Bilaspur High Court News: पत्नी की ट्रांसफर याचिका: हाई कोर्ट ने दुर्ग में चल रहे तीनों मामलों को कोंडागांव कोर्ट में स्थानांतरित करने जारी किया आदेश
Bilaspur High Court News: पति-पत्नी के बीच दुर्ग के अदालत में तीन मामले चल रहे हैं। तीनों की अलग-अलग तिथियों में सुनवाई होती है। याचिकाकर्ता महिला नारायणपुर से दुर्ग आती है। नारायणपुर से दुर्ग की दूरी लगभग 195 किलोमीटर है। आर्थिक और व्यवहारिक दिक्कतों का हवाला देते हुए हाई कोर्ट में ट्रांसफर याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने तीनों मामले को दुर्ग से कोंडागांव कोर्ट स्थानांतरित करने का आदेश रजिस्ट्रार जनरल को जारी किया है।

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बिलासपुर। पत्नी ने पति के खिलाफ दो मामले दायर किया है। भरण-पोषण के अलावा घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया है। पति ने फैमिली कोर्ट में हिदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए याचिका दायर की है। तीनों मामलों की सुनवाई दुर्ग के अलग-अलग कोर्ट में चल रही है।
याचिकाकर्ता पत्नी नारायणपुर से दुर्ग आती है। आने-जाने में हो रही दिक्कतों के अलावा आर्थिक कठिनाइयों का हवाला देते हुए हाई कोर्ट में ट्रांसफर याचिका दायर कर सभी तीनों मामलों में कोंडागांव कोर्ट में तबादला करने की मांग की थी। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के सिंगल बेंच में हुई। याचिका की सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस ने तीनों मामलों को दुर्ग के कोर्ट से कोंडागांव कोर्ट में स्थानांतरण करने का आदेश जारी किया है।
क्या है मामला
याचिकाकर्ता महिला का विवाह 21 अप्रैल 2022 को नारायणपुर जिले में हिदू रीति-रिवाज से हुआ था। विवाह के बाद वह अपने पति के साथ छत्तीसगढ़ के चरौदा, भिलाई ससुराल आ गई। याचिका के अनुसार विवाह के समय माता-पिता द्वारा भरपूर दहेज दिया थ। इसके बाद बाद पति और उसके घर वाले दहेज को लेकर सुनाते थे और उनका व्यवहार भी ठीक नहीं था।
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में यह भी आरोप लगाया कि पति गंभीर हृदय रोग और हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित है। पति की बीमारी को उसके माता पिता और परिजनों ने शादी के वक्त जानबुझकर छिपाया। याचिका के अनुसार 6 अक्टूबर 2023 को पति व उसके परिजनों ने उसके साथ मारपीट की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। इसी अवस्था में उसे ससुराल से निकाल दिया गया। इसके बाद वह अपने मायके नारायणपुर में रह रही है।
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते रहे अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता बेरोजगार गृहिणी हैं। आय का कोई स्थाई जरिया नहीं है। याचिकाकर्ता की मां कैंसर से पीड़ित हैं, जिनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी उसी पर है। अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया, नारायणपुर से दुर्ग की दूरी लगभग 195 किलोमीटर है। हर पेशी में दुर्ग आने-जाने में आर्थिक और शारीरिक कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
निजी वाहन का किराया 6 हजार रुपये पड़ता है और ट्रेन सेवाएं भी अनियमित हैं। अधिवक्ता ने तीनों मामलों को कोंडागांव के अदालत में ट्रांसफर करने की मांग की। मामले के ट्रांसफर होने की स्थिति में कोंडागांव में सुनवाई होने पर याचिकाकर्ता के पति आने-जाने में आर्थिक रूप से सक्षम है। उनका पोल्ट्री का व्यवसाय है और तकरीबन 60 हजार रुपये मासिक आय अर्जित करते हैं।
मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक मामलों में स्थानांतरण याचिका पर निर्णय लेते समय पत्नी की सुविधा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए सिंगल बेंच ने कहा, महिला पक्ष को अनावश्यक कठिनाई से बचाना न्यायोचित है। इस टिप्पणी के साथ हाई कोर्ट ने तीनों मामलों को दुर्ग के कोर्ट से कोंडागांव कोर्ट में स्थानांतरित करने का आदेश जारी कर दिया है।
