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Chhattisgarh News: इस शहर में करोड़ों का भूमि अधिग्रहण घोटाला, CBI ने शुरू की जांच

Chhattisgarh News: SECL के दीपका कोल माइंस विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण मामले में करोड़ाें का फर्जीवाड़ा सामने आया है। 26 बाहरी लोगों के नाम की सूची बनाई गई और इनके नाम से पक्के मकान दिखाकर 17 करोड़ का वारा-न्यारा कर दिया गया है। भू विस्थापन में बड़ी गड़बड़ी सामने आने और जांच के बाद एसईसीएल विजिलेंस ने मामला सीबीआई को सौंप दिया है। जानकारी के अनुसार सीबीआई ने जांच शुरू भी कर दिया है।

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By Radhakishan Sharma

कोरबा। SECL साउथ ईस्टर्न कोल फील्ड लिमिटेड की कोल माइंस विस्तार के लिए अधिग्रहण और भूमि मुआवजा में करोड़ों का वारा-न्यारा किया गया है। विजिलेंस टीम की जांच में इस बात की पुष्टि के बाद एसईसीएल ने पूरे मामले की जांच के लिए प्रकरण सीबीआई को सौंप दिया है। जानकारी के अनुसार सीबीआई ने जांच शुरू भी कर दिया है।

एसईसीएल के दीपका कोल माइंस विस्तार के लिए मलगांव की जमीन का अधिग्रहण किया गया है। अधिग्रहण के बाद मुआवजा वितरण में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। विजिलेंस की जांच में तकरीबन 17 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा सामने आया है। घोटाले की तार राज्य शासन के राजस्व विभाग व एसईसीएल के अधिकारियों के बीच जुड़ा हुआ है। लिहाजा सीबीआई ने इन दो महत्वपूर्ण बिंदुओं के अलावा और भी मामले की जांच में जुट गई है।

राज्य में जब कांग्रेस की सरकार काबिज थी तब पूरे पांच साल के लिए छत्तीसगढ़ में सीबीआई की एंट्री बंद कर दी गई थी। भाजपा की सरकार बनते ही सीजीपीएससी,कोल व डीएमएफ स्कैम की जांच का जिम्मा राज्य सरकार ने सीबीआई को सौंप दिया है।

0 मलगांव, जिसकी देशभर में हाेने लगी चर्चा

आज से 20 साल पहले एसईसीएल के दीपका कोल माइंस एक्सटेंशन के लिए मलगांव के किसानों व ग्रामीणों की तकरीबन 400 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था। मलगांव के भू विस्थापितों की संख्या 235 है। इसमें 136 भू विस्थापितों को वर्ष 2022 में मुआवजा का वितरण कर दिया गया है। इन्हें 110 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। मुआवजा का वितरण प्रशासन के जरिए किया गया था। मुआवजा वितरण के बाद से ही गड़बड़ी के आरोप लगाए जा रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसईसीएल के विजिलेंस टीम को जांच कर रिपोर्ट पेश करने कहा गया था। विजिलेंस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच के दौरन चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। 26 ऐसे लोगों को मुआवजा दिया गया है जो ना तो गांव में रहते हैं और ना ही उनके नाम पर जमीन है।

0 इसलिए सीबीआई को सौंपा मामला

विजिलेंस की टीम ने जब जांच आगे बढ़ाई तब परत-दर-परत गड़बड़ी सामने आती जा रही थी। मुआवजा वितरण में 17 करोड़ से अधिक की गड़बड़ी सामने आ गई थी। विजिलेंस का अपना दायरा है। बड़े पैमाने में फर्जीवाड़ा के सामने आने और जांच का अधिकार दायरे से बाहर होने के कारण कोल मिनिस्ट्री ने पूरे मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया है।

0 सीबीआई ने शुरू कर दी है जांच

सीबीआई की टीम ने बीते दिनों हरदीबाजार स्थित श्यामू व उसका भतीजा राजेश के घर ठिकानों पर एकसाथ छापामार कार्रवाई की। चर्चा तो इस बात की भी है कि छापामार कार्रवाई में सीबीआई को महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मिले हैं। बता दें कि श्यामू श्रमिक संगठन इंटक के जिलाध्यक्ष हैं। सीबीआई ने जांच का दायर बढ़ा दिया है। इस बात की भी जानकारी मिल रही है कि सीबीआई के राडार पर एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी व आरआई भी हैं।

0 दिखाया पक्का मकान, मौके पर कुछ भी नहीं

मुआवजा वितरण में किस तरह फर्जीवाड़ा किया गया है उसका नमूना भी सामने आने लगा है। दस्तावेजों में पक्का मकान हाेना बताकर मुआवजा के नाम पर लाखों रुपये अंदर कर लिया है। बाड़ी में कुआं, इमारती लकड़ी के विशाल पेड़ इस तरह की जानकारी देते हुए फर्जी मुआवजा वितरण किया गया है।

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