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रायपुर में इतिहास और पत्रकारिता का अद्भुत संगम: डॉ. लोकेश शरण की 'क्रांतिकारी धाराएं' का विमोचन, विद्वानों ने कहा- "यह स्थापित अनुमानों को चुनौती है"

रायपुर में डॉ. लोकेश शरण की पुस्तक "भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की क्रांतिकारी धाराएं" का विमोचन। डॉ. पूर्णेंदु सक्सेना ने कहा- 'वंदे मातरम्' से बड़ी तोप अंग्रेजों के पास नहीं थी। जानें क्रांतिकारी इतिहास पर हुए इस विमर्श की खास बातें।

रायपुर में इतिहास और पत्रकारिता का अद्भुत संगम: डॉ. लोकेश शरण की क्रांतिकारी धाराएं का विमोचन, विद्वानों ने कहा- यह स्थापित अनुमानों को चुनौती है
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By Ragib Asim

रायपुर 23 फरवरी 2026। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी अध्यायों को नए सिरे से सामने लाने वाली पुस्तक "भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की क्रांतिकारी धाराएं" का विमोचन रायपुर के वृंदावन हॉल, सिविल लाइन में हुआ। श्लोक ध्वनि फाउंडेशन और अखिल भारतीय साहित्य परिषद के संयुक्त आयोजन में यह समारोह संपन्न हुआ। पुस्तक के लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं शोधकर्ता डॉ. लोकेश शरण हैं। कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम् गायन से हुई जिसने पूरे वातावरण को राष्ट्रीय भाव से भर दिया।

पुस्तक क्यों लिखी- लेखक की जुबानी

डॉ. लोकेश शरण ने बताया कि बचपन से ही क्रांतिकारियों की कहानियों से उनका गहरा लगाव रहा है। शिक्षकों की प्रेरणा और पत्रकारिता के वर्षों के अनुभव ने इस शोध को आकार दिया। उनके पुत्र ने भी उन्हें इस पुस्तक को लिखने के लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने कहा कि क्रांतिकारियों का इतिहास अब तक न तो पूरी तरह सामने आया है और न ही सही ढंग से प्रस्तुत किया गया है। पाठ्यपुस्तकों और मुख्यधारा के इतिहास लेखन में इन धाराओं को जो स्थान मिलना चाहिए था वह नहीं मिला। यह पुस्तक उसी कमी को दूर करने का प्रयास है।

डॉ. शरण ने छत्तीसगढ़ सहित देश के कई हिस्सों में जाकर मैदानी शोध किया। प्राथमिक स्रोतों, स्थानीय दस्तावेजों और क्षेत्रीय साक्ष्यों के आधार पर तैयार यह पुसस्तक केवल संकलन नहीं बल्कि मौलिक शोधकार्य का परिणाम है।



वंदे मातरम् सबसे बड़ा हथियार था

मुख्य अतिथि डॉ. पूर्णेंदु सक्सेना ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम केवल एक राजनीतिक आंदोलन नहीं था यह पूरे देश को जोड़ने वाली शक्ति थी। उन्होंने कहा कि इस संग्राम की जड़ें हमारी मिट्टी में हैं जहाँ अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों ने अपने स्तर पर लड़ाई लड़ी। वंदे मातरम् की शक्ति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह गीत अंग्रेजों के विरुद्ध सबसे प्रभावी प्रेरक शक्ति था। उन्होंने यह भी कहा कि "वंदे मातरम् से बड़ी तोप अंग्रेजों के पास नहीं थी।"

डॉ. पूर्णेंदु सक्सेना ने कहा कि किसी साधक द्वारा किया गया क्षणिक कार्य भी युगों तक अपना प्रभाव छोड़ता है। क्रांतिकारियों के बलिदान को केवल इतिहास की घटना नहीं बल्कि जीवन का अंग बनाना चाहिए।

विद्वानों ने क्या कहा?

डॉ. वंश गोपाल

डॉ. वंश गोपाल ने कहा कि डॉ. लोकेश शरण में शोधार्थियों से भी अधिक जिज्ञासा और लगन देखी है। कई स्थानों पर जाकर शोध करना अत्यंत कठिन काम है लेकिन लेखक ने यह किया। उन्होंने कहा कि पुस्तक का नाम और कवर पेज ही पाठक को रोमांचित कर देते हैं।

उनके अनुसार इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे पढ़ने के लिए इतिहास का विद्यार्थी होना जरूरी नहीं। इसमें इतिहासकार और पत्रकार दोनों की शैली का अद्भुत संयोग है जो इसे आम पाठक तक सहज पहुँचाता है।

शशांक शर्मा

शशांक शर्मा ने कहा कि लेखक ने विषय की परंपरागत सीमाओं से आगे बढ़कर नया दृष्टिकोण दिया है। उन्होंने विशेष रूप से चौरी-चौरा कांड पर लिखे पाँच पृष्ठों की प्रशंसा की और कहा कि यह प्रसंग इतनी गहराई और तथ्यपरकता से पहले कम ही लिखा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि क्रांतिकारी इतिहास को जानबूझकर अधूरा रखा गया जबकि यह पुस्तक तथ्यों के आधार पर सच्चाई सामने रखती है।

डॉ. ए.डी.एन. वाजपेयी

डॉ. ए.डी.एन. वाजपेयी ने कहा कि यह पुस्तक स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े कई स्थापित अनुमानों को चुनौती देती है। यह इतिहास की अलग-अलग धाराओं को जोड़ने वाला काम है। उन्होंने कहा कि डॉ. लोकेश शरण इस कृति के माध्यम से भारत के महत्वपूर्ण इतिहासकारों में अपना स्थान बनाएंगे।

प्रश्न-उत्तर सत्र

कार्यक्रम में एक विशेष प्रश्न-उत्तर सत्र भी हुआ जिसमें उपस्थित शोधार्थियों, पत्रकारों और साहित्यप्रेमियों ने लेखक से सीधे सवाल किए। डॉ. लोकेश शरण ने शोध के स्रोतों, प्राथमिक सामग्री की प्रमाणिकता और छत्तीसगढ़ में क्रांतिकारी आंदोलन की स्थानीय धाराओं पर विस्तार से उत्तर दिए। इस संवाद ने पुस्तक की वैचारिक गहराई को और स्पष्ट किया।

कार्यक्रम का संचालन और उपस्थित गणमान्य

कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार डॉ. विश्वेश ठाकरे ने किया। आभार प्रदर्शन श्लोक ध्वनि फाउंडेशन के संस्थापक सदस्य श्री कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि यह केवल पुस्तक विमोचन नहीं बल्कि क्रांतिकारी चेतना के पुनर्स्मरण का अवसर है जो नई पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति और इतिहासबोध की दिशा में प्रेरित करेगा।

इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख हस्तियों में शामिल थे इतिहासकार एवं पुरातत्वविद डॉ. रमेंद्र नाथ मिश्र, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा, आकाशवाणी रायपुर से महेंद्र साहू, वरिष्ठ पत्रकार वैभव बेमेतरिहा, शिव प्रसाद मिश्रा, तथा श्लोक ध्वनि फाउंडेशन के सुमित शर्मा, अनिल तिवारी, नितेश पाटकर एवं भुनेश्वरी जायसवाल।


डिस्क्लेमर: यह खबर प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। NPG News ने इसे केवल अखबारी शैली में संपादित एवं प्रकाशित किया है। इसमें व्यक्त विचार संबंधित पक्ष के हैं।

Ragib Asim

Ragib Asim is a seasoned News Editor at NPG News with 15+ years of excellence in print, TV, and digital journalism. A specialist in Bureaucracy, Politics, and Governance, he bridges the gap between traditional reporting and modern SEO strategy (8+ years of expertise). An alumnus of Jamia Millia Islamia and Delhi University, Ragib is known for his deep analytical coverage of Chhattisgarh’s MP administrative landscape and policy shifts. Contact: [email protected]

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