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TET से छूट: सेवारत शिक्षकों को TET से छूट के लिए राज्यसभा में आया प्राइवेट बिल, पढ़िए सीपीएम सांसद ने बिल में किन प्रमुख मुद्दों को उठाते हुए टेट की अनिवार्यता खत्म करने पेश किया बिल

CG Teacher News: TET को लेकर देशभर के प्राइमरी और मिडिल स्कूल के शिक्षकों में असमंजस और तनाव के बीच इन शिक्षकों के लिए अच्छी खबर ये, विपक्षी सांसद ने टेट की अनिवार्यता खत्म करने को लेकर राज्यसभा में प्रस्ताव रखा है। इस संबंध में विधेयक राज्यसभा में पेश किया गया है। पढ़िए विधेयक में टेट को लेकर किन मुद्दों को उठाया गया है।

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इमेज- इंटरनेट 

By Radhakishan Sharma

CG Teacher News: रायपुर। TET को लेकर देशभर के प्राइमरी और मिडिल स्कूल के शिक्षकों में असमंजस और तनाव के बीच इन शिक्षकों के लिए अच्छी खबर ये, विपक्षी सांसद ने टेट की अनिवार्यता खत्म करने को लेकर राज्यसभा में प्रस्ताव रखा है। इस संबंध में विधेयक राज्यसभा में पेश किया गया है।

पढ़िए विधेयक में लिखी गई बातें

RTE एक्ट के सेक्शन 23 का मतलब बताते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने माना कि TET में सिर्फ नई भर्तियों के लिए बल्कि एक्ट से पहले भर्ती हुए टीचरों के लिए भी एक जरूरी मिनिमम क्वालिफिकेशन है।

सुप्रीम कोर्ट में निर्देश दिया, जिन इन-सर्विस टीचरों की सर्विस पांच साल से ज्यादा बची है, उन्हें फैसले के दो साल के अंदर, यानी 01 सितंबर .2027 से पहले TET पास करना होगा, ऐसा करने पर उन्हें जरूरी रिटायरमेंट का सामना करना पड़ेगा। जिन टीचरों की सर्विस पांच साल से कम बची है, उन्हें थोड़ी राहत दी गई, लेकिन वे TET क्वालिफिकेशन के बिना प्रमोशन के लिए एलिजिबल नहीं हैं।

इस तरह के पुराने नियम लागू होने से शिक्षकों में बहुत चिंता पैदा हुई है, क्योंकि इनमें से कई टीचरों ने दशकों तक समर्पित सेवा दी है। खास तौर पर ग्रामीण, दूर-दराज और सामाजिक रूप से पिछड़े इलाकों में एलिमेंट्री एजुकेशन को बढ़ाने और मजबूत करने में काफी मदद की हैं। वे एलिमेंट्री एजु‌केशन की रीढ़ हैं और TET क्वालिफिकेशन न होने की वजह से उन्हें कोई भी नुकसान न सिर्फ सही सर्विस की उम्मीदों और नेयूरल जस्टिस के सिद्धांतों को कमजोर करेगा, बल्कि देश में एजुकेशन सिस्टम की कंटिन्यू और इंस्टीट्यूशनल स्टेबिलिटी को भी अस्थिर करने का खतरा होगा।

संविधान में यह सोचा गया है कि कानूनी नीति को नियमों के साथ चलना चाहिए। फेयरनेस, डीजनेबलनेस और प्रोचीनैलिटी लेजिटिमेट एक्सपेक्टेशन का डॉक्ट्रिन, मनमाने रेट्रोस्पेक्टिव क्रिमिनल नतीजों के खिलाफ प्रिसिपल, और क्वालिटी रिफोर्स को इस्टीट्यूशनल मोबिलिटी के साथ बैलेंस करने की जरूरत के लिए क्वालिफिकेशन नॉर्मा को लागू करने में एक कैलिब्रेटेड और प्रोस्पेक्टिव अप्रोच की जरूरत होती है।

प्रस्तावित बिल यह करना चाहता है कि RTE एक्ट के तहत टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट या ऐसे दूसरे एडिशनल क्वलिफिकेशन क्राइटेरिया पास करने की जरूरत आने से लागू होगी और सिर्फ एक्ट के शुरू होने के बाद की गई तारीख के बाद की गई नियुक्तियों पर ही लगू होगी। बदलाव एक्ट के शुरू होने से पहले टीचरों को कानूनी सुरक्षा देने की कोशिश करते हैं, ताकि उनकी नौकरी बनी रहे, रिटायरमेंट के फायदे सुरक्षित रहे, साथ ही ऐसे उपायों को सजा वाले नतीजों से जोड़े बिना स्क्वर्ड प्रोफेशनल अपटेड और ट्रेनिंग दी आ सके। इसलिए, यह बिल एजुकेशन के स्टैंडर्ड को बेहतर बनाने के मकसद को निष्पक्षता बराबरी और निहित सेवा अधिकारों की सुरक्षा के उतने ही जरूरी संवैधानिक आदेश के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश करता है, जिससे बच्चों के लिए शिक्षा और इन-सर्विस टीचरों के लिए सम्मान और सुरक्षा दोनों पक्की हो सके।

टेट की अनिवार्यता पूर्व में नियुक्त हुए शिक्षकों के लिए खत्म की जा सकती है

सर्व शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप पाण्डेय का कहना है, हमारे संगठन के द्वारा पहले ही यह स्पष्ट किया जा चुका है, सुप्रीम कोर्ट ने आरटीई के जिन प्रावधानों के तहत टेट की अनिवार्यता की बात कही है उन प्रावधानों को परिवर्तित करके टेट की अनिवार्यता पूर्व में नियुक्त हुए शिक्षकों के लिए खत्म की जा सकती है और यही सबसे बेहतर विकल्प है। खेल के नियम खेल के बीच में नहीं बदले जाते, लेकिन शिक्षकों के मामले में ऐसा ही किया जा रहा है। दुर्भाग्य यह है ऐसे गंभीर मुद्दों पर भी कुछ शिक्षक नेता राजनीति की रोटी सेक रहे हैं और सरकार को विभागीय परीक्षा आयोजित करने का विकल्प सुझा रहे हैं, जबकि सबसे बेहतर विकल्प यही है।

राज्यसभा में केरल के सीपीएम सांसद प्राइवेट बिल के जरिए हमारी बात को उठाया है और हमें उम्मीद है कि जल्द ही सत्ता में बैठे सांसद भी इस दिशा में पहल करेंगे और शिक्षकों को इस समस्या से निजात मिलेगी। पूरे देश भर के शिक्षक जो इससे प्रभावित है वह लगातार अलग-अलग माध्यमों से अपनी बात प्रदेश और केंद्र की सरकार तक पहुंचा रहे हैं और यह तय है कि इस मुद्दे पर शिक्षकों की जीत होगी ।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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