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CM Vishnudeo Sai: सहकारिता से आत्मनिर्भरता की ओर, मुख्यमंत्री विष्णु देव के नेतृत्व में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई दिशा

CM Vishnudeo Sai: छत्तीसगढ़ में सहकारिता आंदोलन ने बीते वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य की 11,650 ग्राम पंचायतों में वर्तमान में 6,063 सहकारी समितियाँ सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। इनमें 2,058 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियाँ, 1,949 दुग्ध, 1,002 मत्स्य और 1,054 लघु वनोपज सहकारी समितियाँ शामिल हैं।

CM Vishnudeo Sai: सहकारिता से आत्मनिर्भरता की ओर, मुख्यमंत्री विष्णु देव के नेतृत्व में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई दिशा
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By Sandeep Kumar

CM Vishnudeo Sai: संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष 2025 को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किया जाना इस बात का वैश्विक स्वीकार है कि सहकारिता केवल आर्थिक व्यवस्था नहीं, बल्कि समावेशी और टिकाऊ विकास का सशक्त माध्यम है। यह वर्ष गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में सहकारी संस्थाओं की भूमिका को रेखांकित करता है। भारत सरकार ने इस दिशा में एक निर्णायक कदम वर्ष 2021 में स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय की स्थापना कर उठाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता आंदोलन को ग्राम पंचायत स्तर तक विस्तार देने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि किसान, पशुपालक और ग्रामीण समुदाय सीधे इससे लाभान्वित हो सकें।

छत्तीसगढ़ में सहकारिता का विस्तार और मजबूती

छत्तीसगढ़ में सहकारिता आंदोलन ने बीते वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य की 11,650 ग्राम पंचायतों में वर्तमान में 6,063 सहकारी समितियाँ सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। इनमें 2,058 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियाँ, 1,949 दुग्ध, 1,002 मत्स्य और 1,054 लघु वनोपज सहकारी समितियाँ शामिल हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और सहकारिता मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में 760 नई समितियों का गठन किया गया है, जिनमें मत्स्य, दुग्ध और लघु वनोपज समितियाँ प्रमुख हैं।

राज्य गठन के समय जहां सहकारी समितियों की संख्या सीमित थी, वहीं आज यह नेटवर्क ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। सहकारिता के माध्यम से किसानों को ऋण, बीज, खाद, कीटनाशक और विपणन जैसी सुविधाएँ एक ही मंच पर उपलब्ध हो रही हैं। वर्तमान में सहकारी समितियों के कुल सदस्य 30 लाख से अधिक हैं, जिनमें बड़ी संख्या किसान क्रेडिट कार्ड धारकों की है। इससे कृषि कार्यों में समय पर निवेश और जोखिम प्रबंधन संभव हो पाया है।

कृषि ऋण, डिजिटलीकरण और पारदर्शिता

राज्य में छह जिला सहकारी केंद्रीय बैंक संचालित हैं, जिनकी 345 शाखाएँ किसानों को वित्तीय सेवाएँ उपलब्ध करा रही हैं। इनमें अधिकांश शाखाएँ कम्प्यूटरीकृत हो चुकी हैं। सहकारी समितियों के डिजिटलीकरण से ई पैक्स प्रणाली लागू की गई है, जिससे खातों, ऋण विवरण और ब्याज गणना में पारदर्शिता आई है। किसानों को अब रियल टाइम जानकारी मिल रही है और भरोसे का वातावरण मजबूत हुआ है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों को पांच लाख रुपये तक शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण की सुविधा दी जा रही है। पशुपालन, मत्स्य पालन और लघु उद्योगों के लिए भी रियायती ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक लाखों किसानों को हजारों करोड़ रुपये का कृषि ऋण वितरित किया जा चुका है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिली है।

धान खरीदी और किसान केंद्रित नवाचार

धान खरीदी के क्षेत्र में सहकारी समितियों की भूमिका निर्णायक रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बड़े पैमाने पर धान खरीदी कर किसानों को समयबद्ध भुगतान किया गया है। एग्रीस्टेग पोर्टल और किसान आईडी के माध्यम से भूमि, फसल, बैंक और योजनाओं की जानकारी एकीकृत होने से बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और लाभ सीधे किसानों तक पहुंच रहा है। कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ में सहकारिता आंदोलन अब केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की दिशा में एक मजबूत आधार बन चुका है। यह मॉडल ग्रामीण विकास, पारदर्शिता और समावेशी समृद्धि की नई राह दिखा रहा है।

कोरबा में 41 लैम्प्स समितियों के माध्यम से किसानों को मिल रही हैं आधुनिक सुविधाएं

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंशानुरूप जिले में सहकारिता विभाग द्वारा किसानों के उत्थान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। वर्तमान में कोरबा जिले के अंतर्गत कुल 41 लैम्प्स समितियां संचालित हैं, जो खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत धान खरीदी के साथ-साथ किसानों को बैंकिंग और अन्य डिजिटल सेवाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। जिले में धान विक्रय हेतु 52,556 किसान पंजीकृत हैं एवं कुल पंजीकृत धान का रकबा 68656.57 हेक्टेयर है। इनमें सीमांत कृषक 24473, लघु कृषक 25653 एवं दीर्घ कृषक 2430 है। जिनके सुगम कार्य निष्पादन हेतु सभी 41 लैम्प्स में माइक्रो एटीएम स्थापित किए गए हैं, जिससे किसान अपनी आवश्यकतानुसार नगद राशि का आहरण कर पा रहे हैं। जिले के 41 लैम्प्स द्वारा राष्ट्रीय सहकारी समितियां भारतीय बीज सहकारी समिति, भारतीय सहकारी आर्गेनिक लिमिटेड, राष्ट्रीय सहकारी निर्यात समिति, राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ की सदस्यता ग्रहण कर ली। साथ ही राष्ट्रीय सहकारी कृषि संघ नाफेड की सदस्यता ग्रहण की प्रकियाधीन है। इन 41 लैम्प्स में खाद वितरण, बीज वितरण, ऋण वितरण, पीडीएस दुकान का संचालन, उज्जवला एलपीजी गैस वितरण का कार्य संचालित है।

ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं के विस्तार हेतु जिले के सभी लैम्प्स को कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) और ई-डिस्ट्रिक्ट आईडी से जोड़ दिया गया है, जिससे अब ग्रामीणों को प्रमाण पत्र, लाइसेंस और अन्य सरकारी सेवाओं के लिए शहर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। केंद्र शासन की पैक्स कंप्यूटराइजेशन योजना के तहत जिले के 30 लैम्प्स को ई-पैक्स घोषित किया जा चुका है और शेष 11 समितियों को डिजिटल करने की प्रक्रिया तेजी से जारी है।

सहकारिता के क्षेत्र में कोरबा जिले को एक नई पहचान दिलाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा नवीन योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। पैक्स समितियों के पुनर्गठन योजना 2025 के अंतर्गत जिले में 19 नवीन लैम्प्स का गठन किया गया है। नवगठित लैम्प्स को कार्यशील बनाए जाने हेतु समयबद्ध योजना शासन द्वारा तैयार की गई है।

इसके अतिरिक्त, ’सहकार से समृद्धि योजना’ के तहत जिले की सभी 412 ग्राम पंचायतों को सहकारी समितियों से आच्छादित करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में 150 ग्राम पंचायतें विभिन्न समितियों से जुड़ी हैं, जबकि शेष 162 पंचायतों में मत्स्य, दुग्ध, वनोपज सम्बंधित विभाग से समन्वय स्थापित कर नई समितियों के पंजीयन की प्रक्रिया प्रस्तावित है।

दुर्गम क्षेत्रों के ग्रामीणों को राहत पहुंचाने के लिए लैम्प्स कोरबा में एचपीसीएल और लैम्प्स पोड़ी में आईओसीएल के माध्यम से प्रधानमंत्री उज्जवला योजना अंतर्गत एलपीजी गैस वितरण का कार्य भी सफलतापूर्वक किया जा रहा है। इसी कड़ी में, विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना के अंतर्गत लैम्प्स तिलकेजा का चयन प्रस्तावित है, जहां लगभग 1.44 करोड़ रुपये की लागत से 2500 मीट्रिक टन क्षमता का गोदाम निर्मित किया जाएगा। जिले की इन उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की समीक्षा के लिए हाल ही में विभागीय बैठकों का आयोजन किया गया, जिसमें 19 नवगठित पैक्स के कंप्यूटराइजेशन का प्रस्ताव भी पारित किया गया है। इन प्रयासों से जिले में सहकारिता को नई मजबूती मिल रही है।

सारंगढ़ बिलाईगढ़ में रबी मौसम में 1800 किसान 1200 एकड़ में नहीं लेंगे धान का फसल

कलेक्टर डॉ संजय कन्नौजे के निर्देश पर कृषि उप संचालक आशुतोष श्रीवास्तव और अधीनस्थ मैदानी अधिकारी कर्मचारी ने जिले के तीनों ब्लाकों के किसानों को ग्रीष्मकालीन धान के बदले अन्य फसलों को लगाने के लिए प्रेरित किया, जिससे प्रेरित होकर लगभग 1800 किसानों ने 1200 एकड़ में गेहूं, मक्का, चना, मटर, मूंग, उड़द, मसूर सरसों, मूंगफली सूरजमुखी, तिवरा, सब्जी भाजी, पाम तेल व अन्य लघु धान्य फसल की है।

जिले में बढ़ती जल समस्या को दृष्टिगत रखते हुए कृषकों ने इस वर्ष फसल विविधीकरण एवं फसल चक्र के वैज्ञानिक सिद्धांतों को अपनाते हुए सराहनीय पहल की है। कृषकों ने ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती को प्राथमिकता दी है । यह नवाचार कलेक्टर डॉ संजय कन्नौजे के मार्गदर्शन एवं कृषि विभाग के सतत समन्वय से सफलतापूर्वक क्रियान्वित हो सका है।

किसानों में उत्साह

कृषि उपसंचालक श्रीवास्तव ने कहा कि शासन ने कृषकों को उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराए हैं। तकनीकी मार्गदर्शन, फसल बीमा का प्रावधान एवं उत्पाद के विपणन की समुचित व्यवस्था की है। बीज निगम में बिक्री के लिए पंजीयन एवं सहकारी समितियों के माध्यम से फसल विक्रय की सुविधा प्रदान करने से किसानों का उत्साह बढ़ा है। गेहूं की खेती के साथ साथ कृषकों ने सरसों, चना, गेहूं, तिल, लाखड़ी एवं साग-सब्जियों की खेती अपनाई है। इसके अतिरिक्त जो किसान पूर्व में अपने खेतों को खाली छोड़ देते थे उन्होंने भी इस वर्ष दलहन एवं तिलहन फसलों के अंतर्गत क्षेत्र विस्तार कर उत्पादन में सहभागिता निभाई है।

बीज अंकुरण संतोषजनक

जिले के प्रगतिशील किसानों ने बताया कि शासन से मिले बीजों का अंकुरण संतोषजनक है। फसलों से अच्छे उत्पादन की पूर्ण आशा है। फसल बीमा की सुरक्षा एवं सुनिश्चित आर्थिक स्थिरता एवं आत्मविश्वास प्राप्त हुआ है। बरमकेला विकासखंड के 975 किसानों के द्वारा लगभग 502 एकड़ खेत में धान की बजाय अन्य दलहन फसल की खेती की है।

जल संरक्षण के साथ आय में भी सहायक

जिले के सारंगढ़ विकासखंड , बरमकेला विकासखंड और बिलाईगढ़ विकासखंड के कृषकों का मानना है कि यह पहल जल संरक्षण के साथ आय संवर्धन की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने आने वाले वर्षों में भी इन्हीं फसलों को अपनाकर सतत एवं टिकाऊ कृषि पद्धति को आगे बढ़ाने की बात कही।

उप संचालक कृषि आशुतोष श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि सारंगढ़ ब्लॉक में 649 किसानों के द्वारा लगभग 437 एकड़ जमीन में दूसरी फसल धान के बदले गेहूं , मक्का, चना, मटर , मूंग की खेती किए हैं, वही बरमकेला विकासखंड में 501 एकड़ से अधिक जमीन में 975 किसानों के द्वारा लघु धान्य की खेती की है। बिलाईगढ़ ब्लॉक में लगभग 196 किसानों के द्वारा गेहूं, मक्का चना, मटर मूंग उड़द आदि फसलों की खेती किया गया है जिससे खेतों की उर्वरा शक्ति में इजाफा होगा और आय में वृद्धि होगी।


Sandeep Kumar

संदीप कुमार कडुकार: रायपुर के छत्तीसगढ़ कॉलेज से बीकॉम और पंडित रवि शंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी से MA पॉलिटिकल साइंस में पीजी करने के बाद पत्रकारिता को पेशा बनाया। मूलतः रायपुर के रहने वाले हैं। पिछले 10 सालों से विभिन्न रीजनल चैनल में काम करने के बाद पिछले सात सालों से NPG.NEWS में रिपोर्टिंग कर रहे हैं।

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