदन, जिसमे यह उल्लेखित है कि स्वीकार्य भू उपयोग की अनुमति देने हेतु आयुक्त नगर पालिक निगम अपने निगम क्षेत्र में सक्षम अधिकारी नहीं है एवं उक्त प्रकरण में राज्य स्तर से नगर तथा ग्राम निवेष छ.ग. के सक्षम अधिकारी की टीम के द्वारा जांच कराया जाकर छ.ग. नगर तथा ग्राम निवेष अधिनियम 1973 की धारा 36,37 के अनुसार कार्यवाही किया जाना उचित होगा, से यह स्पष्ट है कि उनके द्वारा उक्त त्रुटि जानबूझकर की गई है।
कमला सिंह द्वारा एक ही प्रकरण पर भिन्न-भिन्न अभिमत दिया एवं उनके द्वारा दो भिन्न-भिन्न जांच प्रतिवेदनों पर हस्ताक्षर किया जाना जालसाजी का प्रकरण है एवं इससे उनकी प्रकरण में सहभागिता लक्षित होती है। उपरोक्त के दृष्टिगत उनके विरुद्ध छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के अंतर्गत नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही प्रस्तावित की जावे।
भवन अधिकारी ने किया फर्जीवाड़ा, कमेटी ने की कार्रवाई की अनुशंसा
भवन अधिकारी नगर पालिक निगम राजनांदगांव द्वारा त्रुटिपूर्ण भवन निर्माण अनुज्ञाएं जारी की गई है, जो प्रचलित नियमों व अधिनियमों के विरूध्द है। भवन अधिकारी नगर पालिक निगम राजनांदगांव द्वारा द्वारा आवासीय भू-उपयोग में अनधिकृत परिवर्तन कर वाणिज्यक सह आवासीय उपयोग हेतु भवन अनुज्ञा प्रदाय की गई है, जो कि विधिसंगत नही है। भवन अधिकारी नगर पालिक निगम राजनांदगांव के विरुद्ध सुसंगत नियम / अधिनियम के तहत कार्यवाही किये जाने हेतु नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को लेख किया जाना प्रस्तावित है।
सरकारी खजाने को पहुंचाया नुकसान, दोषी अधिकारी वक कर्मचारी से करे रिकवरी
आवासीय भूखण्डों पर वाणिज्यक सह आवासीय प्रयोजन हेतु भवन अनुज्ञा प्रदाय किये जाने से शासन को स्टाम्प एवं पंजीयन पुल्क में, भू व्यपवर्तन, पुर्ननिधारण में, रेरा के पंजीयन में राजस्व की हानि हुई है। अतः जो राजस्व की हानि शासन को हुई है. वह दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों से वसूली किया जाना प्रस्तावित है।
कॉलोनाइजर पर कार्रवाई की सिफारिश
विकासकर्ता,कॉलोनाइजर द्वारा छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 के नियम 31-कके अंतर्गत अपने उत्तरदायित्वों एवं कर्तव्यों का निर्वहन ठीक से नहीं किया गया, जिसके कारण कॉलोनी में स्वीकृत विकास अनुज्ञा के विरुद्ध भवन अनुज्ञा प्राप्त कर व्यावसायिक संरचनाओं का निर्माण किया गया/किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त कॉलोनाइजर द्वारा छत्तीसगढ़ नगर पालिका (कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण, निर्बंधन तथा शर्ते) नियम, 2013 एवं स्वीकृत अभिन्यास के विपरीत निम्न आय वर्ग के भूखंडों का प्रावधान एवं निर्माण किया गया है।
अतः कॉलोनाइजर के विरुद्ध छत्तीसगढ़ नगर पालिका (कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण, निर्बंधन तथा शर्ते) नियम, 2013 के अंतर्गत नियमनुसार कार्यवाही किये जाने हेतु, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को लेख किया जाना प्रस्तावित है।
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